विरासत का स्वाद, इंजीनियरिंग दिमाग! कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ लिट्टी-चोखा को बनाया ब्रांड, महीने का 2 लाख इनकम
Chandan Kumar Aurangabad Success Story: बिहार के युवाओं के लिए रिवर्स माइग्रेशन की एक शानदार मिसाल पेश की है औरंगाबाद के चंदन कुमार ने. पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर चंदन दिल्ली में एक अच्छी नौकरी कर रहे थे, लेकिन आज वे अपने पुश्तैनी बिजनेस 'भोला जी लिट्टी चोखा' को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. 1990 में चंदन के पिता ने महज ₹2 प्रति प्लेट से इस दुकान की शुरुआत की थी. कोविड काल में पिता की तबीयत बिगड़ने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण चंदन ने कॉर्पोरेट करियर छोड़ घर लौटने का फैसला किया. पिछले 4 वर्षों से वे पूरी तरह इस व्यवसाय को संभाल रहे हैं. बिना लहसुन-प्याज और शुद्ध घी के स्वाद के कारण आज यहां रोजाना 500 से अधिक ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है. इस लिट्टी के दम पर चंदन आज महीने का ₹2 लाख से अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि 10 अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. चंदन का कहना है कि वे अब अपनी पुरानी सैलरी से कहीं अधिक पैसा अपने स्टाफ को वेतन के रूप में दे देते हैं.
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