सेंसेक्स में 700 अंक की गिरावट:73,200 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 200 अंक नीचे आया; बैंकिंग और FMCG शेयर्स में ज्यादा बिकवाली
शेयर बाजार में आज यानी 28 सितंबर को गिरावट है। सेंसेक्स करीब 700 अंक की गिरावट के साथ 73,200 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 200 अंक से ज्यादा की गिरावट है, ये 22,900 पर कारोबार कर रहा है। बैंकिंग, FMCG और रियल्टी शेयर्स में आज ज्यादा बिकवाली है। आज से 2 IPO ओपन होंगे आज से SRIT इंडिया और शेयर ब्रोकिंग फर्म शाह इन्वेस्टर्स होम का IPO ओपन होगा। SRIT इंडिया IPO के जरिए 218 करोड़ रुपए और शेयर ब्रोकिंग फर्म शाह इन्वेस्टर्स होम 90.17 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है। दोनों ही IPO में 30 सितंबर तक बोली लगा सकेंगे। एशियाई बाजारों में मिला जुला कारोबार अमेरिकी बाजार में 25 सितंबर को बढ़त रही थी विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 7,796 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। शुक्रवार को बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले बीते हफ्ते शुक्रवार, 25 सितंबर को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 315 अंक चढ़कर 73,896 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 77 अंक की बढ़त रही, ये 23,141 पर बंद हुआ था।
जितिया व्रत 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाएगा निर्जला व्रत, जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और विधि
Jitiya Vrat 2026: हिंदू धर्म में जितिया व्रत को संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार माताएं अपनी संतान के स्वस्थ, सुरक्षित और लंबे जीवन की कामना से इस दिन कठिन निर्जला उपवास करती हैं। जितिया पर्व का विशेष प्रचलन बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के अलावा नेपाल के कुछ क्षेत्रों में भी देखने को मिलता है। इस व्रत में भगवान सूर्य नारायण और राजा जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कई स्थानों पर पूजा के दौरान लोकपरंपरा के अनुसार चील और सियारिन की आकृतियां भी बनाई जाती हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में जितिया व्रत किस दिन रखा जाएगा, पूजा के लिए कौन से मुहूर्त रहेंगे और किस तरह पूजा की जाती है।
जितिया व्रत 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर 2026 को सुबह 7 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और प्रचलित व्रत परंपरा के अनुसार जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन व्रती महिलाएं संतान की मंगलकामना के लिए निर्जला उपवास रखेंगी।
जितिया व्रत 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 बजे से 5:26 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:02 बजे से 6:15 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:05 बजे से 6:29 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 6:05 बजे से 7:18 बजे तक
जितिया व्रत में किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
जितिया पर्व की पूजा में सूर्य देव और राजा जीमूतवाहन का विशेष स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में जीमूतवाहन को त्याग और संतान की रक्षा के आदर्श से जोड़ा जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं विधि-विधान से पूजा करके अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं।
जितिया व्रत पूजा विधि
जितिया व्रत के दिन पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद सूर्य देव की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान धूप, दीप, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करके सूर्य नारायण को भोग लगाया जाता है। जितिया की मुख्य पूजा कई परंपराओं में शाम के समय की जाती है। इसके लिए पूजा स्थल को साफ करके वहां मिट्टी या गोबर से चील और सियारिन की आकृतियां बनाई जाती हैं। इसके बाद कुशा से तैयार जीमूतवाहन की प्रतिमा स्थापित की जाती है। प्रतिमा को अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करके विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इसके बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी या पढ़ी जाती है। पूजा पूरी होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी बताई गई है।
कब होगा जितिया व्रत का पारण?
जितिया व्रत में व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास करती हैं। व्रत का पारण अगले दिन यानी 4 अक्टूबर 2026 को पूजा के बाद किया जाएगा। पारण की स्थानीय परंपरा और समय के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग का अनुसरण करना उचित रहेगा।
जितिया व्रत का धार्मिक महत्व
जीवित्पुत्रिका व्रत को मातृत्व, त्याग और संतान के प्रति प्रेम से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से संतान को दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में जितिया की पूजा-पद्धति और लोकपरंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस पर्व का विशेष सांस्कृतिक महत्व है। नेपाल के कुछ हिस्सों में भी महिलाएं इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत करती हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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