जरूरत की खबर- मधुमक्खी डंक मारे तो क्या करें:मामूली डंक में करें 6 घरेलू उपचार, ये 5 संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
फर्ज करिए कि आप किसी पार्क, खेत या बगीचे में टहल रहे हैं और अचानक मधुमक्खियों का झुंड आपके पास आ जाए। आप घबराकर भागने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ मधुमक्खियां आपको डंक मार देती हैं। मधुमक्खी का डंक लगते ही ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि थोड़ी देर दर्द होगा, सूजन होगी और फिर सब ठीक हो जाएगा। अक्सर ऐसा होता भी है। लेकिन हर बार नहीं। कुछ लोगों में मधुमक्खी का डंक शरीर में गंभीर एलर्जिक रिएक्शन भी पैदा कर सकता है। कई बार मधुमक्खी का काटना जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में सही फर्स्ट एड और खतरे के संकेतों को पहचानना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे कि मधुमक्खी के डंक मारने से शरीर में क्या होता है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. समीर राठी, कंसल्टेंट, इमरजेंसी मेडिसिन, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- मधुमक्खी के डंक मारने से शरीर में क्या होता है? जवाब- मधुमक्खी के डंक के साथ उसके शरीर का जहर (वेनम) स्किन में चला जाता है। इसके बाद शरीर की प्रतिक्रिया के कारण ये रिएक्शन हो सकते हैं- सवाल- मधुमक्खी के डंक मारने पर कौन-से संकेत मेडिकल इमरजेंसी की ओर इशारा करते हैं? जवाब- कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम मधुमक्खी के जहर के प्रति तेज प्रतिक्रिया करता है। इससे एनाफिलैक्सिस (तेज एलर्जिक रिएक्शन) जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। मेडिकल इमरजेंसी के सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या मधुमक्खी का काटना और डंक मारना, दोनों एक ही बातें हैं? जवाब- हां, मधुमक्खी का काटना और डंक मारना, दोनों एक ही बात है। सिर्फ भाषा का फर्क है। आम बोलचाल की भाषा में लोग कहते हैं, ‘मधुमक्खी ने काट लिया।’ लेकिन मधुमक्खी काटती नहीं, बल्कि डंक मारती है। डंक के जरिए वह स्किन में जहर छोड़ती है। सवाल- अगर मधुमक्खी का डंक स्किन में फंस जाए तो इससे क्या रिस्क हो सकता है? जवाब- इससे सूजन और जलन हो सकती है। कुछ केस में यह सामान्य से ज्यादा समय तक बनी रह सकती है। साथ ही स्किन को बार-बार छूने या खुजलाने से इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए डंक दिखाई दे तो उसे जितनी जल्दी हो सके, सावधानी से हटा देना चाहिए। सवाल- खुद डंक निकाल सकते हैं या डॉक्टर के पास जाना चाहिए? जवाब- अगर डंक स्किन की सतह पर साफ दिखाई दे रहा है और कोई गंभीर लक्षण नहीं है, तो इसे घर पर सावधानी से निकाल सकते हैं। साफ नाखूनों या किसी पतली, सपाट चीज से धीरे से खुरचकर डंक निकाल सकते हैं। कुछ स्थितियों में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है, जैसेकि- सवाल- मधुमक्खी के डंक मारने पर तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए? जवाब- ऐसी स्थिति में सबसे पहले सुरक्षित जगह पर जाएं। अगर डंक स्किन पर दिख रहा है तो उसे सावधानी से निकालें। इसके अलावा सभी जरूरी कदम ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या डंक वाली जगह को खुजलाना या रगड़ना सही है? जवाब- नहीं, डंक वाली जगह को खुजलाना या जोर से रगड़ना नहीं चाहिए। इससे स्किन में जलन, सूजन बढ़ सकती है। साथ ही संक्रमण का रिस्क भी बढ़ता है। सवाल- अगर मधुमक्खी के डंक का घाव ज्यादा गंभीर नहीं है तो क्या इसके लिए कुछ घरेलू उपाय भी कर सकते हैं? जवाब- हां, अगर सिर्फ डंक वाली जगह पर दर्द, हल्की सूजन, लालिमा या खुजली है और सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण नहीं हैं, तो घर पर प्राथमिक उपचार किया जा सकता है। सवाल- मधुमक्खी के डंक पर कौन-से घरेलू नुस्खे बिल्कुल नहीं आजमाने चाहिए? जवाब- मधुमक्खी के डंक मारने पर अक्सर लोग कई घरेलू उपाय अपनाते हैं, लेकिन इनसे बचना चाहिए। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर किसी व्यक्ति को पहले मधुमक्खी के डंक से गंभीर एलर्जी हो चुकी है तो अगली बार क्या सावधानी रखनी चाहिए? जवाब- ऐसे में खास सावधानी रखें। डॉक्टर की सलाह से एपिनेफ्रिन (एड्रेनालिन) ऑटो-इंजेक्टर साथ रखें और इसके इस्तेमाल का तरीका पहले से सीखें। यह एक मेडिकल डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल गंभीर एलर्जिक रिएक्शन को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। डंक लगने पर गंभीर एलर्जी के लक्षण दिखें तो तुरंत इसका इस्तेमाल करें और इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लें। सवाल- मधुमक्खी के डंक का दर्द और सूजन कितने समय में कम हो जाते हैं? जवाब- आमतौर पर डंक लगने के बाद दर्द और जलन कुछ घंटों में कम होने लगती है। जबकि सूजन और लालिमा कुछ दिनों तक रह सकती है। कुछ लोगों में सूजन 2–3 दिन तक बढ़ने के बाद धीरे-धीरे कम होती है। सवाल- अगर ढेर सारी मधुमक्खियां एक साथ अटैक कर दें तो बचने के लिए क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत कुछ कदम उठाएं- सवाल- जहां मधुमक्खी के काटने का रिस्क हो, वहां किन तैयारियों के साथ जाना चाहिए? जवाब- इसके लिए पहले से कुछ सावधानियां बरतें, जैसेकि- ************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ……………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- पेपर कप में चाय-कॉफी, सूप न पिएं: उसमें छिपे माइक्रोप्लास्टिक से 7 गंभीर हेल्थ रिस्क, कांच या स्टील का कप ही बेहतर स्टडी बताती है कि पेपर कप में गर्म ड्रिंक पीने से माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर बढ़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर डेली पेपर कप में गर्म चाय-कॉफी पीते हैं तो इसका सेहत पर क्या असर हो सकता है। पूरी खबर पढ़िए…
फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब:सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब
पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। यह सुझाव नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NP-NCD) के तहत दिया गया है। यह सिफारिश ऐसे समय में आई है, जब देश में किडनी डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में पब्लिश एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, भारत में हार्ट डिजीज के बाद क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर किडनी डिजीज के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में लोगों को इसका पता तब चलता है, जब किडनी काफी हद तक खराब हो चुकी होती है। यही वजह है कि समिति ने इलाज से ज्यादा समय रहते पहचान और बचाव पर जोर दिया है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. निरंजन कुलकर्णी, कंसल्टेंट, नेफ्रोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- संसदीय समिति ने साल में दो बार किडनी टेस्ट किए जाने की सिफारिश क्यों की है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या भारत में किडनी डिजीज के आंकड़े सचमुच चिंताजनक हैं? जवाब- हां, आंकड़ों से इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हेल्थ जर्नल ‘द लैंसेट’ के मुताबिक, साल 2023 में भारत में लगभग 13.8 करोड़ लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थे। वहीं संसदीय समिति के अनुसार, हर साल करीब 2 लाख नए मरीज किडनी डिजीज की आखिरी स्टेज तक पहुंचते हैं, जब डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह जाता। सवाल- KFT यानी किडनी फंक्शन टेस्ट क्या है? जवाब- इस टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है। इसके लिए ब्लड और यूरिन के सैंपल लिए जाते हैं। इसमें सीरम क्रिएटिनिन, एस्टीमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR) और यूरिन में प्रोटीन व एल्ब्यूमिन जैसी जांचें की जाती हैं। सवाल- KFT टेस्ट से किडनी के बारे में क्या पता चलता है? जवाब- इस टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता में कमी, किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत और बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। किडनी की कार्यक्षमता को समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में कई अहम काम करती है। इसके डैमेज होने पर कई तरह के गंभीर हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। किडनी के मुख्य काम ग्राफिक में देखिए- सवाल- KFT में कौन-कौन से टेस्ट शामिल होते हैं? जवाब- इसमें कई टेस्ट शामिल होते हैं, जो किडनी की कार्यक्षमता और उसकी सेहत के अलग-अलग पहलुओं का आकलन करते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सीरम क्रिएटिनिन एस्टीमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (eGFR) ब्लड यूरिया यूरिन प्रोटीन या एल्ब्यूमिन सोडियम और पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स ध्यान रखें, अलग-अलग लैब के KFT पैनल में शामिल जांचें अलग हो सकती हैं। सवाल- KFT टेस्ट कैसे होता है? क्या इसके लिए कोई खास तैयारी चाहिए? जवाब- इसमें आमतौर पर ब्लड और यूरिन सैंपल लिए जाते हैं। ज्यादातर मामलों में खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ टेस्ट के लिए फास्टिंग या दवाओं से जुड़ी विशेष सलाह दी जा सकती है। सवाल- KFT में होने वाले सभी टेस्ट्स की सामान्य रेंज क्या है? जवाब- इसमें शामिल अलग-अलग जांचों की सामान्य रेंज अलग होती है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- किन लोगों को रेगुलर किडनी टेस्ट करवाना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों में CKD का रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें डॉक्टर की सलाह से हर 6 महीने में किडनी स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत क्या हैं? जवाब- किडनी डैमेज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखते। हालांकि, किडनी की कार्यक्षमता घटने पर कुछ संकेत दिख सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- हमारी किन गलतियों और आदतों के कारण किडनी को नुकसान पहुंचता है? जवाब- हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जैसेकि- सवाल- अगर KFT रिपोर्ट खराब आए तो क्या करें? जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें, ताकि रिपोर्ट की सही वजह पता चल सके। आप ये कदम उठा सकते हैं- ध्यान रखें, KFT में गड़बड़ी का मतलब हमेशा किडनी फेलियर नहीं होता। समय पर जांच और सही इलाज से कई मामलों में स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। सवाल- अगर KFT रिपोर्ट सही हो तो क्या करें? जवाब- फिलहाल जांच में किडनी की कार्यक्षमता सामान्य है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आगे किडनी की सेहत को लेकर आप पूरी तरह निश्चिंत हो जाएं। अगर कोई ऐसी आदत है, जो किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, तो उसे आज से ही छोड़ें और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। सवाल- किडनी को हेल्दी रखने वाली बेस्ट आदतें कौन-सी हैं? जवाब- किडनी पर दबाव कम करने के लिए हेल्दी आदतें अपनाना जरूरी है। सभी हेल्दी आदतों की लिस्ट ग्राफिक में देखिए- KFT से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या KFT रिपोर्ट खराब आने का मतलब ‘किडनी डैमेज’ होना है? जवाब- ऐसा जरूरी नहीं। KFT में गड़बड़ी के कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच और अन्य टेस्ट से कारण की पुष्टि करते हैं। सवाल- क्या सामान्य KFT रिपोर्ट का मतलब है कि किडनी पूरी तरह स्वस्थ है? जवाब- जरूरी नहीं। शुरुआती CKD में KFT रिजल्ट सामान्य आ सकता है। जोखिम वाले लोगों में डॉक्टर की सलाह से नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है। सवाल- KFT में कितना खर्च आता है? जवाब- इसकी कीमत लैब और जांचों की संख्या के अनुसार अलग-अलग होती है। आमतौर पर KFT पैकेज करीब ₹1,000 तक का हो सकता है। ****************** ग्राफिक्स– विपुल शर्मा ……………… फिजिकल हेल्थ की ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- लीकी गट क्या है: क्यों कमजोर होता आंतों का सुरक्षा बैरियर, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, इलाज और जरूरी सावधानियां हमारी आंतें सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करतीं। ये खाने से जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाती हैं और कई हानिकारक बैक्टीरिया व टॉक्सिन्स को ब्लड में जाने से रोकती भी हैं। इसके लिए आंतों की अंदरूनी परत एक फिल्टर की तरह काम करती है। पूरी खबर पढ़िए…
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