Maharashtra: देवेंद्र फडणवीस किसानों के मुद्दे सुलझाएं या EC के प्रवक्ता बनें, कांग्रेस नेता का तंज
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राहुल गांधी की आलोचना किए जाने पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने रविवार को कहा कि अगर वह सूखा प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते, तो उन्हें इस्तीफा देकर निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता के तौर पर काम करना चाहिए। फडणवीस ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोप को निराधार बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर करने और ‘‘अराजकता तथा अव्यवस्था’’ के बीज बोने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। फडणवीस ने निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि तीनों निर्वाचन आयुक्तों ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
मुख्यमंत्री के बयान पर सपकाल ने सवाल किया, ‘‘क्या फडणवीस निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता हैं? कांग्रेस द्वारा निर्वाचन आयोग से पूछे गए सवालों का जवाब वह क्यों दे रहे हैं?’’ अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के बाद कांग्रेस और कई अन्य दलों तथा संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। खबर में दावा किया गया था कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 बार एसआईआर प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के तरीके पर औपचारिक आपत्ति जताई थी।
सपकाल ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों से चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा केंद्र में आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सवालों का तथ्यों के साथ जवाब देने के बजाय, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राहुल गांधी की व्यक्तिगत आलोचना कर रहे हैं। सपकाल ने कहा, ‘‘अगर निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए हैं, तो आयोग को उनका जवाब देना चाहिए।
निर्वाचन आयोग का बचाव करने के बजाय मुख्यमंत्री को महाराष्ट्र की जनता से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर वह इन मुद्दों का समाधान नहीं कर सकते, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर पूर्णकालिक रूप से निर्वाचन आयोग के प्रवक्ता के तौर पर काम करना चाहिए।
भारत का उत्थान बिना टकराव और विघटन के समावेशी विकास पर आधारित: Rajnath Singh
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत एक ऐसी सभ्यतागत शक्ति है, जिसका उदय टकराव या व्यवधान के बजाय समावेशी विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य बिना किसी विघटन के आगे बढ़ना और संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव लाना है। ‘एनडीटीवी’ के रक्षा सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान सिंह ने यह भी कहा कि जो राष्ट्र प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा, उसे युद्ध के मैदान में बढ़त हासिल होगी।
उन्होंने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति के साथ-साथ सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए उठाए गए कुछ कदमों को भी रेखांकित किया। विश्व व्यवस्था में भारत की स्थिति पर सिंह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हम एक सभ्यतागत शक्ति हैं। हमारे उत्थान का उद्देश्य किसी दूसरे देश को पीछे छोड़ना या मौजूदा व्यवस्था को खत्म करना नहीं है; बल्कि यह सामूहिक और समावेशी विकास के बारे में है।
हमारा लक्ष्य है - बिना विघटन के उत्थान, संघर्ष के बिना सकारात्मक बदलाव।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं, जहां भारत आगे बढ़े और पूरी दुनिया भी हमारे साथ आगे बढ़े।’’ रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आज का युद्ध केवल सैनिक बनाम सैनिक का मामला नहीं है, बल्कि यह कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इसमें जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर क्षेत्र, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सूचना युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन और सटीक मारक हथियार शामिल हैं।
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