30 में से 30 सेंसेक्स स्टॉक्स लाल निशान में, बाजार से ₹6 लाख करोड़ स्वाहा, जानें मार्केट में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन सोमवार 28 सितंबर की सुबह खराब रहा. कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण, दोनों बेंचमार्क इंडेक्स 1% से ज्यादा गिर गए. जहां सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूटा, वहीं NIFTY50 भी 22,850 के स्तर से नीचे आ गया.
बाजार की मौजूदा स्थिति
दोपहर करीब 13:14 बजे, NIFTY50 316 अंक या 1.37% की गिरावट के साथ 22,824.35 पर कारोबार कर रहा था. वहीं, BSE Sensex 1,008 अंक (1.36%) गिरकर 72,887.40 पर आ गया. इस बिकवाली से BSE-लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन से लगभग ₹6 लाख करोड़ कम हो गए, जिससे यह आंकड़ा घटकर करीब ₹476 लाख करोड़ रह गया. आज सेंसेक्स में शामिल सभी 30 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे. सबसे ज्यादा गिरावट बजाज फाइनेंसस, कोटक महिंद्रा बैंक और HDFC बैंक में देखी गई. यह कमजोरी केवल लार्ज कैप शेयरों तक ही सीमित नहीं थी. निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 1% से ज्यादा गिरे.
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एशियाई बाजारों में भी कमजोरी दिखी
भारतीय बाजार पर कई एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी असर पड़ा, जहां तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण शेयरों पर दबाव बना रहा. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 1.7% से ज्यादा टूटा. हालांकि, जापान का निक्केई मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा.
आज बाजार क्यों गिरा?
ईरान-अमेरिका तनाव ने बिगाड़ा माहौल
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तब बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसमें 7 दिन की युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की बात कही गई थी. शनिवार 26 सिंतबर को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "मैं इस डील को नहीं मानता. वे चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तुरंत खोल दिया जाए क्योंकि वे बुरी तरह नाकाम हो रहे हैं." वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि उनका देश अपनी बात पर अडिग रहेगा और अमेरिका या इजराइल के सामने नहीं झुकेगा.
क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर उछाल
मिडिल ईस्ट में हाल की घटनाओं के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से तेजी आई है. शिपमेंट में और रुकावट की आशंकाओं के चलते तेल की कीमतें 2% बढ़कर $107 प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं हैं. जेपी मॉर्गन ने कहा है कि वह अब तेल की कीमतों की चाल का साफ अनुमान नहीं लगा सकता. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब ब्रोकरेज के पास बाजार के लिए कोई पक्का आधार नहीं है.
US बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर
US बॉन्ड यील्ड कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे शेयर बाजार पर और दबाव बढ़ गया. बेंचमार्क US 10-ईयर ट्रेजरी नोट की यील्ड 5.2% के ऊपर चली गई, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. 30-ईयर बॉन्ड यील्ड भी 5.5% के पार निकल गई, जबकि 2-ईयर ट्रेजरी नोट्स की यील्ड 4.9% के ऊपर पहुंच गई, जो आमतौर पर फेड रेट हाइक की उम्मीदों के साथ चलती है.बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डेट मार्केट निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे इक्विटी जैसे रिस्क भरे एसेट्स पर दबाव बढ़ता है.
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रुपया कमजोर हुआ
शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 14 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95.89 पर आ गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों को अब डर है कि रुपया 96 के अहम साइकोलॉजिकल लेवल को तोड़ सकता है. तेल की ऊंची कीमतों, US ट्रेजरी यील्ड में उछाल और मजबूत डॉलर के कारण मुद्रा पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ डॉलर की मजबूती ने भी रुपये की रिकवरी को सीमित कर दिया है. LKP सिक्योरिटीज के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, ग्लोबल कमोडिटी और डॉलर में उतार-चढ़ाव के बीच रुपये के एक दायरे में खासकर 95.50 और 96.50 के बीच कारोबार करने की संभावना है.
FII की लगातार बिकवाली
NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार 25 सितंबर को भी भारतीय शेयरों की बिकवाली जारी रखी और कुल ₹3,694 करोड़ के शेयर बेचे. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने बताया कि जुलाई और अगस्त में पॉजिटिव इनफ्लो के बाद FPI फ्लो का नेगेटिव दायरे में जाना इस महीने की शुरुआत में ही साफ हो गया था. बिकवाली का यह ट्रेंड जारी है और इस महीने अब तक एक्सचेंजों के जरिए कुल इक्विटी आउटफ्लो ₹25,682 करोड़ तक पहुंच गया है.
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Desclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए सख्त कदम, कंस्ट्रक्शन बंद करने से लेकर पार्किंग चार्ज में इजाफा
Delhi News: राजधानी दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा की गुणवत्ता बिगड़ने का डर सताने लगा है. आसमान में धुंध की चादर और सांसों पर मंडराते खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार पूरी तरह चौकन्नी हो गई है. हवा को जहरीला होने से बचाने के लिए प्रशासन ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है और कई कड़े फैसले लागू कर दिए हैं.
इस बार सरकार ने धूल फैलाने वाली गतिविधियों से लेकर सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों और दफ्तरों के कामकाज तक पर बड़े नियम तय किए हैं. इन नए फैसलों का सीधा असर दिल्ली की जनता, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ने वाला है. सरकार की मंशा साफ है कि किसी भी तरह हवा में घुलने वाले जहर को रोका जाए ताकि लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना न करना पड़े.
निर्माण और तोड़फोड़ पर कड़ा पहरा
सर्दियों के महीनों में दिल्ली की हवा में धूल का बहुत बड़ा हिस्सा होता है. इसे रोकने के लिए सरकार ने निर्माण कार्यों पर कड़े नियम तय किए हैं. आदेश के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से लेकर 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली सभी तरह की तोड़फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी. इतना ही नहीं, जब सर्दियों का असर सबसे ज्यादा रहता है यानी 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच, तब निर्माण और तोड़फोड़ के सारे काम पूरी तरह बंद रखे जाएंगे. इस दौरान किसी भी इमारत को गिराने या नया ढांचा खड़ा करने की अनुमति नहीं होगी. प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा ताकि हवा में उड़ने वाली धूल पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके.
निजी गाड़ियां रोकने के लिए पार्किंग फीस दोगुनी
सड़क पर गाड़ियों की भीड़ कम करने और लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने के लिए भी सरकार ने बड़ा दांव चला है. शहर की सभी अधिकृत पार्किंग जगहों पर मौजूदा पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का फैसला किया गया है. यह नियम 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगा. सरकार का मानना है कि पार्किंग महंगी होने से लोग अपनी निजी कार या बाइक निकालने से बचेंगे और बस या मेट्रो का सहारा लेंगे. हालांकि इसमें एक बड़ी राहत भी दी गई है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यानी डीएमआरसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली और उसके जरिए संचालित पार्किंग साइट्स पर यह नियम लागू नहीं होगा. यानी मेट्रो पार्किंग का चार्ज पहले की तरह ही सामान्य रहेगा ताकि लोग मेट्रो की सवारी को प्राथमिकता दें.
दफ्तरों के समय में बड़ा बदलाव
सड़कों पर एक ही समय में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए दफ्तरों के समय को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है. 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी के दफ्तर सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सरकार यानी जीएनसीटीडी के तहत आने वाले सभी सरकारी दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुलेंगे. समय में यह डेढ़ घंटे का अंतर इसलिए रखा गया है ताकि सड़कों पर एक साथ सारे कर्मचारी न निकलें. पीक ऑवर्स में ट्रैफिक का दबाव कम होने से सड़कों पर गाड़ियां रेंगने से बचेंगी और ईंधन का धुआं भी हवा में कम घुलेगा.
50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम का आदेश
सड़क पर भीड़ और प्रदूषण को आधा करने की दिशा में सरकार ने वर्क फ्रॉम होम का बड़ा फैसला लिया है. शहर के सभी सरकारी और निजी दफ्तरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां कुल स्टाफ में से पचास फीसदी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें. इसका मतलब यह हुआ कि केवल आधा स्टाफ ही दफ्तर आएगा और बाकी आधा स्टाफ अपने घर से बैठकर काम संभालेगा. यह व्यवस्था भी पूरे चार महीने यानी 1 नवंबर से 28 फरवरी तक जारी रहेगी. प्राइवेट कंपनियों को भी इस नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है ताकि सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या सीधे तौर पर आधी की जा सके.
सख्त निगरानी और अमल की तैयारी
इन सभी नियमों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने के लिए विशेष निगरानी टीमें तैयार की जा रही हैं. शहर के अलग-अलग इलाकों में औचक निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि निर्माण कार्य सच में बंद हैं या नहीं. इसके साथ ही दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति और पार्किंग स्थलों पर तय नियमों की जांच के लिए भी तंत्र सक्रिय रहेगा. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि प्रदूषण से लड़ाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार का मकसद सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक को खतरनाक स्तर तक पहुंचने से रोकना और आम नागरिकों की सेहत की रक्षा करना है.
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