₹2000 से ज्यादा के UPI Payments पर जारी रहेगा MDR, Supreme Court ने रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) और UPI स्टीयरिंग कमिटी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन गज़ट नोटिफ़िकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी किया गया है, जिनमें 2,000 रुपये से ज़्यादा के कमर्शियल UPI 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज लगाने की घोषणा की गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने कहा यह कानूनी मामला कम और तकनीकी मामला ज़्यादा है। केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने बेंच को बताया कि गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96 प्रतिशत लोग इससे छूट के दायरे में आते हैं।
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वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) में केंद्र के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित MDR फ्रेमवर्क को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह लेवी (शुल्क) बिना किसी उचित कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के लागू की गई थी। याचिका में कहा गया है यह घोषित किया जाए कि किसी अधिकृत, प्रमाणित और प्रकाशित कानूनी दस्तावेज के बिना, केवल प्रेस रिलीज या FAQ के आधार पर कोई MDR या इसी तरह का अनिवार्य शुल्क नहीं लगाया या वसूला जा सकता है। याचिकाकर्ता ने UPI ट्रांज़ैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि नोटिफिकेशन में RuPay डेबिट कार्ड के लिए बिना किसी मौद्रिक सीमा (monetary ceiling) के 'नो-चार्ज' सुरक्षा जारी रखी गई है।
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0.4 प्रतिशत फ़ीस
लगभग छह साल तक पूरी तरह से मुफ़्त UPI पेमेंट की सुविधा के बाद, सरकार ने 15 अक्टूबर से UPI प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए मर्चेंट (व्यापारियों) को 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांसफ़र पर 0.4 प्रतिशत फ़ीस लागू की है। साथ ही, आम लोगों के बीच होने वाले लेन-देन (person-to-person) और छोटे पेमेंट को किसी भी चार्ज से अलग रखा गया है।
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MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये
75,000 रुपये और उससे ज़्यादा के पेमेंट के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। ज़रूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर - जैसे रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ़्यूल और खेती से जुड़े सामान - के लिए 2,000 रुपये से ज़्यादा के हर ट्रांज़ैक्शन पर 5 रुपये का फ़्लैट MDR लगेगा। म्यूचुअल फ़ंड, सिक्योरिटीज़ और स्टॉकब्रोकर व डीलर के ज़रिए किए जाने वाले पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा भी 300 रुपये होगी। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले ट्रांसफ़र - जो UPI के कुल ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम का 37 प्रतिशत और ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 70 प्रतिशत हिस्सा हैं - पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
Jammu Kashmir Assembly में राज्य के दर्जे पर भारी हंगामा, चार MLA सदन से निष्कासित
जम्मू कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए पेश किए गए प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों के हंगामे के बाद चार विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन की कार्यवाही जारी रखी, जबकि भाजपा विधायकों ने सदन के बीचोंबीच समानांतर कार्यवाही चलानी शुरू कर दी। उन्हें चेतावनी दी गई थी कि सदन की कार्यवाही बाधित करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हंगामे के बीच विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने नारा लगाया, ‘‘धोखेबाज मुख्यमंत्री, कुर्सी छोड़ो, कुर्सी छोड़ो।’’ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के सदस्यों ने इस पर प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायकों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस ने भी केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ ‘‘वोट चोर, गद्दी छोड़’’ समेत कई नारे लगाए। कांग्रेस विधायक इरफान लोन ने ‘‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’’ लिखा बैनर पकड़ा हुआ था।
हंगामा जारी रहने के बीच उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि अध्यक्ष को मुख्यमंत्री के खिलाफ ‘‘असंसदीय भाषा’’ का इस्तेमाल करने के लिए विपक्ष के नेता को माफी मांगने का निर्देश देना चाहिए। इसके बाद भी भाजपा विधायकों ने अपना विरोध जारी रखा और माइक्रोफोन के स्टैंड से कांग्रेस विधायकों पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, विधानसभा के मार्शलों ने उन्हें काबू में कर लिया।
भाजपा विधायक विक्रम रंधावा और अरविंद गुप्ता के साथ कांग्रेस विधायक इरफान लोन और इफ्तिखार अहमद को सदन से बाहर कर दिया गया। नेकां के सदस्यों ने भाजपा के आचरण के खिलाफ विरोध जताया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनता ने सदस्यों को सदन में नारेबाजी करने के लिए नहीं चुना है।
उन्होंने भाजपा सदस्यों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
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