MP Weather Update: मानसून वापसी के लिए परिस्थितियों अनुकूल, अबतक 907.9 मिमी बारिश हुई, मंगलवार से खिलेगी धूप
मानसूनी सिस्टम कमजोर होने से मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया है, हालांकि 30 सितंबर तक बादलों की आवाजाही और कहीं-कहीं बूंदाबांदी की स्थिति बन सकती है। प्रदेश में अबतक औसतन 907.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 942.9 मिमी है। मौसम विभाग की माने तो एक हफ्ते के अंदर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई संभव है। मंगलवार से उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज धूप देखने को मिलेगी।
28 से 30 सितंबर तक बदला रहेगा मौसम
भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढुर्णा में कहीं-कहीं बादलों की आवाजाही के साथ 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है।
जून से सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में कहां-कितनी हुई बारिश
1 जून से 27 सितंबर 2026 तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% यानि 1.4 इंच बारिश कम हुई है। प्रदेश में अबतक 35.7 इंच बारिश ( 95.8% या 907.9 MM) रिकॉर्ड हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37. 1 इंच होनी चाहिए थी।। पूर्वी मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 5% ज्यादा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 11% कम पानी गिरा है। अब तक 25 जिलों में सामान्य बारिश और 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है, ऐसे में एक हफ्ते के अंदर मानसून के लौटने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौट भी चुका है।
- अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
- बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2 से 20% तक कम बारिश
- आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51% तक कम बारिश।
Pitru Paksha 2026 Dwitiya Shradh: आज पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है, जानें पिंडदान करने का सही समय और विधि
Pitru Paksha 2026 Dwitiya Shradh: पितृपक्ष का आज यानी 28 सितंबर 2026 को द्वितीया तिथि का श्राद्ध है. इस श्राद्ध के दिन उन सभी मृतकों का तर्पण व पिंडदान किया जाएगा, जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार, किसी माह की द्वितीया को हुआ था. यह तिथि शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों की हो सकती है. पूर्वजों या पितरों की शांति के लिए आज के दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. ये सभी धार्मिक अनुष्ठान कुतुप काल में किए जाते हैं. इतना ही नहीं, ये सभी कार्य आपको किसी योग्य ब्राह्मण की देख-रेख में करना होता है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण प्राप्त होने से हमारे पितृ शांत होते हैं तथा उनकी कृपा बनी रहती है.
आज है द्वितीया तिथि का श्राद्ध
आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया है. इस तिथि का प्रारंभ 27 सितंबर को रात 8:58 पर हुआ था और 28 सितंबर को शाम 7:13 तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक, द्वितीया तिथि का श्राद्ध सोमवार को यानी आज किया जा रहा है.
श्राद्धा और तर्पण का मुहूर्त
बता दें कि पूर्वजों का पिंडदान हमेशा दोपहर के समय किया जाता है. इसलिए, शास्त्रों के अनुसार, पितरों का तर्पण और श्राद्ध कुतुप वेला में किया जाए तो सबसे उत्तम होता है. आज यानी 28 सितंबर को कुतुप काल दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रहा है और 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. हालांकि, कुतुप वेला का समय अलग-अलग शहरों में अलग भी हो सकता है. इसलिए, अपने शहर के पंचांग के अनुसार, समय सुनिश्चित करें.
द्वितीया तिथि पर श्राद्ध की विधि
द्रिक पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि के श्राद्ध में चावल, आटे या जौ से पिंड बनाए जाते हैं. इन पिंडों को ही पितरों को अर्पित किया जाता है. पिंडदान करने के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का तर्पण करना होता है. पितरों का तर्पण करते समय हाथ में कुशा जरूर रखनी चाहिए. इसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण करना होता है. श्रााद्ध के बाद जरूरतमंद ब्राह्मणों की सेवा करें, उन्हें भोजन करवाएं और दक्षिणा दें. अंत में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें.
श्राद्ध करते समय आपको गाय, कुत्तों, कौवों और चींटियों के लिए भी भोजन निकालना होता है. इनका एक अंश निकालकर अलग रख दें. धार्मिक मान्यता है कि इन जीवों के माध्यम से ही हमारे पितृ भोजन प्राप्त करते हैं और प्रसन्न होते हैं. इससे पितृ दोष भी नहीं लगता है और उनकी आत्मा तृप्त होती है.
द्वितीया श्राद्ध के दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखें?
पितृपक्ष में श्राद्ध के दिन कुछ बातों का खास ख्याल रखना होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद, क्रोध या अपशब्दों को बोलने से बचना चाहिए. श्राद्ध कर्म श्रद्धा और शांत मन से करना शुभ माना जाता है.
मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन
श्राद्ध के दिन मांसाहारी भोजन, शराब और अन्य तामसिक चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, खाने में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल भी न करने की परंपरा कई परिवारों में मानी जाती है. पितरों के निमित्त बनाए गए भोजन को पहले भगवान और पितरों को अर्पित करने के बाद ही ग्रहण करने की मान्यता है.
इस दिन बाल और नाखून काटने, अनावश्यक खरीदारी करने और शुभ मांगलिक कार्यों को करने से भी कई धार्मिक परंपराओं में परहेज किया जाता है. हालांकि, इन नियमों में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है.
श्राद्ध कर्म के दौरान पिंडदान और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों का अपमान या अनादर बिल्कुल नहीं करना चाहिए. साथ ही, ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करने की परंपरा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्राद्ध कर्म दिखावे के बजाय श्रद्धा, सम्मान और पितरों के स्मरण के साथ किया जाए.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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