डबल मर्डर से दहला सुल्तानपुर… टीचर दंपति की बेरहमी से हत्या, स्कूल परिसर में मिले शव
Pitru Paksha 2026: भाग्यशाली या फिर झेलनी पड़ती है परेशानी… पितृपक्ष में जन्मे बच्चों का कैसा होता है भविष्य?
खेल के मैदान में जब गेंद दौड़ती है, तो उसके पीछे दौड़ते शब्दों का जादू अब लगभग गायब हो चुका है. एशियन गेम्स से लेकर भारत-वेस्टइंडीज सीरीज तक, टीवी स्क्रीन पर मैच देखते हुए दर्शकों के कानों में पड़ रही कमेंट्री अब सुकून देने के बजाय सिरदर्द बन रही है. भाषा की मर्यादा टूट चुकी है और खेल की गहरी समझ की जगह नकली उत्साह व नारेबाजी ने ले ली है. गलत आंकड़े, आधे-अधूरे वाक्य और सतही ज्ञान के बीच दर्शक मैदान देखकर भी शब्दों के अकाल से जूझ रहा है. Tue, 29 Sep 2026 16:30:46 +0530