फल-फूल नहीं, 5 पत्थर चढ़ाते हैं भक्त! भारत के इन अनोखे मंदिरों की परंपरा कर देगी हैरान
भारत के मंदिर अपनी अलग-अलग परंपराओं और मान्यताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। जहां अधिकांश मंदिरों में भक्त भगवान को फल, फूल, मिठाई या धन अर्पित करते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी धाम हैं जहां आस्था का तरीका बिल्कुल अलग है। कहीं लोग अपनी पूरी आपबीती कागज पर लिखकर भगवान के चरणों में रखते हैं, तो कहीं सिर्फ पांच पत्थर चढ़ाकर मनोकामना मांगते हैं। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही कुछ अनोखे मंदिरों के बारे में।
चितई गोलू देवता मंदिर: जहां लिखी जाती है फरियाद
उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित चितई गोलू देवता मंदिर न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु अपनी समस्या, शिकायत या मनोकामना साधारण कागज या स्टाम्प पेपर पर लिखकर मंदिर परिसर में टांगते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना सुन ली जाती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त मंदिर में पीतल की घंटी चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं।
मां बगदाई वनदेवी मंदिर: पांच पत्थरों की अनोखी परंपरा
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के खमतराई स्थित मां बगदाई वनदेवी मंदिर में भक्त पांच छोटे पत्थर चढ़ाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह परंपरा लगभग एक सदी पुरानी है। पहले लोग जंगलों से सुरक्षित यात्रा की कामना करते हुए यहां पत्थर अर्पित करते थे और आज भी मन्नत पूरी होने पर दोबारा पांच पत्थर चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है।
पत्थरों से बनते हैं सपनों के घर
आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमा पर स्थित बंगारू तिरुपति में श्रद्धालु मंदिर परिसर में कंकड़-पत्थर अर्पित कर अपनी इच्छाएं व्यक्त करते हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के कई देवस्थानों और छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के आसपास श्रद्धालु छोटे-छोटे पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर घर जैसी आकृति बनाते हैं। लोकमान्यता है कि ऐसा करने से अपना घर बनाने का सपना जल्द पूरा होने की कामना की जाती है।
आस्था की परंपराएं बनाती हैं इन मंदिरों को खास
भारत के ये मंदिर बताते हैं कि श्रद्धा केवल चढ़ावे की वस्तुओं में नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास में होती है। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं भले ही अलग हों, लेकिन उनका उद्देश्य ईश्वर के प्रति आस्था और मनोकामना की अभिव्यक्ति ही होता है।
नोट: यह लेख विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय लोकविश्वासों पर आधारित है। इन मान्यताओं को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
मंगला गौरी व्रत में क्या चढ़ाएं? जानें पूजा सामग्री, नियम और शुभ मंत्र
मंगला गौरी व्रत सावन माह के मंगलवार को रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक व्रत है, जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए करती हैं. वहीं कुंवारी कन्याएं योग्य वर और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं. आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत की आवश्यक पूजा सामग्री, महत्वपूर्ण नियम और शुभ मंत्र.
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