अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’ शुरू: ईरान से खाड़ी देशों की सभी उड़ानें रद्द, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों की 6 मिसाइलें रोकीं
दुबई/रियाद। ईरान से खाड़ी देशों के लिए संचालित उड़ानें गुरुवार को रद्द कर दी गईं। यह घटनाक्रम ऐसे समय देखने को मिला जब ईरानी एयरलाइंस के साथ काम करने वाली दुनिया भर की कंपनियों के लिए अमेरिका की तय समयसीमा समाप्त हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे अपनी नई आर्थिक रणनीति का “इकोनॉमिक डी-डे” बता चुके हैं। उधर, सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है। सऊदी अरब ने अपने बयान में बताया है कि उसने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया है।
ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी दबाव बढ़ा
प्रतिबंधों के तहत केवल ईरानी कंपनियों को निशाना बनाने के बजाय उन तीसरे देशों की कंपनियों पर भी निशाना है, जो ईरानी कंपनियों के साथ कारोबार करती हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दुनिया भर की कंपनियों को 23 सितंबर तक ईरानी एयरलाइंस के साथ कारोबार बंद करने का समय दिया था। वॉशिंगटन का घोषित उद्देश्य ईरान के पूरे वैश्विक नागरिक विमान बेड़े को उड़ान भरने से रोकना है। ट्रंप ने पिछले महीने इस रणनीति की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी नियंत्रण वाले फ्रांस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले से करते हुए इसे इकोनॉमिक डी-डे नाम दिया है।
खाड़ी देशों की उड़ानों पर असर
अमेरिकी समयसीमा समाप्त होने के बाद ईरान से दुबई सहित खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख गंतव्यों के लिए उड़ानों पर असर दिखाई दिया। संयुक्त अरब अमीरात के लिए सभी उड़ानें आधी रात से ही रोक दी गईं। हालांकि, किसी खाड़ी देश ने तत्काल सार्वजनिक रूप से यह घोषणा नहीं की कि उसने अमेरिकी आदेश के तहत ईरानी उड़ानें बंद की हैं। गुरुवार को दुबई और अबूधाबी हवाईअड्डों की वेबसाइटों पर ईरान से आने या वहां जाने वाली कोई उड़ान दिखाई नहीं दी। ईरान की दो एयरलाइंस किश्म एयर और वारेश एयर की वेबसाइटों पर भी यूएई की उड़ानों को रद्द बताया गया है।
ईरान की पड़ोसी देशों को चेतावनी
बता दें ईरान ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि यदि उसके पड़ोसी देश अमेरिकी उड़ान प्रतिबंधों का पालन करते हैं तो वह जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इसी दौरान सऊदी अरब ने बताया कि उसने हूती लड़ाकों की ओर से दागी गई छह बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया है। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता संघर्ष इस महीने व्यापक मध्य-पूर्व युद्ध में एक प्रमुख मोर्चे के रूप में उभरा है। अमेरिका नई रणनीति में ईरान पर सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक और वित्तीय दबाव बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
Trump Administration Media Row: व्हाइट हाउस में फिर मिलेगी पत्रकारों को एंट्री, कोर्ट ने रद्द किया ट्रम्प का आदेश
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच चल रही खींचतान में गुरुवार को एक नया और अहम मोड़ आ गया है। अमेरिकी संघीय न्यायाधीश टिमोथी केली ने ट्रंप प्रशासन को कड़ा निर्देश देते हुए सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश देने का आदेश जारी किया है।
अदालत ने अपने शुरुआती फैसले में माना कि इन तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की पहुंच रोकना अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत मिले प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। यह पूरा मामला पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन द्वारा अचानक इन संस्थानों के पत्रकारों के हार्ड प्रेस बैज निष्क्रिय करने और उनकी व्हाइट हाउस में एंट्री बैन करने के फैसले से जुड़ा हुआ है।
18 सितंबर को ट्रंप ने की थी बैन की घोषणा, बिना प्रक्रिया कार्रवाई का आरोप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया के माध्यम से सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। ट्रंप का आरोप था कि ये संस्थान गलत और झूठी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इस घोषणा के तुरंत बाद इन संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास निष्क्रिय कर दिए गए।
इसके खिलाफ सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने संघीय अदालत में मुकदमा दायर करते हुए दलील दी कि प्रशासन ने उनका प्रेस पास छीनने से पहले किसी भी उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और यह कार्रवाई पूरी तरह भेदभावपूर्ण है।
न्यायाधीश टिमोथी केली के सवाल और वकीलों की तीखी बहस
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने प्रशासन की इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि क्या पत्रकारों के पास रद्द करने से पहले नियमानुसार कोई उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।
सुनवाई के दौरान ही जज ने संकेत दे दिया था कि प्रशासन ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। मीडिया संस्थानों के वकील थियोडोर बुट्रॉस ने अदालत में तुरंत प्रेस पास बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि यह सब वैचारिक मतभेदों और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग से बौखलाकर किया गया है। वहीं, दूसरी ओर न्याय विभाग ने अदालत में दलील दी कि व्हाइट हाउस में प्रवेश बिना शर्त का कोई असीमित अधिकार नहीं है।
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