31% चढ़ सकता है ये स्टॉक, ब्रोकरेज ने दी Buy रेटिंग
Great Eastern Shipping Company Share Price: ब्रोकरेज का कहना है कि GE शिपिंग एक साइक्लिकल कंपाउंडर है और इसके पास ग्रोथ के अगले चरण के लिए काफी कैश मौजूद है। जून 2026 तिमाही तक GE शिपिंग के पास 8,000 करोड़ रुपये का कैश था
Election Commission के SIR प्रोसेस पर उठे सवाल, Kapil Sibal और वकीलों ने CEC के इस्तीफे की मांग की
वरिष्ठ वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संस्था के सदस्यों के एक समूह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने, हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रतिभागियों ने ‘टुगेदर वी स्टैंड’ बैनर तले आयोजित प्रेस वार्ता में आगामी चुनाव एसआईआर-पूर्व मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाने और इस प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा किये गये फैसलों की संवैधानिक एवं कानूनी वैधता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि निर्वाचन आयोग का कामकाज ‘दागदार’ हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को देखा, उससे नागरिकों का आगे आना जरूरी हो गया है। सिब्बल ने कहा, ‘‘अगर निष्पक्ष चुनाव में बाधा आती है, तो क्या लोकतंत्र बचेगा?’’ उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाने और जोड़ने का मुद्दा कई बार उच्चतम न्यायालय के सामने उठाया गया है। सिब्बल ने कहा, ‘‘अब यह साबित हो चुका है कि वह गलत था।
तब से कई चुनाव हो चुके हैं।’’ उन्होंने एसआईआर से जुड़े सभी फैसलों को वापस लेने की मांग की क्योंकि ये फैसले निर्वाचन आयोग ने नहीं लिए थे बल्कि आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इन्हें जबरन लागू करवाया था और इसलिए इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं थी। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को यह बताया जाना चाहिए कि जिन मामलों को पहले निर्वाचन आयोग के आदेश माना गया था, वे असल में आयोग के फैसले नहीं थे बल्कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उन्हें एकतरफा तौर पर लिये थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या एसआईआर प्रक्रिया का मकसद मुसलमानों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना था, तो सिब्बल ने कहा कि तार्किक विसंगतियों का पैमाना इसी मकसद से बनाया गया था।
योगेंद्र यादव ने प्रेसवार्ता में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या से नाम हटाने के पैमाने पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान, देश में वयस्क आबादी 99 करोड़ थी और मतदाताओं की संख्या 98 करोड़ थी, जो लगभग बराबर थी। हमें गर्व था कि हमारे पास मतदाताओं की एक सटीक सूची थी।’’ यादव ने कहा, ‘‘एसआईआर के ज़रिए सुधार के बाद, अब मतदाताओं की संख्या 88 करोड़ या उससे कम है, जबकि वयस्क आबादी 103 करोड़ है।
इस तरह, कम से कम 15 करोड़ भारतीय मतदाता सूची से गायब हैं।’’ वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने निर्वाचन आयोग द्वारा तार्किक विसंगति शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे मामलों पर फैसला लेने के लिए कोई मानक या ढांचा है। भूषण ने यह भी कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया ‘जनप्रतिनिधित्व कानून’ और नियमों का उल्लंघन करके की जा रही है।
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