Stock Market Update: सेंसेक्स 400 अंक टूटा, निफ्टी 22,700 के नीचे; कच्चा तेल और FII बिकवाली बनी बड़ी वजह
Stock Market Update: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सोमवार के शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर नजर आई और कई बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
सुबह 9:26 बजे सेंसेक्स 72,371.25 अंक पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान इसमें 400.47 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी 22,658.75 अंक पर था और इसमें 121.50 अंकों की कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,800 के स्तर से भी नीचे चला गया।
HDFC Bank और Reliance Industries ने बढ़ाया दबाव
बाजार की गिरावट में एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों की कमजोरी का भी असर पड़ा। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी का 22,700 के स्तर से नीचे टिकना बाजार में बिकवाली के दबाव को बढ़ा सकता है।
विश्लेषण के मुताबिक, अगर गिरावट आगे भी जारी रहती है तो निफ्टी 22,400 के स्तर की तरफ बढ़ सकता है। यह स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और पिछले दो वर्षों की प्रमुख निचली ट्रेंडलाइन तथा 200-सप्ताह के EMA से जुड़ा हुआ है।
कच्चे तेल की कीमत 106-107 डॉलर के पास
भारतीय बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव भी बताया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब 106-107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों यानी FII की भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।
22,650-22,700 का स्तर अहम
एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी विश्लेषक रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,650-22,700 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, इस क्षेत्र के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बाजार में शॉर्ट टर्म करेक्शन और गहरा हो सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबार में इस स्तर पर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी।
ग्लोबल मार्केट में भी मिला-जुला कारोबार
भारतीय बाजार के साथ एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:51 बजे S&P 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था। वहीं निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स 1.5 फीसदी नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग 0.6 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.1 फीसदी गिरा।
हालांकि, सभी बाजारों में गिरावट नहीं रही। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 फीसदी और Euro Stoxx 50 फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
भारत-यूएस संबंधों पर जयशंकर का बड़ा बयान: बोले- 'हमारी चिंताओं को लेकर अमेरिका गंभीर नहीं, ये समस्या है'
S Jaishankar on US: भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार से जुड़े मतभेदों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए सुरक्षा से जुड़े मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं और अगर कोई सहयोगी देश इन चिंताओं के प्रति पर्याप्त समझ या सहानुभूति नहीं दिखाता है तो इसका असर संबंधों पर पड़ सकता है।
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में आतंकवाद और व्यापारिक जटिलताओं को भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाले मुद्दों में शामिल किया।
आतंकवाद के मुद्दे पर क्या बोले जयशंकर?
जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना पड़ोसी देश के लंबे समय से आतंकवाद को राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने का उल्लेख किया। उनकी टिप्पणी को भारत की पाकिस्तान से जुड़ी सीमापार आतंकवाद की चिंताओं के संदर्भ में देखा गया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के लिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उनका तर्क था कि जब किसी देश के लिए कोई मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण हो और उसका सहयोगी उस चिंता को उसी गंभीरता से न देखे, तो इससे रिश्तों में समस्याएं पैदा होना स्वाभाविक है।
जयशंकर की यह टिप्पणी उनके हालिया संयुक्त राष्ट्र संबोधन के बाद आई है। 26 सितंबर को UNGA में उन्होंने आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके लिए जवाबदेही से बचने की कोशिशों का विरोध किया था तथा आतंकवाद को प्रायोजित करने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराने की बात कही थी।
भारत-अमेरिका रिश्तों में सिर्फ आतंकवाद ही मुद्दा नहीं
भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में सुरक्षा के अलावा व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका की ओर से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित कड़े टैरिफ को लेकर भारत अपनी चिंताएं पहले ही जाहिर कर चुका है।
23 सितंबर को न्यूयॉर्क में जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, मध्य पूर्व की स्थिति और रूस-ईरान से जुड़े प्रतिबंधों पर चर्चा की। भारत की ओर से रूस से तेल खरीद पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर अपनी चिंताएं रखी गई थीं।
रूस से तेल खरीद पर भी बढ़ा दबाव
अमेरिका में पारित नए कानून के तहत रूस और ईरान से आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान है। भारत उन देशों में शामिल है जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं। भारत ने इस मुद्दे पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को लेकर चिंता जताई है।
हालिया घटनाक्रम में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा भी प्रस्तावित है, जहां भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। ऐसे में सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार तीनों मुद्दे फिलहाल द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख हिस्से बने हुए हैं।
जयशंकर के बयान का क्या मतलब है?
जयशंकर के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में रणनीतिक सहयोग के बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। भारत आतंकवाद और अपनी सुरक्षा चिंताओं को महत्वपूर्ण मानता है, जबकि अमेरिका के साथ व्यापार और रूस से ऊर्जा खरीद जैसे आर्थिक एवं रणनीतिक मुद्दों पर भी बातचीत चल रही है।
इसलिए जयशंकर का न्यूयॉर्क में दिया गया बयान केवल आतंकवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की व्यापक सुरक्षा और विदेश नीति प्राथमिकताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
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