सिंहस्थ की तैयारियों में बिजली लाइन शिफ्टिंग पर सवाल, उमंग सिंघार ने लगाया पुराने पोल और तार के इस्तेमाल का आरोप
सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन में बिजली लाइनों की शिफ्टिंग को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि लाइन शिफ्टिंग के काम में नए सामान की जगह पुराने पोल, तार और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया लेकिन भुगतान नए सामान के हिसाब से किया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सिंहस्थ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महापर्व है। इसके आयोजन की तैयारियों पर सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 250 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, लेकिन इसी काम में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
उमंग सिंघार ने लगाए आरोप
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि 75 बिजली लाइनों की शिफ्टिंग में नए पोल लगाने के बजाय पुराने पोल पर सिल्वर पेंट कर उन्हें नया दिखाया गया। उन्होंने पुराने केबल, तार और कंडक्टर दोबारा लगाए जाने की बात भी कही है। उनका कहना है कि एक स्थान पर लगभग नौ साल पुरानी डीपी को भी दोबारा लगाए जाने की बात सामने आई है।कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके बावजूद संबंधित फर्मों को 4.51 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि अगर पुराने सामान का इस्तेमाल किया गया तो उसके लिए नए सामान की कीमत के बराबर भुगतान क्यों किया गया।
सरकार से जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले में जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ आस्था का पर्व है और इसकी तैयारियों में जनता के पैसे का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि बिजली लाइन शिफ्टिंग में सामने आई कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार कौन है।
सिंहस्थ के लिए बिजली व्यवस्था पर बड़ा खर्च
बता दें कि सिंहस्थ को देखते हुए उज्जैन की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार नए बिजली उपकेंद्र बनाने, मौजूदा उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाने और 33 केवी और 11 केवी लाइनों के विस्तार जैसे काम प्रस्तावित हैं। फिलहाल मामला इस बात पर केंद्रित है कि सिंहस्थ की बिजली व्यवस्था के लिए मंजूर राशि से किए जा रहे कामों में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और उसके भुगतान का मिलान किस तरह किया गया और कांग्रेस इसे लेकर सवाल कर रही है।
सिंहस्थ 2028 करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का पर्व है, लेकिन भाजपा सरकार आस्था के इस महापर्व को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने में जुटी है।
उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के लिए ₹5,000 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए ₹250 करोड़ मंजूर हुए, लेकिन जांच में गंभीर…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 28, 2026
जबलपुर: थाना परिसर में मिला साढ़े 6 फीट का कोबरा, रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
जबलपुर के मदन महल थाना परिसर से सर्पमित्र ने साढ़े 6 फीट लंबा कोबरा पकड़ा है। दरअसल, थाना परिसर में स्थित मंदिर के पीछे यह कोबरा बैठा हुआ था। इसे देखने के बाद पुलिसकर्मी और मौजूद लोग अलर्ट हुए और सर्प विशेषज्ञ को मौके पर बुलाया गया।
थाना परिसर में कोबरा दिखने की की सूचना बनने के बाद सर पर विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे मौके पर पहुंचे और सांप का रेस्क्यू किया। रेस्क्यू करने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है।
मंदिर में बैठा था
थाना परिसर में स्थित मंदिर में बैठे इस कोबरा को आरक्षक मुन्ना चौधरी ने देखा। इसके बाद तुरंत ही सर्प विशेषज्ञ को सूचना देकर बुलाया गया। सर्व मित्र ने बिना किसी नुकसान के सांप को पकड़ लिया। ये भी सामने आया कि गर्मी ज्यादा होने की वजह से ठंडक की तलाश में सांप थाना परिसर में आ गया होगा। उसने किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।
बरगी के जंगल में छोड़ा
इस मामले में जानकारी देते हुए थाना एसआई सतीश सरांगी ने बताया कि सांप काफी बड़ा था। सर्प विशेषज्ञ द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक ये इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा है। यह जहरीला सांप है, जिसके काटने पर जहर नर्वस सिस्टम में फैलता है। इसे रेस्क्यू कर बरगी के जंगल में छोड़ दिया गया है।
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