T20 क्रिकेट में किस टीम ने कितनी बार 200+ रनों का पीछा करते हुए हासिल की जीत, जानिए भारत किस स्थान पर
T20 क्रिकेट आज के समय में बल्लेबाजों का गेम ज्यादा बन गया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर साफ देखने के लिए मिलता है. अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में कोई भी स्कोर सेफ नहीं है. टीमें अक्सर सोचती हैं कि उन्होंने टी20 मैच में 200+ रनों का स्कोर बना दिया है तो उनकी जीत लगभग तय है, लेकिन ऐसा नहीं है विरोधी टीमें 200+ का स्कोर खड़ा करने के बाद भी उनके हाथों से जीत छीन लेती है और सफल रन चेज को अंजाम देती हैं.
ऐसा ही कुछ अब एक बार फिर देखने को मिला है, जब न्यूजीलैंड ने रायपुर में भारत के साथ खेलने गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मैच में 209 रनों की लक्ष्य जीत के लिए दिया. इस टारगेट को भारत ने ईशान किशन 76 और सूर्यकुमार यादव 82 की शानदार पारियों की बदौलत 15.2 ओवर में 3 विकेट गंवाकर आसानी से हासिल कर लिया.
1⃣0⃣0⃣th Men's T20I at home ✅
— BCCI (@BCCI) January 23, 2026
Joint-highest successful run-chase ✅
A memorable outing for #TeamIndia ????
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टी20 क्रिकेट में 200+ लक्ष्य का पीछा करना हुआ आसान
इस ताजा उदाहरण को देखते हुए कहा नहीं जा सकता है कि टी20 क्रिकेट में अब 200+ रनों का स्कोर भी सुरक्षित है. तो आज हम आपको टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की उन टीमों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा बार 200+ रन पीछा करते हुए जीत हासिल की है.
टी20 क्रिकेट में 200+ लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा जीत
टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200+ के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा बार जीत ऑस्ट्रेलिया ने अपने नाम दर्ज की है. ऑस्ट्रेलिया ने कुल 7 बार सफलतापूर्वक 200+ लक्ष्य को टी20 क्रिकेट में हासिल किया है.
इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200+ लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा जीत दर्ज करने के मामले में भारत की टीम आती है. टीम इंडिया ने कुल 6 बार सफलतापूर्वक 200+ लक्ष्य को हासिल कर जीत दर्ज की है.
ये तीन टीमें भी लिस्ट में शामिल
इस लिस्ट में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200+ लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका के नाम 5 जीत, पाकिस्तान के नाम 4 जीत और इंग्लैंड के नाम 3 जीत दर्ज हैं.
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अमेरिका : प्रतिनिधि सभा सदस्य ने सिख विरोधी नफरत को रोकने वाले बिल का समर्थन किया
वॉशिंगटन, 24 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में सिख समुदाय के खिलाफ भेदभाव और नफरत से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए एक नया कानून अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा (यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में दोनों पार्टियों का समर्थन हासिल कर रहा है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में इस विधेयक को दोनों दलों का साथ मिल रहा है। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद जो लोफग्रेन भी इसकी सह-प्रायोजक बन गई हैं।
इस प्रस्तावित कानून का नाम ‘सिख अमेरिकन एंटी-डिस्क्रिमिनेशन एक्ट 2025’ है, जिसे एच.आर. 7100 भी कहा जाता है। न्यू जर्सी के कांग्रेसी जोश गॉटहाइमर ने इस महीने की शुरुआत में यह बिल पेश किया था। अब इसे कैलिफ़ोर्निया की डेमोक्रेट और अमेरिकन सिख कांग्रेसनल कॉकस की वाइस चेयर लोफग्रेन का समर्थन मिल गया है।
ज़ो लोफग्रेन ने कहा कि अमेरिका में किसी भी धर्म के लोगों को पूजा करने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने माना कि सिख अमेरिकियों के खिलाफ भेदभाव और नफरत की घटनाएं बढ़ी हैं, इसलिए न्याय विभाग को इस मुद्दे पर गंभीर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे सैन जोस में एक बड़े सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व है, और मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूंगी कि संघीय सरकार सिख विरोधी भेदभाव से लड़े।
वहीं जोश गॉटहाइमर ने कहा कि यह कानून सिख परिवारों और समुदाय के नेताओं से सीधे बातचीत के बाद लाया गया है। उनके अनुसार, यह विधेयक सरकार को सिख समुदाय के खिलाफ होने वाले नफरत भरे अपराधों को पहचानने, दर्ज करने और रोकने में मजबूत बनाएगा, ताकि हर अमेरिकी बिना डर अपने धर्म का पालन कर सके।
उन्होंने कहा, नॉर्थ जर्सी में सिख परिवारों और समुदाय के नेताओं से सीधे बात करने के बाद, यह साफ है कि कांग्रेस को निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। यह कानून इस बात को मजबूत करेगा कि हमारी संघीय सरकार सिख विरोधी नफरत वाले अपराधों को कैसे परिभाषित करती है, ट्रैक करती है और रोकती है ताकि हर अमेरिकी अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से पालन कर सके।
अगर यह कानून पारित हो जाता है, तो अमेरिकी न्याय विभाग में ‘सिख विरोधी भेदभाव पर कार्यबल’ बनाया जाएगा। यह कार्यबल सिख विरोधी नफरत की एक स्पष्ट परिभाषा तय करेगा, स्कूलों, पुलिस और विश्वविद्यालयों के लिए जागरूकता कार्यक्रम तैयार करेगा और हर साल संसद को रिपोर्ट देगा।
इस विधेयक को सिख समुदाय के कई राष्ट्रीय संगठनों का समर्थन मिला है। उनका कहना है कि सिखों के खिलाफ भेदभाव रोकने के लिए संघीय स्तर पर तुरंत और ठोस कदम उठाना ज़रूरी है। इनमें सिख गठबंधन, सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड और अमेरिकन सिख कॉकस कमेटी शामिल हैं।
--आईएएनएस
एएस/
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