Ujjain में Simhastha 2028 road widening के दौरान विवाद, पुलिस पर पथराव
मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के मद्देनजर चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत एक मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान सोमवार को विवाद हो गया। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया।
उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है। साथ ही सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि सिंहस्थ-2028 को लेकर सभी पक्षों की सहमति से काम किया जा रहा है और इसी क्रम में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि शहर की मंदिर-मस्जिद समिति के सदस्यों की ओर से यह काम किया जा रहा है और प्रक्रिया जारी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद के करीब नौ फुट लंबे और चार फुट चौड़े हिस्से को हटाया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इसे हटाने को लेकर रविवार देर रात मंदिर-मस्जिद समिति और प्रशासन के बीच सहमति बन गई थी।
शर्मा ने कहा कि एहतियात के तौर पर इलाके में सुबह से ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शन करने का प्रयास किया और इस दौरान पथराव किया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इलाके में सीसीटीवी लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, इनके जरिए पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाद में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए शर्मा ने कहा, कुछ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो शहर के बाहर से आकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे थे।
15 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भड़काऊ बयान साझा किए और लोगों को उकसाया। शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट करने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है और पुलिस की ओर से शहर में फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
इस बीच, शहर काजी खलीलुर्रहमान ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि शाही मस्जिद कमेटी खुद अपने हाथों से मस्जिद का हिस्सा हटा रही है, लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया पर फिजूल का माहौल बना रहे हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, शहर अपना है, इसकी हिफाजत भी हमें ही करनी है। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन भी किया।
इंदौर उच्च न्यायालय ने नौ सितंबर को शाही मस्जिद के प्रस्तावित योजना क्षेत्र में आने वाले हिस्से को हटाने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इस मामले में मस्जिद अधिकारियों की अपील पर सोमवार को सुनवाई होनी है। सिंहस्थ से पहले शहर के कंथल चौराहे से गोपाल मंदिर तक की सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है।
परियोजना के तहत करीब 900 मीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना है और इसके दायरे में आने वाली संरचनाओं को हटाया या संशोधित किया जाना है। इसके तहत धार्मिक स्थलों सहित 272 संरचनाएं प्रभावित होंगी। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए करीब 9.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को सड़क चौड़ीकरण कार्य की शुरुआत अपने पुश्तैनी घर के एक हिस्से को हटाने से की थी। उन्होंने खुद फावड़ा चलाकर इसकी शुरुआत की थी।
TMC विधायकों की अयोग्यता याचिका पर समय सीमा में फैसला लें Speaker, Supreme Court का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उम्मीद जताई कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आरोपों को लेकर रिताब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय में फैसला करेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय (ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट) की ओर से दायर एक रिट याचिका का निपटारा किया, जिसमें अयोग्यता याचिकाओं के जल्द निपटारे की मांग की गई थी। बेंच ने 'केशम मेघचंद्र सिंह बनाम स्पीकर, मणिपुर विधानसभा' मामले में अपने फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर आम तौर पर उचित समय के भीतर फैसला किया जाना चाहिए, जिसे लगभग तीन महीने माना गया है।
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इस मामले में अयोग्यता की याचिकाएँ 8 जुलाई को दायर की गई थीं। बेंच ने ध्यान दिलाया कि तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी और उम्मीद जताई कि स्पीकर उस समय के भीतर सही फ़ैसला लेंगे। बेंच ने अपने आदेश में कहा हमें पूरा भरोसा है कि राज्य विधानसभा के स्पीकर इस कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों को अच्छी तरह समझते हैं और (उस समय-सीमा के भीतर) सही फ़ैसला लेने की पूरी कोशिश करेंगे।" चट्टोपाध्याय की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फ़ैसला करने में देरी का एक पैटर्न रहा है, जिसमें बाद में अलग हुए गुट खुद को असली राजनीतिक पार्टी बताते हैं। इन याचिकाओं में अरूप रॉय, रिताब्रता बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, सेउली साहा, अखरुज्जमां, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। एक अन्य मामले में, 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) लोकसभा सांसदों के ख़िलाफ़ अयोग्यता याचिकाओं पर फ़ैसला करने में तीन महीने की देरी को रेड फ़्लैग (गंभीर चिंता का विषय) बताया, हालांकि स्पीकर ओम बिरला के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं तय की।
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हर मामले की अपनी अलग स्थिति होती है। कुछ महीने बीत जाना एक चेतावनी का संकेत हो सकता है और इस बात को समझा जा सकता है। मिस्टर चंद्रा की याचिका में इस बात पर चिंता जताई गई है कि तीन महीने बीत चुके हैं। जस्टिस बागची ने कहा, आपने इसे पूरा क्यों नहीं किया, जबकि यह कुछ ही पल का काम है और इसके कई अन्य मामलों और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ते हैं?
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