WPL 2026: ऐसा हुआ तभी प्लेऑफ में पहुंच पाएगी मुंबई इंडियंस, वरना पहले ही राउंड से होगी बाहर
WPL 2026: वुमेन्स प्रीमियर लीग 2026 रोमांचक अंदाज में आगे बढ़ रहा है. जहां एक ओर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम प्लेऑफ में पहुंच गई है, वहीं बाकी की टीमों के बीच अभी भी जंग जारी है. मगर, इस बीच 2 बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस की टीम की हालत खराब है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको उस समीकरण के बारे में बताते हैं, जिसकी मदद से MI प्लेऑफ में पहुंच सकेगी या नहीं.
मुंबई इंडियंस ने जीते हैं सिर्फ 2 मैच
वुमेन्स प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस ने अब तक 6 मैच खेले हैं, जिसमें 2 मैच जीते हैं और 4 मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा है. मुंबई की टीम 4 अंक और +0.046 नेट रन रेट के साथ अंक तालिका में चौथे पायदान पर है. अब यहां से मुंबई को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए न केवल अपने प्रदर्शन बल्कि दूसरी टीमों के प्रदर्शन पर भी निर्भर रहना होगा.
प्लेऑफ में पहुंचने के लिए मुंबई इंडियंस का समीकरण
मुंबई इंडियंस को इस सीजन में अभी 2 मैच खेलने हैं. 26 जनवरी को MI का सामना आरसीबी से होगा और फिर आखिरी लीग मैच 30 जनवरी को गुजरात जायंट्स के साथ खेलना है. अब यदि मुंबई इन दोनों ही मैचों को जीत लेगी, तो उसके पास 8 अंक हो जाएंगे. मगर, सिर्फ इन मैचों को जीतकर मुंबई प्लेऑफ में नहीं पहुंच सकती.
We've been there before ????
— Mumbai Indians (@mipaltan) January 25, 2026
Revisit the fa????????liar qualifying journey from 2015 ????https://t.co/Jc8CNOxLkR
इसके लिए MI को दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात जायंट्स के हारने की भी उम्मीद करनी होगी. असल में, दिल्ली और गुजरात के पास 6-6 अंक हैं और उनके 2-2 मैच बचे हैं. ऐसे में दोनों टीमों के पास 10-10 अंक तक पहुंचने का मौका है. ऐसे में मुंबई को उम्मीद करनी होगी कि इनमें से कोई एक टीम 8 अंक तक न पहुंच सके. तो मुंबई के पास प्लेऑफ में पहुंचने का मौका होगा. मगर, अच्छी बात ये है कि मुंबई का नेट रन रेट प्लस में है, जबकि इन दोनों टीमों का नेट रन रेट नेगेटिव में है.
प्लेऑफ में पहुंच चुकी है RCB
वुमेन्स प्रीमियर लीग 2026 के पहले मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम सबसे पहले प्लेऑफ में पहुंची. आरसीबी ने शुरुआती 5 मैचों में लगातार जीत दर्ज की. हालांकि, अपने 6वें लीग में स्मृति मंधाना की कप्तनी वाली RCB को सीजन की पहली हार का सामना करना पड़ा, जब दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें धूल चटाई.
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बजट 2026 से पहले समझिए क्या होते हैं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर, महंगाई और बाजार से इसका क्या है रिश्ता
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। हर साल जब केंद्र सरकार का आम बजट पेश होता है, तो सबसे ज्यादा चर्चा इनकम टैक्स को लेकर होती है, लेकिन इसके साथ-साथ अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। ये ऐसे कर होते हैं जो हमारी रोजमर्रा की चीजों की कीमत में जुड़े होते हैं। बजट में जब इन करों में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब, महंगाई और कारोबार पर पड़ता है। इसलिए बजट को समझने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों करों को जानना जरूरी है।
प्रत्यक्ष कर वे टैक्स होते हैं जो अपनी कमाई पर व्यक्ति या कंपनी सीधे सरकार को चुकाती है। इन करों का बोझ किसी और पर नहीं डाला जा सकता। भारत में प्रत्यक्ष कर की वसूली और नियमों को देखने का काम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) करता है। प्रत्यक्ष कर में आमतौर पर ज्यादा कमाने वालों से ज्यादा टैक्स लिया जाता है, ताकि समाज में बराबरी बनी रहे।
इनकम टैक्स वह कर है जो व्यक्ति या संस्था की कमाई पर लगाया जाता है, जैसे सैलरी, बिजनेस या प्रॉपर्टी से हुई आय। कॉरपोरेट टैक्स कंपनियों के मुनाफे पर लगता है। कैपिटल गेन टैक्स शेयर, जमीन या सोना बेचकर हुए मुनाफे पर लगाया जाता है। इसके अलावा शेयर बाजार में खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) लगता है। कुछ खास मामलों में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) और अल्टरनेट मिनिमम टैक्स (एएमटी) भी लागू होते हैं।
अप्रत्यक्ष कर वे कर होते हैं जो हमारी कमाई पर सीधे नहीं लगते, बल्कि सामान और सेवाओं की खरीद पर वसूले जाते हैं। जब हम कोई चीज खरीदते हैं, तो दुकानदार टैक्स लेकर सरकार को जमा करता है। इसलिए इन्हें अप्रत्यक्ष कर कहा जाता है। आज भारत में सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर जीएसटी है, जिसने पहले के कई टैक्स जैसे वैट और सर्विस टैक्स की जगह ले ली है।
जीएसटी लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लगता है। इसके अलावा विदेश से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगती है। कुछ खास चीजों जैसे पेट्रोल, डीजल, तंबाकू और कोयले पर सेस भी लगाया जाता है। ये सभी टैक्स अप्रत्यक्ष कर की श्रेणी में आते हैं।
केंद्र सरकार को होने वाली कुल टैक्स कमाई का बड़ा हिस्सा अप्रत्यक्ष करों से आता है। बजट में अगर जीएसटी, कस्टम ड्यूटी या सेस में बदलाव किया जाता है, तो इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ता है। मोबाइल, कपड़े, दवाइयां या खाने-पीने की चीजें सस्ती या महंगी हो सकती हैं। इससे महंगाई और बाजार का माहौल भी बदल जाता है।
अप्रत्यक्ष कर का असर तुरंत महसूस होता है। अगर मोबाइल के पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी जाए, तो मोबाइल सस्ते हो सकते हैं। वहीं, अगर सिगरेट या कोल्ड ड्रिंक पर सेस बढ़ा दिया जाए, तो उनकी कीमत बढ़ जाती है, क्योंकि ये टैक्स सामान की कीमत में जुड़े होते हैं, इसलिए हर ग्राहक को ये चुकाने पड़ते हैं।
जानकारों का कहना है कि अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर एक जैसा लगता है। ऐसे में गरीब लोगों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है। इसी वजह से हर बजट में यह बहस होती है कि जरूरी सामान पर टैक्स कम होना चाहिए या नहीं, लग्जरी चीजों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए या नहीं और देसी उद्योगों को बचाने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई जाए या घटाई जाए।
वहीं आगामी आम बजट 2026 में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से जुड़े फैसले सरकार की आमदनी, महंगाई, कारोबार और आम लोगों की जेब को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए बजट को सही तरीके से समझने के लिए इन करों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
--आईएएनएस
डीबीपी/वीसी
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