Jalna Sand Mining: Manoj Jarange के सहयोगी Sanjay Katare पर 4.90 करोड़ का जुर्माना बहाल
महाराष्ट्र के जालना जिले में कथित अवैध रेत खनन के एक मामले में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के एक सहयोगी को 4.90 करोड़ रुपये के जुर्माने से छूट देने वाला आदेश रद्द कर दिया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि संजय नानासाहेब कटारे को जुर्माने की कार्यवाही से छूट देने के संशोधित आदेश की प्रशासनिक समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला जालना की अंबड तहसील के साष्टपिंपलगांव और डोमलगांव में गोदावरी नदी के तल से करीब 2,000 ‘ब्रास’ (आयतन की स्थानीय माप इकाई) रेत के कथित अवैध खनन और परिवहन से संबंधित है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2023 में तत्कालीन उपमंडलीय अधिकारी ने 18 लोगों पर जुर्माना लगाया था। इनमें शामिल जरांगे के आंदोलन की कोर कमेटी के सदस्य कटारे पर 4.90 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
कटारे ने बाद में इस कार्यवाही में अपना नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई जिसके बाद तत्कालीन तहसीलदार ने संशोधित आदेश जारी कर उनका नाम जुर्माने की कार्यवाही से हटा दिया था। बाद में एक स्थानीय निवासी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य के राजस्व मंत्री से संपर्क किया। जालना जिला प्रशासन के निर्देश पर मामले की जांच की गई जिसमें तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित गौण खनिज शाखा के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे।
अधिकारियों ने बताया कि अंबड के उपमंडलीय अधिकारी उमाकांत पारधी ने 21 सितंबर को पिछला आदेश रद्द कर दिया और उन्होंने बहाल किए गए जुर्माने को संबंधित भूमि पर बकाया के रूप में दर्ज कर भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूलने का निर्देश दिया। उन्होंने तत्कालीन तहसीलदार और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव जालना के जिलाधिकारी को भेजने का भी निर्देश दिया। जरांगे ने 20 दिन का अपना अनशन 17 सितंबर को समाप्त कर दिया था और महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि मराठा आरक्षण से जुड़ी उनकी मांगों पर तीन महीने के भीतर विचार नहीं किया गया तो वह अपना आंदोलन मुंबई ले जाएंगे।
वह कुनबी जाति की वंशावली के आधार पर मराठा समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं।
देश के 7 शहरों में Housing Sales 3% बढ़कर 1 लाख पार, ANAROCK ने जारी किए आंकड़े
देश के सात प्रमुख शहरों में जुलाई-सितंबर के दौरान मकानों की बिक्री सालाना आधार पर तीन प्रतिशत बढ़कर एक लाख इकाई से अधिक हो गई। मुंबई महानगर क्षेत्र, बेंगलुरु और हैदराबाद में मजबूत मांग इसकी मुख्य वजह रही। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी अनारॉक ने यह जानकारी दी। अनारॉक के अनुसार, मूल्य के लिहाज से जुलाई-सितंबर के दौरान कुल बिक्री दो प्रतिशत बढ़कर 1.55 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.52 लाख करोड़ रुपये थी। गौरतलब है कि रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स कंपनी ‘प्रॉपइक्विटी’ ने पिछले सप्ताह कहा था कि जुलाई-सितंबर तिमाही में कुल बिक्री छह प्रतिशत घटकर 1.03 लाख इकाई रह गई।
रियल एस्टेट सलाहकार अनारॉक ने सोमवार को जुलाई-सितंबर तिमाही के प्राथमिक आवासीय बाजार के आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के अनुसार, सात प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की औसत कीमत में सामूहिक रूप से सालाना सात प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस साल जुलाई-सितंबर के दौरान आवासीय संपत्तियों की बिक्री 1,00,220 इकाई रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 97,080 इकाई थी। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), बेंगलुरु और हैदराबाद में बिक्री बढ़ी जबकि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), पुणे, चेन्नई और कोलकाता में बिक्री में गिरावट आई।
रियल एस्टेट सलाहकार अनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि वर्ष 2026 की तीसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में शीर्ष सात शहरों में कुल बिक्री में एमएमआर और बेंगलुरु की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत रही। इन सात शहरों में वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 1,14,320 आवासीय इकाइयां पेश की गईं, जबकि 2025 की तीसरी तिमाही में 96,690 इकाइयां पेश की गई थीं।
इस तरह इसमें सालाना 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अनारॉक के पुरी ने कहा, ‘‘ आगामी त्योहारों के मद्देनजर आवासीय मांग बढ़ने की उम्मीद है। इससे जुलाई-सितंबर तिमाही में देखी गई तेजी को और गति मिलेगी।
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