जरूरत की खबर- शाकाहारियों के लिए प्रोटीन के बेस्ट सोर्स:डॉक्टर से समझें शरीर में प्रोटीन के 10 जरूरी काम, डेफिशिएंसी के 8 संकेत
हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं हैं। हर कोशिका को ठीक से काम करने के लिए प्रोटीन चाहिए। प्रोटीन शरीर में अनगिनत काम करता है। मसल्स बनाता है, डैमेज्ड टिश्यूज को रिपेयर करता है, हार्मोन-एंजाइम बनाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि प्रोटीन शरीर का सबसे अहम कंपोनेंट है। मांसाहारी लोगों के लिए तो लीन प्रोटीन के ढेरों ऑप्शन हैं। लेकिन अकसर ये सवाल उठता है कि शाकाहारियों को अच्छा और पर्याप्त प्रोटीन कैसे मिले। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में शाकाहारियों के लिए प्रोटीन ऑप्शंस की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’ सवाल- शरीर के लिए प्रोटीन क्यों जरूरी है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ग्राफिक में प्रोटीन के 10 जरूरी काम देखिए- सवाल- एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज कितने प्रोटीन की जरूरत होती है? जवाब- इसकी जरूरत उम्र और शरीर के वजन पर निर्भर करती है। ICMR और NIN (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन) के मुताबिक, एक स्वस्थ वयस्क को डेली पर 0.83 ग्राम पर kg बॉडीवेट प्रोटीन की जरूरत होती है। यानी अगर किसी का बॉडीवेट 60kg है तो उसे रोज करीब 50 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कैसे पहचानें कि शरीर में प्रोटीन की कमी है? जवाब- प्रोटीन की कमी का असर मसल्स, स्किन, बाल, इम्यूनिटी और एनर्जी लेवल पर पड़ता है। प्रोटीन डेफिशिएंसी के सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वेजिटेरियन लोगों में हमेशा प्रोटीन की कमी होती है? जवाब- नहीं, अगर डाइट बैलेंस्ड है तो शाकाहारी लोग भी अपनी प्रोटीन की डेली जरूरत पूरी कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिए- सवाल- शाकाहारियों के लिए प्रोटीन के 10 बेस्ट सोर्स कौन-से हैं? जवाब- दाल, सोया, दूध, मटर और नट्स जैसी चीजें डाइट में शामिल करके प्रोटीन की जरूरत आसानी से पूरी कर सकते हैं। ग्राफिक में प्रोटीन के बेस्ट सोर्स देखिए- सवाल- क्या इन सभी सोर्सेज से मिलने वाले प्रोटीन एक जैसे होते हैं? जवाब- नहीं, प्रोटीन की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें जरूरी अमीनो एसिड कितनी मात्रा में हैं। शरीर उसे कितनी अच्छी तरह पचा व इस्तेमाल कर पा रहा है। सवाल- कंप्लीट प्रोटीन क्या होता है? जवाब- कुछ खाद्य पदार्थ शरीर को प्रोटीन बनाने के लिए एक साथ सभी जरूरी अमीनो एसिड देते हैं। इन्हें ‘कंप्लीट प्रोटीन’ कहा जाता है। दूध और दही इसके प्रमुख उदाहरण हैं। सवाल- किस दाल में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है? जवाब- सभी दालों में प्रोटीन होता है। लेकिन उनकी मात्रा अलग-अलग होती है। किस दाल में कितना प्रोटीन होता है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- 60 ग्राम डेली प्रोटीन के लिए एक वेजिटेरियन थाली में कौन-सी चीजें शामिल करें? जवाब- एक सामान्य शाकाहारी व्यक्ति बिना प्रोटीन पाउडर, अंडा या चिकन के भी दिन भर की डाइट से करीब 60 ग्राम प्रोटीन प्राप्त कर सकता है। इसके लिए हर मील में एक प्रोटीन सोर्स शामिल करना जरूरी है। वेजिटेरियन थाली नाश्ता कुल: लगभग 15 ग्राम दोपहर का खाना कुल: लगभग 19 ग्राम शाम का स्नैक कुल: लगभग 14 ग्राम डिनर कुल: लगभग 24 ग्राम दिनभर का कुल प्रोटीन: करीब 60-70 ग्राम सवाल- उम्र बढ़ने के साथ प्रोटीन की जरूरत क्यों बढ़ सकती है? जवाब- बढ़ती उम्र के साथ शरीर में मसल मास और स्ट्रेंथ धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस प्रक्रिया को ‘सार्कोपीनिया’ कहते हैं। साथ ही उम्र बढ़ने पर शरीर प्रोटीन का उपयोग पहले जितनी कुशलता से नहीं कर पाता। इसलिए मांसपेशियों, हड्डियों और शारीरिक क्षमता को बनाए रखने के लिए प्रोटीन की जरूरत बढ़ सकती है। सवाल- क्या डाइट में सिर्फ प्रोटीन खाना सही है? जवाब- नहीं, शरीर को सिर्फ प्रोटीन नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की भी जरूरत होती है। अगर डाइट में सिर्फ प्रोटीन लेते हैं और दूसरे पोषक तत्वों की अनदेखी करते हैं तो इसका सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। सवाल- बैलेंस्ड प्रोटीन के अलावा हेल्दी रहने के लिए और क्या चीजें जरूरी हैं? जवाब- शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त पानी, कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, फाइबर और विटामिन-मिनरल्स के साथ नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी जरूरी है। सवाल- क्या बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं? जवाब- हां, प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से कुछ लोगों को हेल्थ इश्यूज हो सकते हैं। ज्यादा प्रोटीन लेने के सभी संभावित साइड इफेक्ट्स ग्राफिक में देखिए- प्रोटीन शरीर के लिए उतना ही जरूरी है, जितना कार के लिए इंजन। यह सिर्फ एक मिथक है कि शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की डेली जरूरत पूरी नहीं की जा सकती है। हालांकि, सिर्फ प्रोटीन पर फोकस करने की बजाय संतुलित और विविध आहार लेना ज्यादा जरूरी है, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें। *************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- तुलसी पत्ती के फायदे: शुगर-बीपी कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, डॉक्टर से जानें इससे जुड़े मिथ और फैक्ट, ये लोग न खाएं घर में किसी को सर्दी-जुकाम या खांसी हो जाए तो दादी-नानी अक्सर ‘तुलसी का काढ़ा’ पीने की सलाह देती हैं। चरक संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में तुलसी को 'जड़ी-बूटियों की रानी' कहा गया है। हिंदू परंपरा में इसे पवित्र पौधा माना जाता है। साथ ही लंबे समय से औषधीय उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- इन 10 सवालों का जवाब दें:ये बताएंगे आपके दिल का हाल, आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानें दिल को कैसे रखें हेल्दी–हैप्पी
"दिल तो बच्चा है जी..." गुलजार का लिखा यह गाना सुनते ही एक मासूम, जिद्दी और भावुक दिल की तस्वीर उभरती है। दिल हमारी फिल्मों में है, शायरी में है और रोजमर्रा की भाषा में भी। हम ‘दिल लगाते हैं’, ‘दिल टूटता है’, ‘दिल जीतते हैं’ और कभी-कभी किसी बात को ‘दिल पर भी ले लेते’ हैं। मशहूर फ्रेंच किताब ‘द लिटिल प्रिंस’ में लिखा है, "साफ-साफ देखने के लिए दिल से देखना पड़ता है।" शायद इसलिए सदियों से इंसान ने दिल को सिर्फ शरीर के एक अंग नहीं, बल्कि जीवन के केंद्र की तरह देखा है। लेकिन एक विडंबना भी है। “जिस दिल को हम प्यार, भावनाओं और एहसासों का घर मानते हैं, उसकी सेहत के बारे में अक्सर सबसे कम सोचते हैं।” दिल की एक खासियत ये भी है कि वह शिकायत बहुत कम करता है। जब हम घंटों कुर्सी से चिपके रहते हैं, देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या तनाव को जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, तब भी यह बिना रुके अपना काम करता रहता है। यही वजह है कि दिल की बीमारी अक्सर अचानक नहीं होती। यह वर्षों तक हमारी आदतों का हिसाब जोड़ती रहती है। आज ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ है। इस मौके पर ‘फिजिकल हेल्थ’ में दिल की सेहत पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. प्रदीप कुमार नायक, डायरेक्टर, हेड- कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हमारी कौन-सी आदतें हार्ट की सबसे बड़ी दुश्मन हैं? जवाब- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हार्ट डिजीज के ज्यादातर मामलों के पीछे ऐसे रिस्क फैक्टर होते हैं, जिन पर हमारा कंट्रोल होता है। यानी हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल हार्ट हेल्थ पर बड़ा असर डालती है। कई आदतें धीरे-धीरे हार्ट और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करती हैं। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ग्राफिक में सभी आदतें देखिए- सवाल- लंबे समय तक बैठे रहना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर हम रोज एक्सरसाइज करें तो क्या लंबे समय तक बैठने का नुकसान नहीं होता? जवाब- नहीं, अगर कोई व्यक्ति रोज 30-60 मिनट वर्कआउट करता है, लेकिन बाकी समय ज्यादातर बैठा रहता है, तो उसके हार्ट पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए हार्ट हेल्थ के लिए पूरे दिन एक्टिव रहना जरूरी है। सवाल- देर रात तक मोबाइल चलाना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है? जवाब- मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी बॉडी क्लॉक को प्रभावित करती है। इससे नींद आने में देर हो सकती है। लगातार खराब नींद का असर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन और स्ट्रेस लेवल पर पड़ता है। समय के साथ ये सभी बदलाव हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं। सवाल- नींद पूरी न होने या स्लीप क्वालिटी खराब होने से हार्ट पर लोड कैसे बढ़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या रोज बाहर का खाना खाने से हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, बाहर के कई फूड्स में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा होती है। अगर रोजाना ऐसी डाइट लेते हैं तो धीरे-धीरे आर्टरीज और हार्ट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। सवाल- क्या पानी कम पीने का भी हार्ट से कोई रिलेशन है? जवाब- हां, इसे ऐसे समझिए- सवाल- क्या गुस्सा, तनाव और चिड़चिड़ापन हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं? जवाब- हां, इनका असर सीधे ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। 2024 में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गुस्सा आने के बाद ब्लड वेसल्स के सामान्य रूप से फैलने की क्षमता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। ब्लड वेसल्स का हेल्दी रहना हार्ट तक पर्याप्त ब्लड पहुंचाने के लिए जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार तनाव, गुस्से या चिड़चिड़ेपन में रहता है, तो समय के साथ हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- शराब का हार्ट पर क्या असर पड़ता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- हार्ट एज क्या होती है? क्या आपके दिल की उम्र आपसे ज्यादा हो सकती है? जवाब- हां, आपके दिल की उम्र आपकी असली उम्र से ज्यादा हो सकती है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- अब समझते हैं हार्ट एज कैसे निकाली जाती है। डॉक्टर या कैलकुलेटर इन 8 बातों को देखते हैं- फिर इनकी तुलना आपकी उम्र के एक हेल्दी व्यक्ति से की जाती है। अगर रिस्क फैक्टर्स ज्यादा हैं तो हार्ट एज भी असली उम्र से ज्यादा होगी। सवाल- किन संकेतों से पता चलता है कि आपकी ‘हार्ट एज’ आपकी असली उम्र से ज्यादा है? जवाब- हार्ट एज आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं बढ़ती। यह कई रिस्क फैक्टर्स के लंबे समय तक साथ रहने का नतीजा होती है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- अगर कोई व्यक्ति अपनी हार्ट हेल्थ को बेहतर करने के लिए अगले 10 साल में सिर्फ 3 आदतें सुधारे, तो वो तीन आदतें कौन सी होनी चाहिए? जवाब- हार्ट हेल्थ में छोटे, लेकिन टिकाऊ बदलाव ज्यादा असर डालते हैं। इसमें ये तीन आदतें सबसे जरूरी हैं- अब आपके लिए एक क्विज। ये क्विज बताएगी कि आप अपनी सेहत का कितना ख्याल रखते हैं। जितने सवालों का आपका जवाब हां में है, आपकी लाइफस्टाइल उतनी ही हार्ट फ्रेंडली है। दिल की बीमारी की शुरुआत अक्सर सीने के दर्द से नहीं, बल्कि इस गलतफहमी से होती है कि "मुझे कुछ नहीं होगा।" सच यह है कि दिल की सेहत का फैसला अस्पताल में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों में होता है। …………………. ग्राफिक- विपुल शर्मा ………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब:सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़ें..
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