Powerus Deal: ट्रंप के बेटों से जुड़ी अमेरिकी ड्रोन कंपनी की पाकिस्तान से डील, सेना के साथ साइन किया MoU
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सुधरते रक्षा व आर्थिक संबंधों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका की अग्रणी ड्रोन निर्माता कंपनी पावरस ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सौदे के तहत कंपनी को मानवरहित हवाई प्रणालियों के तहत शुरुआती ऑर्डर भी प्राप्त हुआ है। हालांकि, सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए ड्रोन की संख्या और सौदे की वित्तीय राशि का खुलासा नहीं किया गया है।
ट्रम्प के बेटों के फंड से जुड़ी कंपनी के साथ विलय
पावरस सैन्य और समुद्री ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में काम करती है और अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक इसका विलय 'ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स' नामक कंपनी के साथ पूरा होने की उम्मीद है। अमेरिकी नियामक फाइलों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों- डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और एरिक ट्रम्प- की इन्वेस्टमेंट फंड 'अमेरिकन वेंचर्स' के जरिए ऑरियस में हिस्सेदारी है। इस विलय के बाद नई संयुक्त कंपनी में 'अमेरिकन वेंचर्स' की 9.9% की लाभकारी हिस्सेदारी होगी।
GHQ रावलपिंडी में फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात
समझौते के सिलसिले में पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर्स में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर से मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा खरीद, उत्पादन, आधुनिक तकनीक के उपयोग और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। पावरस के सीईओ एंड्रयू फॉक्स के अनुसार, कंपनी पाकिस्तान में ही तकनीक के विकास और संयुक्त विनिर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।
हितों के टकराव के आरोपों पर ट्रम्प परिवार और कंपनी की सफाई
पावरस और ट्रम्प परिवार की ओर से किसी भी प्रकार के 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' से स्पष्ट इनकार किया गया है। पावरस के संस्थापक एंड्रयू फॉक्स ने कहा कि अनुबंध पूरी तरह से योग्यता के आधार पर मिला है और इसमें ट्रम्प परिवार का कोई व्यावसायिक हस्तक्षेप नहीं है। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा कि वह केवल एक निष्क्रिय निवेशक हैं और उनका पावरस के प्रबंधन, संचालन या विदेशों में अनुबंध प्राप्त करने की प्रक्रिया में कोई लेना-देना नहीं है।
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंध
यह रक्षा समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच वर्षों से जारी तनाव कम हो रहा है और द्विपक्षीय रिश्ते सुधर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा किए जाने के बाद से पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए आर्थिक, वित्तीय और रक्षा समझौतों को आगे बढ़ाने में जुटा है। पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी रक्षा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की एंट्री से उनकी सैन्य क्षमताओं को तकनीकी मजबूती मिलेगी।
EPFO ने 35 दिन की देरी की, अब देना होगा 6% ब्याज; 14 लाख से ज्यादा का था PF क्लेम
रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली PF की रकम में 35 दिन की देरी अब EPFO को भारी पड़ गई है। मुंबई उपनगर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को एक रिटायर्ड कर्मचारी के 14.06 लाख रुपये से ज्यादा के PF क्लेम पर 35 दिन की देरी के लिए 6% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है।
आयोग ने माना कि EPFO ने कर्मचारी के क्लेम का समय पर निपटारा नहीं किया। EPF Scheme, 1952 के तहत PF क्लेम का निपटारा 20 दिन के भीतर किया जाना चाहिए। आयोग ने तय समय में क्लेम नहीं निपटाने को सेवा में कमी माना है।
19 अक्टूबर को जमा किया था पूरा क्लेम
मामला Fleet Maritime Services (India) Pvt Ltd के पूर्व कर्मचारी से जुड़ा है। रिटायर्ड कर्मचारी ने आयोग में शिकायत करते हुए बताया कि उसने 19 अक्टूबर 2016 को PF की पूरी क्लेम अर्जी जमा की थी। इसके बावजूद EPFO ने तय समय में रकम जारी नहीं की।
EPFO ने अपना बचाव करते हुए कहा कि शुरुआती क्लेम के साथ जरूरी Joint Declaration जमा नहीं किया गया था। इसलिए क्लेम को 7 नवंबर 2016 को वापस कर दिया गया। संगठन के मुताबिक, पूरे दस्तावेज 2 दिसंबर 2016 को मिले और इसके बाद 14 दिसंबर को क्लेम का भुगतान कर दिया गया।
EPFO की दलील पर आयोग ने उठाए सवाल
आयोग ने EPFO की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि संगठन यह साबित नहीं कर सका कि 19 अक्टूबर को जमा किया गया क्लेम वास्तव में अधूरा था।
खास बात यह रही कि EPFO कोई ऐसा लिखित रिजेक्शन लेटर या कमी बताने वाला पत्र भी पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित होता कि कर्मचारी को समय पर बताया गया था कि उसके दस्तावेज अधूरे हैं।
आयोग ने कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर EPFO यह साबित करने में नाकाम रहा कि 19 अक्टूबर 2016 को क्लेम अधूरा था। ऐसे में संगठन को तय समय के भीतर क्लेम प्रोसेस और सेटल करना चाहिए था।
14,06,272 रुपये पर मिलेगा ब्याज
आयोग ने EPFO को 14,06,272 रुपये की PF राशि पर 35 दिन की देरी के लिए 6% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। ब्याज की गणना 9 नवंबर 2016 से 13 दिसंबर 2016 तक की देरी के लिए होगी।
आयोग ने यह भी कहा कि रिटायरमेंट के बाद PF जैसी जमा रकम मिलने में देरी से लाभार्थी को आर्थिक परेशानी हो सकती है। खासकर तब, जब व्यक्ति अपनी जमा पूंजी पर निर्भर हो। EPFO को आयोग के आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।
यह मामला सिर्फ PF की रकम देर से मिलने का नहीं था। असली सवाल यह था कि 20 दिन की समयसीमा कब से शुरू होगी और क्या EPFO यह साबित कर सकता है कि शुरुआती क्लेम अधूरा था। आयोग ने इस मामले में कर्मचारी के पक्ष में फैसला दिया।
(प्रियंका कुमारी)
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