Responsive Scrollable Menu

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में इन 5 जीवों का दिखना माना जाता है खास, जानें क्या है धार्मिक मान्यता

Pitru Paksha 2026: सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। पितृ पक्ष से जुड़ी कई ऐसी लोकमान्यताएं भी हैं, जिनमें घर के आसपास दिखाई देने वाले पशु-पक्षियों को विशेष संकेतों से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान कुछ जीवों का घर के आसपास आना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इनके माध्यम से पितरों की उपस्थिति या उनकी प्रसन्नता का संकेत मिल सकता है। हालांकि, ये बातें धार्मिक और लोकविश्वास पर आधारित हैं। आइए जानते हैं किन 5 जीवों को पितृ पक्ष में विशेष महत्व दिया जाता है।

गाय का घर के द्वार पर आना
हिंदू धर्म में गाय को अत्यंत पूजनीय माना गया है। पितृ पक्ष के दौरान यदि गाय घर के दरवाजे पर दिखाई दे या स्वयं घर के पास आ जाए तो इसे कई परंपराओं में शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता है कि गाय की सेवा और उसे भोजन कराने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में श्रद्धालु गाय को रोटी, हरा चारा या अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन करा सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से गाय की सेवा को पुण्यदायी कर्म भी माना जाता है।

पितृ पक्ष में सांप दिखाई देना
सांप को लेकर भी भारतीय धार्मिक परंपराओं में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोकविश्वासों में पितृ पक्ष के दौरान सांप का दिखाई देना पूर्वजों से जुड़ा संकेत माना जाता है। हालांकि, सांप दिखाई देने पर उसे छेड़ना या नुकसान पहुंचाना बिल्कुल उचित नहीं है। यदि घर या आसपास सांप नजर आए तो सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसे हटाने के लिए स्थानीय वन्यजीव बचाव दल या प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सहायता लें। धार्मिक मान्यता अपनी जगह है, लेकिन वन्यजीव की सुरक्षा और लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

घर पर कौवे का आना
पितृ पक्ष में कौवे का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। श्राद्ध कर्म के दौरान पितरों के निमित्त तैयार किए गए भोजन का एक हिस्सा कौवे को खिलाने की परंपरा कई क्षेत्रों में आज भी प्रचलित है। लोकमान्यता के अनुसार, कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यदि श्राद्ध पक्ष में कौवा घर की छत, आंगन या आसपास दिखाई दे तो इसे शुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है। श्रद्धालु उसे भोजन या अन्न देकर अपनी परंपरा का पालन करते हैं।

कुत्ते को भोजन कराना
पितृ पक्ष से जुड़ी परंपराओं में कुत्ते को भोजन कराने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुत्ता पितरों से जुड़े कर्मकांडों में महत्वपूर्ण माना गया है। यदि पितृ पक्ष के दौरान कोई कुत्ता घर के बाहर आ जाए तो उसे भगाने के बजाय भोजन कराने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। पशु को भोजन कराना सेवा और करुणा से जुड़ा अच्छा कार्य भी माना जा सकता है।

घर में चींटियों का दिखाई देना
पितृ पक्ष में चींटियों को भोजन कराने की परंपरा भी कुछ परिवारों में प्रचलित है। यदि घर के आसपास चींटियां दिखाई दें तो उन्हें आटा या अन्य उपयुक्त खाद्य सामग्री देने की बात धार्मिक मान्यताओं में कही जाती है। लोकविश्वास के अनुसार, छोटे जीवों को भोजन कराने से पुण्य प्राप्त होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि चींटियों की संख्या बढ़ना कई बार मौसम, भोजन के कण या घर के वातावरण जैसे सामान्य कारणों से भी हो सकता है।

पितृ पक्ष में जीवों को भोजन कराने की परंपरा
पितृ पक्ष केवल श्राद्ध और तर्पण तक सीमित नहीं माना जाता। भारतीय परंपरा में इस दौरान जरूरतमंदों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भोजन कराने की भी परंपरा रही है। इसका एक उद्देश्य जीवों के प्रति दया और सेवा की भावना को बढ़ावा देना भी माना जाता है। इसलिए यदि पितृ पक्ष में गाय, कौवा, कुत्ता या अन्य जीव आपके आसपास दिखाई दें तो उनके साथ संवेदनशील व्यवहार करें। भोजन कराते समय यह भी ध्यान रखें कि उनके स्वास्थ्य और आसपास के वातावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

धार्मिक मान्यताओं को कैसे समझें?
पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों के दिखाई देने को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। इन्हें धार्मिक आस्था और लोकपरंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए। किसी जीव का दिखाई देना निश्चित रूप से पितरों के प्रसन्न या अप्रसन्न होने का प्रमाण है, ऐसा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। फिर भी पितृ पक्ष के अवसर पर पशु-पक्षियों को भोजन कराना, उनकी रक्षा करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भारतीय संस्कृति में सेवा और करुणा की भावना से जुड़ा माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Continue reading on the app

Pitru Deepak: पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए रोज यहां जलाएं दीपक, जानें सही दिशा और समय

Pitru Deepak: पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य के साथ दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के नाम का दीपक जलाकर उनका स्मरण और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। खास तौर पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। आइए जानते हैं पितरों के लिए दीपक किस दिशा में, किस तेल से और किस समय जलाना चाहिए।

पितरों के लिए दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक
हिंदू धार्मिक परंपरा में पितरों को विशेष सम्मान दिया जाता है। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। इसी क्रम में पितरों के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा भी बताई गई है।

धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों और यमराज से संबंधित दिशा माना जाता है। इसी वजह से पितरों के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाने को शुभ माना जाता है। यह परंपरा केवल पितृ पक्ष तक सीमित नहीं मानी जाती। कुछ परिवार सामान्य दिनों में भी पितरों के स्मरण के लिए दक्षिण दिशा में दीपक जलाते हैं।

किस तेल से जलाएं पितरों का दीपक?
पितरों के निमित्त दीपक जलाने के लिए सरसों या तिल के तेल का इस्तेमाल करने की धार्मिक मान्यता है। इसके अलावा गाय के घी का दीपक भी जलाया जा सकता है।

परंपरा के अनुसार दीपक में शुद्ध तेल या घी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। दीपक जलाते समय मन में पितरों का स्मरण करके उनकी शांति और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।

पितरों के लिए दीपक कैसे जलाएं?
पितरों के निमित्त दीपक जलाते समय कुछ परंपरागत बातों का ध्यान रखा जाता है। दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर रखने की मान्यता है। दीपक को सीधे जमीन पर रखने के बजाय उसके नीचे थोड़े काले तिल या अक्षत (चावल) रखकर उसका आसन बनाया जा सकता है। इसके बाद दीपक प्रज्वलित करके अपने पूर्वजों का स्मरण करें और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करें।

घर में कहां जलाएं पितरों का दीपक?
पितरों के लिए दीपक घर की दक्षिण दिशा में जलाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ धार्मिक परंपराओं में घर के मुख्य द्वार के दक्षिणी हिस्से में दीपक जलाने का भी उल्लेख मिलता है।

कुछ परिवार पीपल के पेड़ के नीचे भी पितरों के नाम का दीपक जलाते हैं। वहीं, घर में पीने के पानी के स्थान यानी मटके या परिंडे के पास दीपक रखने की परंपरा भी कुछ जगहों पर प्रचलित है।

पितरों का दीपक कब जलाना चाहिए?
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के निमित्त दीपक शाम के समय सूर्यास्त के बाद जलाया जाता है। प्रदोष काल को भी दीपक जलाने के लिए शुभ माना जाता है।

सूर्यास्त के बाद दीपक प्रज्वलित करके कुछ समय शांत मन से पितरों का स्मरण किया जा सकता है। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं में समय को लेकर अंतर हो सकता है।

दीपक जलाने के बाद करें पितरों का स्मरण
दीपक जलाने के बाद हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को याद करें और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें। मन ही मन उनसे परिवार पर आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की जा सकती है।

साथ ही जाने-अनजाने में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगने की भी परंपरा है। पितृ पक्ष में किए जाने वाले इन कर्मों का मूल भाव पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और सम्मान माना जाता है।

नोट: दीपक की दिशा, तेल और इससे जुड़े शुभ-अशुभ प्रभाव धार्मिक एवं वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं में विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है।

Continue reading on the app

  Sports

रांची में 9 अक्टूबर को खेला जाएगा टी-20 क्रिकेट मैच, ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलेंगे टिकट

रांची के जेएससीए स्टेडियम में 9 अक्टूबर को टी-20 मैच होगा. टिकट बिक्री 5-6 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक जेएससीए काउंटर और district.in पर होगी. एक व्यक्ति अधिकतम दो टिकट ले सकता है. Wed, 30 Sep 2026 23:52:20 +0530

  Videos
See all

Heavy Rain Alert:IMD की चेतावनी से मचा हड़कंप, कई राज्यों में बारिश! Weather News Today | IMD Alert #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-30T23:30:16+00:00

SIR Row | INDIA Bloc की बैठक के बाद Mamata Banerjee का बड़ा हमला, ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या कह गईं? #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-30T23:35:17+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers