Arvind Kejriwal का बड़ा बयान, CEC नहीं सीधे PM Modi के इस्तीफे के लिए आंदोलन करे CJP
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक दबाव समूह 'कॉकरोच जनता पार्टी' के लिए एक संदेश है — जिसमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की मांग की गई है। एक न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने इशारों-इशारों में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जो कुछ भी किया, वह बॉस के कहने पर किया। केजरीवाल ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि पहले आपने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की। अब आप ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। मेरा कहना है कि आगे बढ़िए और सीधे बॉस के इस्तीफ़े की मांग कीजिए। सब कुछ उन्हीं के कहने पर हो रहा है।
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केजरीवाल ने इस कार्यक्रम का एक क्लिप अपने X अकाउंट पर इसी कैप्शन के साथ शेयर किया। उन्होंने आगे कहा, "अब आंदोलन नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े के लिए होना चाहिए।" केजरीवाल का यह बयान CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर CEC ने 26 सितंबर तक इस्तीफ़ा नहीं दिया, तो 2 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। CEC के खिलाफ़ यह विरोध प्रदर्शन तब हो रहा है, जब 'इंडियन एक्सप्रेस' ने चुनाव आयोग के कामकाज और फैसलों को लेकर आयोग के अंदर ही मतभेद होने की खबरें दी थीं।
CJP ने कहा था कि वह मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगा। हालांकि, रविवार को दिपके ने बताया कि मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को शहर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त नहीं दी है। इसके बाद उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उन्हें "विरोध करने का अधिकार" नहीं दिया गया, तो CJP गांधी जयंती पर मुंबई में 'जेल भरो आंदोलन' शुरू करेगा। दीपके ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को हमारे विरोध प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं दी है। नागरिकों की आवाज़ दबाने के ऐसे तरीके स्वीकार्य नहीं हैं।
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सोमवार को CJP के आशुतोष रांका ने ज़ोर देकर कहा कि वे CEC के इस्तीफ़े की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दावा किया कि कुमार ने वोटर लिस्ट से 13 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए और उनके साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि BJP इन आरोपों को लेकर कुमार का बचाव क्यों कर रही है।
फिर युद्ध की कगार पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान: TTP, ISKP और एयरस्ट्राइक... क्या छिड़ने वाली है नई जंग?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर पर बारूद फट चुका है। गोलियां चल चुकी है और अब तोप मोटार गरजने लगे हैं। पाकिस्तान कह रहा है। पहले घुसपैठ की कोशिश हुई। फिर हमारी चौकियों पर फायरिंग की गई। सबसे बड़ा सवाल, क्या अफगान लड़ाकों ने 21 सितंबर को हुए पाकिस्तानी हवाई हमले का बदला लिया है? क्या उसके इस एक्शन से अब दोनों देशों के बीच तनाव एक नए दौर में पहुंच गया है क्योंकि सीमा पर इस बार सिर्फ गोलियां नहीं चल रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान तालिबान के बीच जो है टकराव की नई चिंगारी भड़क चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक खुर्रम सेक्टर में अफगान तालिबान के जवानों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच भारी गोलाबारी हुई है। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि अफगान इलाके की तरफ से पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर फायरिंग शुरू की गई थी। पाकिस्तान का कहना है कि फायरिंग नंरसंहार और प्रांतों से लगे इलाकों की ओर से हुई। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की। यानी कि सीमा पर तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। बंदूके बोलने लगी है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पाकिस्तान का दावा है कि इससे पहले कुछ हथियार बंद लोगों ने अफगानिस्तान की तरफ से खैबर पख्तून ख्वा के खुर्रम इलाके में घुसपैठ की कोशिश की थी। पाकिस्तान ने इन लोगों को प्रतिबंधित तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी कि टीटीपी से जुड़ा बताया है और इसके बाद आरोप है कि अफगान तालीबान ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर फायरिंग शुरू कर दी। पाकिस्तान इसे बिना उपसावे की कारवाई बता रहा है। लेकिन तालिबान इन आरोपों और ऐसी किसी कार्रवाई से इंकार करता है। पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच झड़पें क्यों बढ़ रही हैं? धर्म, जातीयता, भाषा और संस्कृति में समानता रखने वाले ये दो पड़ोसी देश कट्टर दुश्मन क्यों बन गए हैं, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा? पाकिस्तान धर्म के आधार पर बना था और आज भी उसका दावा है कि धर्म की वजह से ही वह भारत से अलग है। तो फिर वह अफ़गानिस्तान के साथ शांति बनाए रखने की कोशिश क्यों नहीं करता, जहाँ भी इस्लामाबाद की तरह ही सुन्नी इस्लाम को माना जाता है?
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अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान के बीच झड़प
रविवार को काबुल के यह दावा करने के बाद कि उसने 28 पाकिस्तानी लड़ाकों को मार गिराया है और 32 अन्य को घायल कर दिया है, ये मुश्किल सवाल एक बार फिर सामने आए हैं। काबुल ने कहा कि पाकिस्तान से हथियारों से लैस एक गुट के अफ़गानिस्तान में घुसने के बाद नूरिस्तान प्रांत में लड़ाई शुरू हुई। अफ़गानिस्तान का आरोप है कि लड़ाकों के इस गुट में इस्लामिक स्टेट के सदस्य शामिल थे और उन्हें पाकिस्तान की सेना और उसके तंत्र का समर्थन हासिल था। काबुल ने यह भी दावा किया कि कई लड़ाके पिछली सरकार के पूर्व सदस्य थे।
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पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान संबंध
हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ़ कुछ लोगों के बॉर्डर पार करके जान-बूझकर या अनजाने में अफ़गानिस्तान में घुसने का नहीं है। पाकिस्तान ने काबुल पर आरोप लगाया है कि वह पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल दे रहा है और जान-बूझकर पाकिस्तान-विरोधी गुटों को अफ़गानिस्तान की ज़मीन से काम करने की इजाज़त दे रहा है। दूसरी ओर, काबुल ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह सीमा पार आतंकवाद में शामिल है और देश को अस्थिर करने के लिए अपने सैनिक और लड़ाके भेज रहा है। उसने इस्लामाबाद पर अफ़गानिस्तान के अंदर हवाई हमले करने और उसकी संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है। इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को पाकिस्तान में घुसने और कई बार तबाही मचाने की इजाज़त देने का आरोप सिर्फ़ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि IS फिर से संगठित होना चाहता है और न सिर्फ़ पाकिस्तान में, बल्कि पड़ोसी देश भारत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है। इस्लामिक स्टेट ऑफ़ खुरासान प्रोविंस (ISKP) ने कई बार अफ़गानिस्तान और भारत को निशाना बनाते हुए बयान और वीडियो जारी किए हैं। उस पर अफ़गानिस्तान के साथ-साथ पाकिस्तान के शिया-बहुल इलाकों में भी आतंकवादी हमले करने के आरोप लगे हैं।
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