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जीडीपी से नहीं जमीन पर नजर आए बदलाव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से भारत की तरक्की का जश्न मनाने के लिए कहते हुए 7.8% की शानदार जीडीपी ग्रोथ के लिए बधाई दी। सवाल यह है कि क्या आम आदमी देश में जीडीपी ग्रोथ को समझता है। क्या जीडीपी बढ़ना देश की मौजूदा समस्याओं के समाधान का कोई पैमाना है। देश में जब प्रधानमंत्री जीडीपी बढ़ोतरी की घोषणा कर रहे थे, उसी दिन कमर्शियल एलपीजी के दाम में बढ़ोतरी हो गई है। दिल्ली में इसके दाम में 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2747.50 रुपये, मुंबई में 2701 रुपये और चेन्नई में 2916.50 रुपये हो गई है। कमर्शियल सिलेंडर के महंगे होने से होटल, ढाबे आदि में खाना-पीना महंगा होना तय है। वहीं घर मिलने वाली चीजों के दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा 5 किलो वाले गैस सिलेंडर का भी दाम 2 रुपये बढ़कर 764 रुपये हो गया है।

मुंबई और तमिलनाडु में दूध महंगा हो गया है। बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने थोक दूध की कीमतों में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इससे दूध की थोक दर 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गई है। भारत में जुलाई-अगस्त 2026 के दौरान खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.52% हो गई है, जिसके कारण चीनी, प्याज, टमाटर, दाल और खाना पकाने के तेल जैसी जरूरी रसोई की चीजें महंगी हो गई हैं. चावल और दूध के दाम भी स्थिर से लेकर उच्च स्तर पर बने हुए हैं।

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महंगाई बढ़ने के कारण प्याज (22.54%), लहसुन (35.36%) और अदरक (83.62%) की कीमतों में भारी तेजी आई है। ईंधन और परिवहन महंगाई बढ़कर 4.43% हो गई है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ी है। रेस्त्रां और आवास सेवाओं की महंगाई दर बढ़कर लगभग 7.72% हो गई है। देश के आम आदमी को हर दिन होने वाली कठिनाईयों से जूझना पड़ रहा है। देश का मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग को जीडीपी की ग्रोथ से अंतर तब पड़ता है, जब उनकी बुनियादी सुविधाओं कोई बेहतरी नजर आए।

देश में पानी, बिजली, स्कूल, अस्पताल, सड़क, रोजगार, महंगाई जैसी बुनियादी समस्याओं की भरमार है। इनसे राहत मिलती भी है तो उूंट के मुंह में जीरे जितनी। इससे बदलाव नजर नहीं आता। भारत की आधी से अधिक आबादी यानी करीब 60 करोड़ लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। देश के भूजल का बड़ा हिस्सा आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य भारी धातुओं (हैवी मेटल्स) की वजह से दूषित हो चुका है। बारिश का पर्याप्त पानी होने के बावजूद उचित हार्वेस्टिंग (संचयन) न होने के कारण पानी बेकार बह जाता है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, साफ पीने का पानी न मिलने के कारण हर साल देश में करीब 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

वर्ष 2026 में भीषण गर्मी, रिकॉर्ड बिजली मांग (मई 2026 में 270 गीगावाट से अधिक) और स्थानीय रख-रखाव के कारण उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, ओडिशा और तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों के इलाकों में आंशिक या अस्थायी कटौती की गई।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेघरता की दर प्रति 10,000 लोगों पर 13 है। अर्थात 17 प्रतिशत लोगों को पास अपना घर नहीं है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 35 प्रतिशत गांवों में स्थानीय स्तर पर कोई भी बुनियादी चिकित्सा सुविधा या स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों  में विशेषज्ञ डॉक्टरों और सर्जनों की भारी कमी है, जो लगभग 80 प्रतिशत तक खाली पड़े हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों (2014-15 से 2024-25) में देश भर में करीब 94,000 सरकारी स्कूल बंद या आपस में मर्ज किए गए हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 25 स्कूलों पर ताला लगा है। इसी दशक में सरकारी स्कूलों में कुल छात्रों का नामांकन 2.26 करोड़ कम हुआ है, जो 2014-15 के 26.95 करोड़ से घटकर 2024-25 में 24.69 करोड़ रह गया है। देश के एक लाख से अधिक स्कूलों में आज भी बिजली की उचित सुविधा नहीं है, और कई स्थानों पर पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। 71,959 स्कूलों में लड़कियों के लिए और 1.12 लाख स्कूलों में लड़कों के लिए काम करने वाले शौचालय मौजूद नहीं हैं। 1.39 लाख स्कूलों में लाइब्रेरी और 2.65 लाख स्कूलों में खेल का मैदान नहीं है। डिजिटल लाइब्रेरी का अभाव तो लगभग 13.62 लाख स्कूलों में है।

भारत में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोज़गारी दर जून 2026 में बढ़कर 16.2% हो गई है, 15–29 आयु वर्ग की महिलाओं में यह दर बढ़कर 20.7% हो गई। इसी आयु वर्ग के पुरुषों में यह दर 14.6% दर्ज की गई। जून 2026 में शहरी युवा बेरोज़गारी दर 18.2% और ग्रामीण युवा बेरोज़गारी दर 15.1% रही। नीति आयोग की बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक गरीबी वाले राज्य बिहार में 51.91% आबादी गरीब है। झारखंड मे 42.16% लोग गरीबी में जीवन बिता रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 37.79% जनसंख्या गरीब है। मध्य प्रदेश में 36.65% लोग गरीब हैं।

भारत में सबसे अमीर 10% लोगों के पास कुल संपत्ति का लगभग 65% हिस्सा है. सबसे ज़्यादा कमाई करने वाले 10% लोग राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा पाते हैं जबकि सबसे निचले 50% लोगों को सिर्फ़ 15% मिलता है। आर्थिक असमानता की यह खाई लगातार बढ़ती जा रही है। निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री का यह हक है कि जीडीपी की ग्रोथ पर खुशी मनाने का आह्वान करें पर जब तक इसका असर देश की मूल समस्याओं के निराकरण में नजर नहीं आएगा, देश के लोगों की उदासी दूर नहीं होगी।

- योगेन्द्र योगी

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Pakistan के साथ Mecca Pact Sign कर Saudi Arabia ने बड़ी गलती की, India से संबंध मजबूत किये होते तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता!

सऊदी अरब के लिए खतरे की घंटी अब मक्का तक पहुंच गई है। इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का में पहली बार संभावित हवाई हमले को लेकर आपात चेतावनी जारी होने और सायरन बजने से पूरी दुनिया में चिंता पैदा हो गई है। मक्का में हर साल दुनिया के कोने-कोने से लाखों मुसलमान पहुंचते हैं, इसलिए यहां मंडराता कोई भी सुरक्षा खतरा सिर्फ सऊदी अरब की चिंता नहीं रह जाता। हम आपको बता दें कि लोगों को घरों के भीतर जाने और खिड़कियों-दरवाजों से दूर रहने को कहा गया। जेद्दा और ताइफ में भी ऐसी ही चेतावनी जारी हुई। कुछ ही मिनटों में अलर्ट हटा लिया गया, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया कि यमन के हूतियों से बढ़ता खतरा अब सऊदी अरब के बेहद संवेदनशील इलाकों तक पहुंच चुका है।

मक्का का नाम इस पूरे संकट को असाधारण रूप से संवेदनशील बना देता है। यह केवल सऊदी अरब का शहर नहीं, बल्कि इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक केंद्र है। इसलिए यहां हवाई खतरे की चेतावनी ने सैन्य संकट को सीधे धार्मिक और राजनीतिक संकट में बदल दिया है। इस्लामी सहयोग संगठन ने मक्का और मदीना क्षेत्र पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि पवित्र स्थलों, मस्जिदों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है और उसने सऊदी अरब की सुरक्षा तथा पवित्र स्थलों की रक्षा के उपायों का समर्थन किया है।

इसे भी पढ़ें: Middle East Tension: मक्का के पास सऊदी एयर डिफेंस ने हूथी ड्रोन को किया ढेर, गठबंधन ने दी 'रेड लाइन' की सख्त चेतावनी

लेकिन असली तस्वीर मक्का से कहीं बड़ी है। हम आपको बता दें कि 12 सितंबर को यमन से दागा गया प्रक्षेपास्त्र सऊदी अरब के जाजान क्षेत्र में गिरा, जिसमें दो लोग घायल हुए और एक मस्जिद सहित कई इमारतों तथा वाहनों को नुकसान पहुंचा। इसके अगले दिन सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ के नागरिक इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमलों की बात कही। इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए और आवासीय मकानों तथा वाहनों को नुकसान पहुंचा। रियाद ने अब साफ संकेत दिया है कि लगातार हमलों का जवाब दिया जाएगा।

सबसे खतरनाक बात यह है कि हमला केवल शहरों पर नहीं हो रहा। सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था भी निशाने पर है। 11 सितंबर को इराक से हुए ड्रोन हमले के बाद करीब 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 40 से 50 लाख बैरल तेल लाल सागर तक पहुंचाने में सक्षम है और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के बीच सऊदी अरब के लिए बेहद महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन गई थी।

यही वह बिंदु है जहां संकट का सामरिक अर्थ साफ दिखाई देता है। यदि होर्मुज बाधित है और लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब-अल-मंदब पर भी हूतियों का दबदबा बढ़ता है, तो सऊदी अरब के सामने तेल निर्यात के सुरक्षित रास्ते लगातार सिकुड़ते जाएंगे। यानी निशाना केवल रियाद नहीं, बल्कि उसकी ऊर्जा-आधारित आर्थिक शक्ति और पूरी वैश्विक आपूर्ति शृंखला है।

साथ ही हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर मोखा बंदरगाह और रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। इसके बाद हनीश द्वीपों पर भी उनकी पकड़ की खबरें सामने आईं। पेरिम द्वीप बाब-अल-मंदब के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का अर्थ लाल सागर में आने-जाने वाले जहाजों पर दबाव बनाने की क्षमता है। यह घटनाक्रम महज यमन के भूभाग की लड़ाई नहीं है। बाब-अल-मंदब लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री द्वार है। ऐसे में हूतियों की बढ़त सऊदी अरब के पश्चिमी तट, उसके तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार—तीनों पर एक साथ दबाव पैदा करती है।

देखा जाये तो यहां सऊदी अरब की कूटनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठते हैं। पाकिस्तान के साथ ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के जरिए रियाद ने सामूहिक सुरक्षा का एक नया ढांचा खड़ा किया है, जिसमें एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना गया है। लेकिन यदि सऊदी अरब ने भारत के साथ सुरक्षा और सामरिक सहयोग को और अधिक गहरा किया होता, तो मौजूदा संकट में उसके पास एक अतिरिक्त और महत्वपूर्ण साझेदार हो सकता था। भारत और सऊदी अरब के बीच पहले से ही रक्षा, नौसैनिक सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यास मौजूद हैं। दूसरी ओर, भारत के ईरान और इजराइल के साथ भी ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में भारत की दोनों पक्षों के साथ संवाद की क्षमता सऊदी अरब के लिए एक अतिरिक्त कूटनीतिक और सामरिक सहारा बन सकती थी। फिर भी मौजूदा संकट यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या रियाद ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों का दायरा जरूरत से ज्यादा सीमित कर दिया है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि रियाद के सामने अब विकल्प कम हैं। सऊदी अरब के पास आधुनिक हथियार, विशाल आर्थिक संसाधन और मजबूत वायु रक्षा है, लेकिन हूतियों की रणनीति ने युद्ध को मुश्किल बना दिया है। छोटे ड्रोन, मिसाइल, समुद्री दबाव और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले के जरिए अपेक्षाकृत कमजोर पक्ष भी भारी रणनीतिक लागत पैदा कर सकता है।

वैसे रियाद अब तक संयम बरतता रहा है। लेकिन पाइपलाइन पर हमला, लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले तथा बाब-अल-मंदब के आसपास हूतियों की बढ़त इस संयम की सीमा को चुनौती दे रहे हैं। अमेरिकी सहायता भी बढ़ी है। एक सौ से अधिक अमेरिकी सैन्य सलाहकार सऊदी अरब में खुफिया सूचना और लक्ष्य निर्धारण में सहायता कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा है। यही सबसे बड़ा रणनीतिक पेच है। सऊदी अरब पीछे हटता है तो हूतियों का दबदबा बढ़ सकता है; वह व्यापक सैन्य कार्रवाई करता है तो संघर्ष लंबा और अधिक विनाशकारी हो सकता है। विशेषज्ञों ने भी चेताया है कि बड़े पैमाने पर सऊदी जवाबी कार्रवाई संघर्ष को फिर एक खुले और लंबे युद्ध में बदल सकती है।

इसलिए मक्का की चेतावनी को केवल एक सुरक्षा अलर्ट समझना भारी भूल होगी। इसके पीछे एक बहुत बड़ा खेल दिखाई दे रहा है। जिसके तहत सऊदी शहरों पर दबाव बनाया जा रहा है, तेल की नस पर हमला हो रहा है और बाब-अल-मंदब जैसे समुद्री द्वार पर पकड़ हासिल की जा रही है। होर्मुज और बाब-अल-मंदब दोनों पर संकट गहराया तो इसका असर केवल सऊदी अरब या यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल, समुद्री व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा।

बहरहाल, मक्का तक पहुंचा खतरा इसलिए इस संघर्ष का नया मोड़ है। अब सवाल यह है कि सऊदी अरब कब तक अपनी सीमाओं, पवित्र स्थलों, तेल ढांचे और समुद्री हितों पर एक साथ पड़ते इस चौतरफा दबाव को सहन करेगा।

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  Sports

ODI वर्ल्ड कप 2027 का पूरा शेड्यूल जारी: इस तारीख को भारत-पाक महामुकाबला; ऑस्ट्रेलिया से होगा टीम इंडिया का पहला मैच 

ICC ODI World Cup 2027 का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है। क्रिकेट के इस सबसे बड़े वनडे टूर्नामेंट का आयोजन दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में किया जाएगा। टूर्नामेंट की शुरुआत 2 अक्टूबर 2027 से होगी, जबकि खिताबी मुकाबला 21 नवंबर 2027 को जोहान्सबर्ग में खेला जाएगा। ICC के मुताबिक टूर्नामेंट में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 57 मुकाबले खेले जाएंगे।

टीम इंडिया अपने अभियान की शुरुआत 7 अक्टूबर को केप टाउन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगी। इसके बाद क्रिकेट फैंस को सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबले का इंतजार रहेगा, जब 10 अक्टूबर को जोहान्सबर्ग में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे।

भारत-पाकिस्तान महामुकाबला कब?

ODI वर्ल्ड कप 2027 में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला 10 अक्टूबर 2027 को खेला जाएगा।

  • तारीख: 10 अक्टूबर 2027
  • मुकाबला: भारत vs पाकिस्तान
  • वेन्यू: जोहान्सबर्ग
  • टूर्नामेंट: ICC Men's ODI World Cup 2027

यह मुकाबला ग्रुप स्टेज में खेला जाएगा।

Thu, 01 Oct 2026 22:17:19 +0530

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