युवजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था खत्म हो गई है और जंगल राज चल रहा है, जिसमें विपक्ष के खिलाफ बदले की राजनीति की जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक लंबे बयान में, YSRCP प्रमुख ने हाल ही में आधी रात को हुई पुलिस की छापेमारी और पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए।
रेड्डी ने खास तौर पर अलूर के विधायक विरुपाक्षी के मामले का ज़िक्र किया। जगन ने कहा कि नारा चंद्रबाबू नायडू के शासन में कानून-व्यवस्था का बुरा हाल है। हमलावरों को सुरक्षा मिलती है और पीड़ितों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं: यह बदले की राजनीति है। मिस्टर चंद्रबाबू नायडू, आज आंध्र प्रदेश में असल में क्या हो रहा है? अगर हमला करने वाले सत्ताधारी पार्टी के हों, तो उन्हें बचाया जाता है। अगर पीड़ित YSR कांग्रेस पार्टी के हों, तो उन पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं। अगर जन-प्रतिनिधि पीड़ितों का साथ देते हैं, तो उन पर भी केस दर्ज कर लिया जाता है। जो लोग सरकार से सवाल पूछते हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। जो लोग सरकार को जवाबदेह ठहराने की हिम्मत करते हैं, उन्हें आधी रात को पुलिस की छापेमारी का सामना करना पड़ता है और उनके दरवाज़े तोड़ दिए जाते हैं। क्या यही लोकतंत्र है? क्या यही न्याय है? क्या यही कानून का शासन है?
YSRCP प्रमुख ने सुबह-सुबह एक मौजूदा MLA के घर पर बड़े पैमाने पर पुलिस कार्रवाई की ज़रूरत पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या अलूर के BC MLA विरुपाक्षी कोई आतंकवादी हैं? लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए MLA के घर पर रात 2:45 बजे छापा मारने के लिए इतनी बड़ी पुलिस फ़ोर्स तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? जिस तरह से पुलिस ने दरवाज़े तोड़कर MLA विरुपाक्षी और उनके बेटे चंद्रशेखर को गिरफ़्तार किया, उससे एक बुनियादी सवाल उठता है: क्या इस राज्य में अभी भी कानून का राज है?
गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं के बारे में बताते हुए जगन ने आरोप लगाया कि MLA को पार्टी के एक कार्यकर्ता की रक्षा करने की वजह से निशाना बनाया गया। पोस्ट में कहा गया कि चिपपागिरी मंडल के नेमाकल्लू गांव में, TDP कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर YSRCP नेता के घर पर हमला किया। अपनी जान के डर से, नेता ने MLA विरुपाक्षी को फोन करके खुद और अपने परिवार के लिए सुरक्षा मांगी। क्या पार्टी कार्यकर्ता की मदद के लिए बुलावा आने पर प्रतिक्रिया देना कोई अपराध है? क्या पीड़ित परिवार का साथ देना कोई जुर्म है? जब विरुपाक्षी परिवार को सांत्वना देने गए, तो TDP कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर उन पर पथराव किया, जिससे उनके भाई श्रीरामुलु घायल हो गए। अगर कानून निष्पक्ष रूप से काम कर रहा होता, तो किसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए था - हमलावरों को या उस MLA को जिस पर हमला हुआ था? इसके बजाय, इस सरकार के तहत, हमला करने के आरोपी लोगों को सुरक्षा मिलती है, जबकि पीड़ित को ही आरोपी बना दिया जाता है। MLA और YSRCP कार्यकर्ताओं के खिलाफ हत्या की कोशिश जैसे आरोप दर्ज किए गए हैं।
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मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को हाई कोर्ट से एक हल्का सा झटका लगा है, उन्हें आज जिस मामले में उम्मीद थी उसमें उन्हें नाउम्मीदी हाथ लगी है, प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर अटक गया है , आज हाई कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसे टाल दिया, मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
हाई कोर्ट में आज प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर सुनवाई हुई, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि 2025 के नए प्रमोशन नियम लागू करने से पहले क्या सुप्रीम कोर्ट से कोई अनुमति या आवेदन दिया गया था। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने बताया कि कई राज्यों से जुड़ी एक याचिका पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उसकी सुनवाई अभी तक नहीं हो सकी है।
सुप्रीम कोर्ट की लंबित याचिका का जिक्र
इस दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि साल 2025 के नियमों में प्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी नंबर 13954/2016 का भी उल्लेख किया गया है। जिसमें प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। ये सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह तय होगा कि 2025 में बने नियमों का का असर किस तरह होगा।
दोनों पक्षों ने हाई कोर्ट को दिए निर्देश
कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि किसी भी मामले में विरोधाभासी फैसलों से बचना आवश्यक होना चाहिए इसलिए राज्य सरकार और याचिकककर्ता सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की जल्दी सुनवाई के लिए आवेदन लगायें और सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद है इस मामले की सही क़ानूनी दिशा तय हो सकेगी। अब दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की जल्द सुनवाई कराने की कोशिश करेंगे।
जबलपुर से वंदना झा की रिपोर्ट
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