कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी छोड़ी, फिर लद्दाख के गांव में जा बसी महिला, बोलीं- 'अब समझ आई पानी की असली कीमत!'
कॉर्पोरेट लॉयर की नौकरी छोड़कर आउटडोर शेफ बनीं नयनतारा चौहान अब लद्दाख के साबु गांव में करीब 2 महीने से रह रही हैं. उन्होंने ड्राई टॉयलेट, नदी के पानी पर निर्भर सप्लाई और गांव की सादगी से जुड़े अपने अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं. लद्दाख की जिंदगी उन्हें इतनी पसंद आई कि अब नयनतारा का मन वापस शहर लौटने के बजाय वहीं बसने का करने लगा है.
ECINet में बदलाव की मांग, Maharashtra CEO ने Election Commission को भेजा पत्र
चुनाव आयोग (EC) के अंदर वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच, महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) एस चोकलिंगम ने चुनाव आयोग के ECINet सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करने वाले स्थानीय चुनाव अधिकारियों के लिए ज़्यादा अधिकार की मांग की है। ECINet, वोटर लिस्ट और चुनाव से जुड़े दूसरे कामों को मैनेज करने के लिए चुनाव आयोग का सेंट्रलाइज़्ड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। 24 सितंबर को चुनाव आयोग के सीनियर अधिकारियों को लिखे एक पत्र में चोकलिंगम ने ECINet में पांच बदलावों की मांग की। इन बदलावों का मकसद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (EROs) को उन अधिकारों का इस्तेमाल करने की इजाज़त देना है जो उन्हें चुनाव कानून के तहत पहले से मिले हुए हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, CEO की ये मांगें दो चुनाव आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की उन चिंताओं से मेल खाती हैं जिनमें कहा गया था कि यह सॉफ़्टवेयर उन अधिकारों को सीमित कर रहा है जिनका इस्तेमाल करने के लिए EROs कानूनी तौर पर हकदार हैं। ERO सब-डिविजनल लेवल के अधिकारी होते हैं जो वोटर लिस्ट तैयार करने, दावों और आपत्तियों पर विचार करने और नामों को शामिल करने या हटाने का फ़ैसला लेने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। महाराष्ट्र अभी SIR (अयोग्य वोटरों को हटाने की प्रक्रिया) के नोटिस वाले चरण में है। 31 अगस्त को जारी राज्य की ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट में पिछली लिस्ट के मुक़ाबले 21.1 प्रतिशत कम वोटर थे, जबकि फ़ाइनल लिस्ट 16 नवंबर को आनी है।
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महाराष्ट्र के CEO ने क्या मांग की?
चोकलिंगम की एक मांग यह थी कि EROs को ऐसा विकल्प दिया जाए जिससे वे उन वोटर्स को पर्सनल हियरिंग (व्यक्तिगत सुनवाई) से छूट दे सकें जिन्होंने सही और संतोषजनक डॉक्यूमेंट्स जमा कर दिए हैं।द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने वोटर्स के लिए SIR नोटिस में बताई गई 13 लिस्ट के अलावा दूसरे डॉक्यूमेंट्स जमा करने का एक और विकल्प भी मांगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी, बेघर और सेक्स-वर्कर समुदायों के लोगों के पास शायद वे डॉक्यूमेंट्स न हों जो उस लिस्ट में बताए गए हैं। महाराष्ट्र के CEO ने यह भी चाहा कि EROs को लॉजिकल विसंगति वाले कुछ मामलों को खुद निपटाने की इजाज़त मिले, जब वे सबूतों से संतुष्ट हों, बजाय इसके कि उन्हें ज़िला-स्तर के अधिकारियों के पास भेजा जाए। "लॉजिकल विसंगति" का मतलब है सिस्टम द्वारा बताई गई कोई गड़बड़ी या मेल न खाना; इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति वोट देने के लिए अयोग्य है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ऐसी विसंगतियां तब होती हैं जब ECINet किसी वोटर का मिलान पिछली SIR (मतदाता सूची के सारांश) की सूची में उसके माता-पिता या दादा-दादी से नहीं कर पाता – उदाहरण के लिए, माता-पिता के नाम या उम्र में अंतर के कारण।
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रिपोर्ट के अनुसार, चोकलिंगम ने मांग की कि विसंगति वाले मामलों में "पिछली SIR का अंश" (Extract of Last SIR) अपलोड करना वैकल्पिक किया जाए, क्योंकि सिस्टम पहले ही पिछली SIR सूची का इस्तेमाल करके गड़बड़ी की पहचान कर चुका है। CEO ने EROs के लिए FAQ और लिखित निर्देश भी मांगे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया के बारे में कई सवाल पूछने हैं और ECI या CEO से मिले ज़बानी निर्देश काफ़ी नहीं हैं। 'एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि FAQ में नोटिस, दस्तावेज़ जमा करने, सुनवाई और मामलों के निपटारे जैसी बातें शामिल होनी चाहिए। SIR की प्रक्रिया पिछले साल जून में शुरू हुई थी और अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ड्राफ़्ट से 13 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाए जा चुके हैं।
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