"शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तीनों शंकराचार्यों का समर्थन":शारदा पीठ के शंकराचार्य बोले- प्रशासन ने ब्राह्मण बच्चों को निर्दयता से मारा, यह निंदनीय है
25 जनवरी को नर्मदा जन्मोत्सव के दिन द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज जबलपुर पहुंचे। यहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद को लेकर मुखरता से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा- 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है। उसे कोई अधिकार नहीं। उन्होंने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की है। बेहद निंदनीय है। 6 सवालों में पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल 1: नर्मदा प्राकट्योत्सव पर जबलपुर आना हुआ, कैसा महसूस कर रहे हैं? सवाल 2: प्रयागराज में प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है? सवाल 3: प्रशासन ने 2 बार नोटिस जारी किए हैं? सवाल 4: इस विवाद को 7 दिन बीत चुके हैं। शंकराचार्य लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। आगे क्या होगा? सवाल 5: उत्तर प्रदेश के राजा धार्मिक हैं। धार्मिक माने जाते हैं, फिर ऐसे हालात क्यों बन रहे? रामभद्राचार्य ने कहा कि ये संत-अशांत की लड़ाई है? सवाल 6: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सरकार ने धर्म को बड़ी महत्ता दी है। इसके बावजूद यह सब हो रहा है? ...................................................... ये खबर भी पढ़ें.. अखाड़ा परिषद बोला-शंकराचार्य पद तभी मान्य...जब 13 अखाड़े चादर ओढ़ाएं प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए टकराव ने संत समाज को भी दो हिस्सों में खड़ा कर दिया है। इस घटनाक्रम पर पहली बार उज्जैन से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज का बयान आया है। उन्होंने न सिर्फ घटना को चिंताजनक बताया, बल्कि शंकराचार्य के पद और अखाड़ों की परंपरा को लेकर भी सीधे सवाल खड़े कर दिए। पढ़ें पूरी खबर
पटना NEET छात्रा मौत मामला: फॉरेंसिक रिपोर्ट ने जांच की पोल खोली, सवाल-किसे बचाना चाहती थी पटना पुलिस?
Patna NEET aspirant death case: शंभू गर्ल्स हॉस्टल नीट छात्रा मौत मामले में पटना पुलिस ने जांच की दिशा, बयान और त्वरित निष्कर्ष निकाल लिए उसके कारण एक बड़ा सवाल आम जनता के मन में गूंज रहा है- क्या पुलिस जांच शुरू से ही संदिग्धों में से किसी को बचाने का प्रयास कर रही थी? अब जब सबूत फॉरेंसिक रिपोर्ट के रूप से सामने आए और और सच लगातार उजागर हो रहा है, तब वही सवाल सरकार, पुलिस और न्यायपालिका के सामने खड़ा है- क्या न्याय निष्पक्ष रूप से मिलेगा? और किसे बचाने की कोशिश की जा रही थी?
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