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तनाव, अनिद्रा और थकान से राहत दिलाने में मदद करती है चिन्मय मुद्रा, सेहत में आएगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सेहत सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। गलत खानपान, मोबाइल और स्क्रीन पर ज्यादा समय, नींद की कमी और लगातार बना रहने वाला तनाव धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों को कमजोर कर देता है। कई बार लोग छोटी-छोटी समस्याओं जैसे चिड़चिड़ापन, थकान और नींद न आने की समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही आदत आगे चलकर बड़ी बीमारियों की वजह बन सकती है।

ऐसे में योग के कुछ आसान अभ्यास हैं, जो बिना साइड इफेक्ट के शरीर और मन को संतुलन में लाने में मदद करते हैं। इन्हीं सरल अभ्यासों में एक है चिन्मय मुद्रा।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह सांस, मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने की प्रक्रिया है। चिन्मय मुद्रा इसी तालमेल को मजबूत करने का काम करती है। संस्कृत शब्द चिन्मय का अर्थ होता है पूर्ण जागरूकता या चेतना से भरा हुआ। यानी यह मुद्रा व्यक्ति को अपने भीतर की स्थिति को समझने और महसूस करने में मदद करती है। इस मुद्रा में हाथों की उंगलियों की स्थिति और सांस पर दिया गया ध्यान, दोनों मिलकर शरीर के अंदर सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

आयुर्वेद मानता है कि हमारा शरीर पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। हाथों की पांच उंगलियां भी इन तत्वों का प्रतीक मानी जाती हैं। जब हम उंगलियों को एक खास तरीके से जोड़ते हैं, तो शरीर के भीतर इन तत्वों का संतुलन बेहतर होने लगता है। चिन्मय मुद्रा में अंगूठे और तर्जनी उंगली को आपस में जोड़ा जाता है, जबकि बाकी तीन उंगलियां हथेली की ओर मुड़ जाती हैं। यह स्थिति सांस की गति को गहरा और स्थिर बनाने में सहायक होती है।

चिन्मय मुद्रा का सबसे पहला असर मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है। लगातार तनाव और चिंता में रहने से दिमाग थक जाता है, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इस मुद्रा के अभ्यास के दौरान जब व्यक्ति सिर्फ अपनी सांस पर ध्यान देता है, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है और दिमाग को आराम मिलता है। यही कारण है कि यह मुद्रा तनाव और चिंता को कम करने में सहायक मानी जाती है।

नींद से जुड़ी समस्याओं में भी चिन्मय मुद्रा फायदेमंद साबित हो सकती है। जिन लोगों को रात में जल्दी नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूट जाती है, उनके लिए यह अभ्यास लाभदायक है। नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार देखा जा सकता है।

एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी यह मुद्रा खास मानी जाती है। चिन्मय मुद्रा में बैठकर सांस पर ध्यान केंद्रित करने से एकाग्रता की शक्ति मजबूत होती है। इससे पढ़ाई करने वाले बच्चों की समझने की क्षमता बेहतर होती है और कामकाजी लोगों को अपने काम पर फोकस बनाए रखने में मदद मिलती है।

शारीरिक स्वास्थ्य की बात करें तो चिन्मय मुद्रा पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाती है। तनाव और चिंता का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। जब मन शांत होता है, तो पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच, या भारीपन धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इसके अलावा, यह मुद्रा शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने में भी मदद करती है, जिससे व्यक्ति खुद को ज्यादा सक्रिय और हल्का महसूस करता है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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IND vs NZ: गौतम गंभीर ने कामाख्या मंदिर में किए दर्शन, तीसरे T20 से पहले टीम इंडिया के लिए की प्रार्थना

IND vs NZ: भारतीय क्रिकेट टीम आज यानी 25 जनवरी को गुवाहाटी के बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम में न्यूजीलैंड के साथ पांच मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा टी20 मैच खेलने वाली है. इस सीरीज में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में इंडियन क्रिकेट टीम पहले ही 2-0 बढ़त बना चुकी है. उसने पहले नागपुर और फिर रायपुर में न्यूजीलैंड को धूल चटाई. अब टीम इंडिया तीसरे टी20 में सीरीज जीतने के इरादे से उतरेगी. उससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

कामाख्या मंदिर पहुंचे गौतम गंभीर

इस वीडियो में गौतम गंभीर को भक्ति में लीन होते हुए देखा जा सकता है. दरअसल, गंभीर आज असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर पहुंचे, जहां जाकर उन्होंने पूजा-अर्चना की और टीम इंडिया के लिए तीसरे टी20 और टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अभियान के लिए प्रार्थना की. उनको मंदिर में एंट्री करते हुए वीडियो में देखा जा सकता है.

गौतम गंभीर अक्सर मंदिरों में जाकर भगवान की पूजा-अर्चना करते रहते हैं. अब वो कामाख्या मंदिर पहुंचे हैं. ये मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से 8 किलोमीटर दूर कामाख्या में स्थित है. ये मंदिर नीलाचल पव॑त पर स्थित है. ये मंदिर शक्ति की देवी सती को समर्पित है. इस मंदिर का महत् तांत्रिक महत्व भी है. 

गौतम गंभीर ने भारत की 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा थे. उन्होंने भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में दोनों बार बल्ले के साथ अहम योगदान दिया. गंभीर ने भारत के लिए 58 टेस्ट 147 वनडे और 37 टी20 मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने क्रमश: 4154, 5238, 932 रन बनाए हैं. उनके नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 20 शतक दर्ज हैं. 

ये भी पढ़ें : IND vs NZ 3rd T20: फ्री में कब और कहां देखें इंडिया-न्यूजीलैंड का तीसरा T20 मुकाबला, जानें पूरी डिटेल्स

 

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  Sports

SA20 फाइनल में प्रिटोरिया कैपिटल्स, सौरव गांगुली की कोचिंग पर कप्तान केशव महाराज का भरोसा

SA20 लीग का यह सीजन प्रिटोरिया कैपिटल्स और सौरव गांगुली, दोनों के लिए खास बनता जा रहा हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रिटोरिया कैपिटल्स ने क्वालिफायर-1 में सनराइजर्स ईस्टर्न केप को सात विकेट से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली हैं। इस जीत के साथ ही बतौर हेड कोच सौरव गांगुली की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर भी काफी हद तक विराम लग गया है।

बता दें कि SA20 के चौथे सीजन से पहले सौरव गांगुली को पहली बार किसी फ्रेंचाइज़ी का हेड कोच बनाया गया था। उनके साथ पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर शॉन पोलक भी सपोर्ट स्टाफ में जुड़े हैं। लीग चरण में प्रिटोरिया कैपिटल्स ने नौ मुकाबलों में पांच जीत और चार हार के साथ 24 अंक हासिल किए और अंकतालिका में दूसरा स्थान रहा।

फाइनल से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम के कप्तान केशव महाराज ने गांगुली की भूमिका पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि गांगुली जैसे अनुभवी क्रिकेटर का ड्रेसिंग रूम में होना खिलाड़ियों को आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता देता हैं। महाराज के अनुसार, भारतीय टीम के पूर्व कप्तान होने के नाते गांगुली बड़े मौकों का अनुभव साथ लाते हैं और उनकी मौजूदगी से टीम माहौल में एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिलती हैं।

गौरतलब है कि यह गांगुली का बतौर हेड कोच पहला अनुभव हैं और इसकी शुरुआत आसान नहीं रही। शुरुआती दो मुकाबलों में प्रिटोरिया को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद टीम ने शानदार वापसी की। रणनीति, खिलाड़ियों से संवाद और हर सदस्य को बराबर महत्व देने की गांगुली की शैली का असर मैदान पर साफ नजर आया।

क्वालिफायर-1 में सनराइजर्स के खिलाफ जीत को उनके रणनीतिक कौशल का उदाहरण माना जा रहा है। 171 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए प्रिटोरिया ने 18.3 ओवर में ही 172 रन बना लिए। इस दौरान डेवॉल्ड ब्रेविस ने 38 गेंदों में नाबाद 75 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें चार चौके और सात छक्के शामिल रहे। टीम मैनेजमेंट के फैसले और बल्लेबाजी क्रम में संतुलन ने जीत को आसान बना दिया।

अब प्रिटोरिया कैपिटल्स फाइनल में उतरने जा रही हैं और सौरव गांगुली के लिए यह मौका उनके कोचिंग करियर की पहली बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।
Sun, 25 Jan 2026 21:08:54 +0530

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