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रिलायंस के शेयर में भूचाल! 52-वीक लो पर पहुंचा स्टॉक; जानिए खरीदें या करें इंतजार?

रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार को नए 52-वीक लो पर पहुंच गए और ₹1,200 के आस-पास कारोबार करते नजर आए। 2026 में अब तक शेयर पर करीब 24% का दबाव रहा है। आइए जानते हैं कि क्या अभी इसको खरीदना सही रहेगा या नहीं?

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Explainer: उज्जैन में आधी रात को बुलडोजर, मस्जिद के अंदर बैठ गए सैकड़ों लोग! शाही मस्जिद पर क्यों मचा है इतना बवाल...

Ujjain Shahi Masjid: महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. दरअसल, सड़क चौड़ी करने की एक योजना के तहत मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की तैयारी है, जिसके विरोध में लोग मस्जिद परिसर में जमा हो गए हैं. सोमवार को पुलिस और लोगों के बीच झड़प भी हुई, जिसने तनाव और बढ़ा दिया. लेकिन फिलहाल हालत प्रशासन के काबू में हैं. पुलिस ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

Ujjain Shahi Masjid का विवाद शुरू कहां से हुआ?

जानकारी के अनुसार उज्जैन नगर निगम एक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करना चाहता है. ये सड़क शहर के विकास मास्टर प्लान 2035 का हिस्सा है. बता दें इस योजना के तहत करीब 730 मीटर लंबे मार्ग पर कुल 272 निर्माण चिह्नित किए गए हैं. इन्हीं में शाही मस्जिद का वह हिस्सा भी है जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आता है.

Ujjain Shahi Masjid सड़क चौड़ी करने की इतनी जल्दी क्यों है?

प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कवायद 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों से जुड़ी है. नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव के मुताबिक करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, इसलिए सड़कों का चौड़ा होना जरूरी हो गया है. कंठल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच के इस मार्ग को खासतौर पर अहम माना जा रहा है.

क्या Ujjain Shahi Masjid गिराई जा रही है?

नहीं. अदालती रिकॉर्ड के हिसाब से पूरी मस्जिद को गिराने का कोई आदेश नहीं है. कार्रवाई सिर्फ उस हिस्से पर प्रस्तावित है जो सड़क चौड़ीकरण की बीच में आ रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ये हिस्सा करीब 10 फीट है. हालांकि मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि इस कार्रवाई से नमाज के हॉल का हिस्सा करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजार चौक शाही प्रभावित हो सकते हैं.

हाईकोर्ट ने Ujjain Shahi Masjid पर क्या फैसला दिया?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम के नोटिसों को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दीं और कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. मस्जिद प्रबंधन ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है. दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की खंडपीठ में उनकी अपील पर सुनवाई होनी है.

Ujjain Shahi Masjid मामले में सोमवार को क्या हुआ?

सोमवार सुबह प्रस्तावित हिस्से को हटाने के दौरान पुलिस और कुछ लोगों के बीच झड़प हुई है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान भीड़ ने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसके जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद से मस्जिद परिसर के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है.

'600 साल पुरानी' मस्जिद का दावा कितना पक्का है?

यह सवाल विवाद का एक अहम हिस्सा बन गया है. दरअसल, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का दावा है कि मस्जिद 1390 में बनी थी. समुदाय के लोगों के मुताबिक मस्जिद करीब 636 साल पुरानी है. लेकिन कुछ रिपोर्टों ने इसे सिर्फ सौ साल से कुछ ज्यादा पुरानी भी बताया है. कई धरोहर सूचियों में इसके निर्माण का साल अज्ञात लिखा है और कुछ विशेषज्ञों ने पुरातात्विक सबूतों की कमी का हवाला देकर उम्र के दावे पर सवाल उठाए हैं.

मस्जिद की लोकेशन इतनी संवेदनशील क्यों है?

शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के काफी करीब है. ये मंदिर के सामने वाले इलाके में स्थित है. यह उज्जैन का बेहद भीड़भाड़ वाला और धार्मिक रूप से अहम क्षेत्र है जहां आने वाले वर्षों में सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन के दौरान भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है.

विरोध करने वालों की मुख्य आपत्तियां क्या हैं?

मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले भी सड़क चौड़ी करने के कई अभियानों में धार्मिक स्थलों को छुआ नहीं गया था. उनका यह भी आरोप है कि इससे पहले उज्जैन की तकिया मस्जिद के मामले में भी प्रशासन ने आश्वासन देने के बाद अचानक कार्रवाई कर दी थी. मस्जिद प्रबंधन के सदस्यों की यह भी आशंका है कि शहर को सिंहस्थ के लिए नया रूप देने की कोशिशों में पुरानी मस्जिदें खतरे में पड़ सकती हैं.

राजनीतिक दलों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

कांग्रेस सांसद और पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रशासन के रवैये को संवेदनहीन बताया है. उनका कहना है कि विकास के नाम पर एक सदियों पुरानी धरोहर को हटाना उचित नहीं है और सरकार को सड़क के दूसरी तरफ की जमीन लेने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रशासन बार-बार मस्जिद की घेराबंदी करके क्या संदेश देना चाहता है.

प्रशासन ने अपने बचाव में क्या कहा?

प्रशासन और उसके समर्थकों का तर्क है कि कार्रवाई सिर्फ सड़क चौड़ीकरण के लिए चिह्नित हिस्से तक सीमित है और इसे सुरक्षा और आवागमन की जरूरत के लिहाज से देखा जाना चाहिए. साथ ही अदालत ने भी फिलहाल इस पर रोक लगाने से मना किया है जिसे प्रशासन अपनी कार्रवाई के पक्ष में बड़ा आधार बता रहा है.

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