Kanpur विमान हादसा: AAIB की रिपोर्ट में खुलासा, Garg Aviation ने नहीं किया था निगरानी नियमों का पालन
जांच एजेंसी एएआईबी ने पिछले महीने गर्ग एविएशन के दोहरे-इंजन वाले विमान के हादसे पर जारी शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि संचालक ने उड़ान की निगरानी के नियमों का पालन नहीं किया था। दुर्घटना में प्रशिक्षु पायलट और एक प्रशिक्षक की मौत हो गई थी। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने यह भी सुझाव दिया है कि उड्डयन क्षेत्र के नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफटीओ) द्वारा उड़ान संबंधी आंकड़ों की निगरानी की प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
गर्ग एविएशन के दो इंजन वाले टेकनम पी2006टी प्रशिक्षण विमान के 27 अगस्त को दिन में करीब साढ़े ग्यारह बजे दुर्घटनाग्रस्त होने से एक प्रशिक्षु पायलट और एक प्रशिक्षक की मौत हो गई थी। एएआईबी ने कहा कि हादसे से पहले विमान से कोई आपात संदेश नहीं भेजा गया था और हादसे के कारण विमान नष्ट हो गया। हादसा विमान के कानपुर के हवाई अड्डे से उड़ान भरने के 20 मिनट से भी कम समय बाद हुआ।
इस हवाई अड्डे का प्रबंधन और रखरखाव भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) करता है। एएआईबी की सात पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्ग एविएशन ने एफटीओ में प्रशिक्षण की निगरानी से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया था। एएआईबी ने कहा, ‘‘उड़ान संबंधी आंकड़ों की निगरानी के बारे में पूछे जाने पर एफटीओ ने बताया कि गार्मिन के आंकड़ों की बेतरतीब तरीके से निगरानी की जा रही थी।
हालांकि, ऐसी निगरानी का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया था और निगरानी कैसे की जानी है या इसमें किन सीमा से अधिक आंकड़ों को माना जाएगा, इसे तय करने वाली कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नहीं थी।’’ गार्मिन डेटा कार्ड छोटे विमानों में इस्तेमाल होने वाला एक उपकरण है, जो उड़ान से जुड़े आंकड़ों को रिकॉर्ड करता है।
फिजिकल हेल्थ- इन 10 सवालों का जवाब दें:ये बताएंगे आपके दिल का हाल, आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानें दिल को कैसे रखें हेल्दी–हैप्पी
"दिल तो बच्चा है जी..." गुलजार का लिखा यह गाना सुनते ही एक मासूम, जिद्दी और भावुक दिल की तस्वीर उभरती है। दिल हमारी फिल्मों में है, शायरी में है और रोजमर्रा की भाषा में भी। हम ‘दिल लगाते हैं’, ‘दिल टूटता है’, ‘दिल जीतते हैं’ और कभी-कभी किसी बात को ‘दिल पर भी ले लेते’ हैं। मशहूर फ्रेंच किताब ‘द लिटिल प्रिंस’ में लिखा है, "साफ-साफ देखने के लिए दिल से देखना पड़ता है।" शायद इसलिए सदियों से इंसान ने दिल को सिर्फ शरीर के एक अंग नहीं, बल्कि जीवन के केंद्र की तरह देखा है। लेकिन एक विडंबना भी है। “जिस दिल को हम प्यार, भावनाओं और एहसासों का घर मानते हैं, उसकी सेहत के बारे में अक्सर सबसे कम सोचते हैं।” दिल की एक खासियत ये भी है कि वह शिकायत बहुत कम करता है। जब हम घंटों कुर्सी से चिपके रहते हैं, देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या तनाव को जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, तब भी यह बिना रुके अपना काम करता रहता है। यही वजह है कि दिल की बीमारी अक्सर अचानक नहीं होती। यह वर्षों तक हमारी आदतों का हिसाब जोड़ती रहती है। आज ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ है। इस मौके पर ‘फिजिकल हेल्थ’ में दिल की सेहत पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. प्रदीप कुमार नायक, डायरेक्टर, हेड- कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हमारी कौन-सी आदतें हार्ट की सबसे बड़ी दुश्मन हैं? जवाब- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हार्ट डिजीज के ज्यादातर मामलों के पीछे ऐसे रिस्क फैक्टर होते हैं, जिन पर हमारा कंट्रोल होता है। यानी हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल हार्ट हेल्थ पर बड़ा असर डालती है। कई आदतें धीरे-धीरे हार्ट और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करती हैं। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ग्राफिक में सभी आदतें देखिए- सवाल- लंबे समय तक बैठे रहना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर हम रोज एक्सरसाइज करें तो क्या लंबे समय तक बैठने का नुकसान नहीं होता? जवाब- नहीं, अगर कोई व्यक्ति रोज 30-60 मिनट वर्कआउट करता है, लेकिन बाकी समय ज्यादातर बैठा रहता है, तो उसके हार्ट पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए हार्ट हेल्थ के लिए पूरे दिन एक्टिव रहना जरूरी है। सवाल- देर रात तक मोबाइल चलाना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब- मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी बॉडी क्लॉक को प्रभावित करती है। इससे नींद आने में देर हो सकती है। लगातार खराब नींद का असर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन और स्ट्रेस लेवल पर पड़ता है। समय के साथ ये सभी बदलाव हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं। सवाल- नींद पूरी न होने या स्लीप क्वालिटी खराब होने से हार्ट पर लोड कैसे बढ़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या रोज बाहर का खाना खाने से हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, बाहर के कई फूड्स में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा होती है। अगर रोजाना ऐसी डाइट लेते हैं तो धीरे-धीरे आर्टरीज और हार्ट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। सवाल- क्या पानी कम पीने का भी हार्ट से कोई रिलेशन है? जवाब- हां, इसे ऐसे समझिए- सवाल- क्या गुस्सा, तनाव और चिड़चिड़ापन हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं? जवाब- हां, इनका असर सीधे ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। 2024 में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गुस्सा आने के बाद ब्लड वेसल्स के सामान्य रूप से फैलने की क्षमता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। ब्लड वेसल्स का हेल्दी रहना हार्ट तक पर्याप्त ब्लड पहुंचाने के लिए जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार तनाव, गुस्से या चिड़चिड़ेपन में रहता है, तो समय के साथ हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- शराब का हार्ट पर क्या असर पड़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- हार्ट एज क्या होती है? क्या आपके दिल की उम्र आपसे ज्यादा हो सकती है? जवाब- हां, आपके दिल की उम्र आपकी असली उम्र से ज्यादा हो सकती है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- अब समझते हैं हार्ट एज कैसे निकाली जाती है। डॉक्टर या कैलकुलेटर इन 8 बातों को देखते हैं- फिर इनकी तुलना आपकी उम्र के एक हेल्दी व्यक्ति से की जाती है। अगर रिस्क फैक्टर्स ज्यादा हैं तो हार्ट एज भी असली उम्र से ज्यादा होगी। सवाल- किन संकेतों से पता चलता है कि आपकी ‘हार्ट एज’ आपकी असली उम्र से ज्यादा है? जवाब- हार्ट एज आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं बढ़ती। यह कई रिस्क फैक्टर्स के लंबे समय तक साथ रहने का नतीजा होती है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- अगर कोई व्यक्ति अपनी हार्ट हेल्थ को बेहतर करने के लिए अगले 10 साल में सिर्फ 3 आदतें सुधारे, तो वो तीन आदतें कौन सी होनी चाहिए? जवाब- हार्ट हेल्थ में छोटे, लेकिन टिकाऊ बदलाव ज्यादा असर डालते हैं। इसमें ये तीन आदतें सबसे जरूरी हैं- अब आपके लिए एक क्विज। ये क्विज बताएगी कि आप अपनी सेहत का कितना ख्याल रखते हैं। जितने सवालों का आपका जवाब हां में है, आपकी लाइफस्टाइल उतनी ही हार्ट फ्रेंडली है। दिल की बीमारी की शुरुआत अक्सर सीने के दर्द से नहीं, बल्कि इस गलतफहमी से होती है कि "मुझे कुछ नहीं होगा।" सच यह है कि दिल की सेहत का फैसला अस्पताल में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों में होता है। …………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा ………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब:सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़ें..
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