जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर केरल हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगी समीक्षा
कोच्चि, 28 सितंबर (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह इस बात की समीक्षा करे कि क्या पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल महंगी पेटेंटेड जीवन-रक्षक दवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब ऐसी दवाएं मरीजों की पहुंच से बाहर हों।
जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि इस प्रावधान को लागू करना आखिरकार एक नीतिगत मामला है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जहां दवाएं बहुत ज्यादा कीमतों पर बेची जा रही हों, वहां सरकार के दखल पर विचार किया जा सकता है।
धारा 100 केंद्र सरकार को पेटेंट धारक की सहमति के बिना सरकारी उद्देश्यों के लिए पेटेंट प्राप्त आविष्कार के उपयोग को अधिकृत करने का अधिकार देती है।
अदालत ने महंगे स्तन कैंसर की दवाओं से जुड़े इस मामले में केंद्र को इस प्रावधान को लागू करने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि सरकार से वहनीयता निर्धारित करने के लिए आंकड़े एकत्र करने और जहां आवश्यक हो, हस्तक्षेप पर विचार करने को कहा।
यह कार्यवाही नोवार्टिस द्वारा निर्मित पेटेंट प्राप्त स्तन कैंसर की दवा रिबोसिक्लिब और एक अन्य स्तन कैंसर की दवा पालबोसिक्लिब पर केंद्रित थी, जिसका पेटेंट समाप्त हो चुका है और जो कम कीमत पर उपलब्ध है।
कैंसर उपचार संस्थानों और भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल की विशेषज्ञ राय ने पुष्टि की कि दोनों दवाओं को एक दूसरे के स्थान पर उपयोग नहीं किया जा सकता है।
फिर भी, कोर्ट ने कहा कि किफायती होने का सही अंदाजा लगाने के लिए जरूरी डाटा के आधार पर जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर दखल देना जरूरी हो तो केंद्र सरकार न सिर्फ इस मामले में, बल्कि जान बचाने वाली दवाओं से जुड़े दूसरे मामलों में भी धारा 100 लागू करने पर विचार कर सकती है।
यह मामला 2022 में कैंसर के एक मरीज की याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें रिबोसिक्लिबदवा सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। उस समय इस दवा की कीमत लगभग 78,468.75 रुपए प्रति महीना थी। याचिकाकर्ता की सितंबर 2022 में मौत हो गई, लेकिन हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच जारी रखने का फैसला किया।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पश्चिम बंगाल: 2026 में डेंगू से होने वाली मौतें पिछले दो वर्षों की तुलना में कम रहेंगी
कोलकाता, 28 सितंबर (आईएएनएस)। राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक पश्चिम बंगाल में डेंगू से होने वाली मौतों की संख्या 2025 और 2024 में दर्ज आंकड़ों की तुलना में काफी कम रही है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगस्त के अंत तक डेंगू से संबंधित 10 मौतें दर्ज की गईं।
अधिकारी ने बताया कि मृत्यु समीक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से सात मामलों में डेंगू मृत्यु का कारण था। अन्य तीन मामलों में, हालांकि मरीज डेंगू से पीड़ित थे, लेकिन उनकी मृत्यु अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई।
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में डेंगू की स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है, लेकिन विभाग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रहा है। प्रशासन ने अक्टूबर और नवंबर को उच्च जोखिम अवधि घोषित किया है।
सोमवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों के साथ एक वर्चुअल बैठक की। उन्होंने आगामी महीनों में संक्रमण बढ़ने की संभावना को देखते हुए सभी एहतियाती उपायों को लागू रखने का निर्देश दिया।
अधिकारी ने कहा कि हालांकि स्थिति अब नियंत्रण में है, फिर भी संक्रमणों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसीलिए स्वास्थ्य, नगर निगम एवं शहरी विकास तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित सभी संबंधित विभागों को स्थिति पर नियमित रूप से नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि केवल रिपोर्टें एकत्र करना पर्याप्त नहीं होगा।
उन्होंने जिला प्रशासनों को स्थिति की प्रत्यक्ष निगरानी करने का निर्देश दिया, जिसमें सफाई अभियान, लार्वा विनाश कार्य और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है, ताकि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।
--आईएएनएस
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