Delhi Pollution: 1 नवंबर से गैर-BS6 बाहरी वाहनों की एंट्री बैन, पार्किंग शुल्क होगा दोगुना
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए सोमवार को कई कड़े उपायों की घोषणा की, जिनमें नगर से बाहर पंजीकृत बीएस-छह श्रेणी से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर रोक, बिना पीयूसी के ईंधन नहीं नियम का सख्ती से पालन और निर्माण व तोड़फोड़ की गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल हैं। सिरसा ने कहा कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत बीएस-छह मानकों से नीचे वाली श्रेणी के वाहनों के शहर में प्रवेश पर एक नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से कोई अतिरिक्त पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बीएस (एक से छह) श्रेणी वाहनों के उत्सर्जन (धुएं) से जुड़े मानक हैं, जिनमें बीएस-छह गाड़ियां सबसे सख्त नियमों का पालन करती हैं। सिरसा ने कहा कि सरकार इस पाबंदी की जानकारी पहले ही सार्वजनिक करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएनजी गाड़ियों पर बीएस-चार वाली पाबंदियां लागू नहीं होंगी।
हालांकि, दिल्ली सरकार ने यह नहीं बताया कि यह रोक कब तक लागू रहेगी। निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए एक नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों को इस अतिरिक्त पार्किंग शुल्क से छूट मिलेगी। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के स्वामित्व और प्रबंधन वाली पार्किंग जगहें इस बढ़ोतरी के दायरे से बाहर रहेंगी।
एक नवंबर से 28 फरवरी की अवधि के दौरान दफ्तरों के खुलने और बंद होने के समय में बदलाव किया जाएगा। इस दौरान दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के दफ्तर सुबह साढ़े आठ बजे से शाम पांच बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10 बजे से शाम साढ़े छह बजे तक काम करेंगे। दिल्ली सरकार ने बताया कि सरकारी और निजी दफ्तर अपने यहां आने वाले कर्मचारियों की संख्या में 50 प्रतिशत की कटौती करेंगे, यानी आधा स्टाफ घर से ही काम करेगा।
इन उपायों की घोषणा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई कार्रवाई-आधारित योजना बैठक के बाद की गई। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश वर्मा और पर्यावरण मंत्री सिरसा शामिल हुए। सिरसा ने बताया कि पीयूसी नहीं तो ईंधन नहीं नियम को युद्ध स्तर पर लागू किया जाएगा।
अपने उपयोग की मियाद पूरी कर चुके (अयोग्य) वाहनों के खिलाफ कठोर अभियान चलाया जाएगा और इसके लिए दिल्ली के सभी 500 पेट्रोल पंपों को स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) कैमरों से लैस किया गया है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जबकि नवंबर में पीयूसी केंद्रों को अद्यतन व आधुनिक बनाया जाएगा। सिरसा ने कहा कि एएनपीआर कैमरों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए उनकी दोबारा जांच की जाएगी।
वहीं, तीन स्वचालित जांच केंद्रों के जरिए करीब 2.5 लाख वाहनों की ‘फिटनेस जांच’ होगी। सरकार परिवर्तन योजना के तहत बीएस-चार और उससे पुरानी बसों तथा मालवाहक गाड़ियों को सड़क से हटाने पर भी काम कर रही है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर विशेष अभियान के जरिए युद्ध स्तर पर नयी गाड़ियों का पंजीकरण कराया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि धूल उत्सर्जित करने वाले तोड़फोड़ कार्य और खुले में होने वाले निर्माण कार्यों पर एक नवंबर से 10 दिसंबर तक रोक रहेगी। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ (इमारतों के अंदर होने वाले काम भी शामिल) के कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा। सरकार ने अपने निगरानी तंत्र पर 723 निर्माण स्थलों को पंजीकृत किया है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्वचालित प्रणाली के जरिए प्रदूषण नियंत्रण पर नजर रखी जा रही है।
सिरसा ने बताया कि इनमें से दो से तीन प्रतिशत से भी कम साइटों पर नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। मकानों के नक्शे पास कराने के लिए एमसीडी के मलबा ऐप पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया जाएगा। वहीं, घरों में मरम्मत और निर्माण कार्य कराने वाले परिवारों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
पर्यावरण मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, दिल्लीवासियों को साफ हवा और स्वस्थ वातावरण देना हमारी जिम्मेदारी है, और यह जिम्मेदारी केवल किसी एक मौसम तक सीमित नहीं है। दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए साल के 365 दिन, 24 घंटे तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से लगातार काम कर रही है। मंत्री के अनुसार, दिल्ली में वर्तमान में 5,088 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए 150 और बसें बेड़े में शामिल की जाएंगी।
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि जिलाधिकारियों के साथ बैठकों के माध्यम से सर्वाधिक प्रदूषण वाले स्थानों (हॉटस्पॉट) के तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाली गतिविधियों - जैसे श्मशान घाट, कूड़ा फेंकने के स्थान और सीमेंट ढुलाई वाले स्थानों - की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले चिह्नित किए गए 62 ‘हॉटस्पॉट’ में से 42 को अब तक नियंत्रित कर लिया गया है। यातायात सिग्नल-मुक्त बनाने के लिए चिन्हित किए गए 15 मार्गों में से आठ का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी सात को सात अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार प्रदूषण और यातायात जाम वाले संवेदनशील इलाकों (हॉटस्पॉट) पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव सहित मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जन प्रतिनिधि इन इलाकों का दौरा करेंगे।
MBBS दाखिले में SC Reservation: Allahabad HC ने UP सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस काउंसलिंग में अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण से जुड़े उसके पिछले आदेश को किस तरह लागू किया गया। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अदालत के आदेश के अनुपालन की स्थिति और राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने यह आदेश ‘यूथ फॉर इक्वेलिटी फाउंडेशन’ की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने एससी आरक्षण से जुड़े अदालत के आदेश को सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में लागू नहीं किया, बल्कि इसे केवल चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों तक सीमित रखा। अदालत ने मामले को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ 29 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। यह विवाद चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों-अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर-में अनुसूचित जाति आरक्षण से जुड़ा है।
इससे पहले एक विशेष अपील में राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया था कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 की काउंसलिंग प्रक्रिया को प्रभावित न किया जाए। सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन चारों कॉलेजों में एससी आरक्षण को कानून के तहत निर्धारित 21 प्रतिशत सीमा के अनुसार लागू किया जाएगा। इस आश्वासन के आधार पर अदालत ने उस समय चल रही दाखिला प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया था।
इसके बाद एक अन्य रिट याचिका में 16 सितंबर को पारित आदेश के अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। सोमवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप दीक्षित ने कहा कि राज्य सरकार ने अदालत के आदेश को सभी कॉलेजों और सभी सीटों की पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया में लागू नहीं किया, बल्कि इसका दायरा केवल उन चार कॉलेजों तक सीमित रखा, जो रिट याचिका से जुड़े थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह अदालत के पूर्व आदेश और विशेष अपील में राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का अनुपालन नहीं है।
दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
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