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SIR पर Election Commission के कदम नाकाफी, Congress ने उठाए सवाल

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 27 सितंबर कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े आयोग के प्रस्तावित कदम इस बात को स्वीकार करने के समान हैं कि यह कवायद ‘‘बुरी तरह विफल’’ रही है। पार्टी ने कहा कि हटाए गए या जोखिम वाले मतदाताओं के लिए ‘‘टुकड़ों में’’ उठाए गए कदम बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने की समस्या को दूर करने में बहुत कम मदद करेंगे। कांग्रेस महासचिव (संचार) प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से शनिवार को जारी प्रेस नोट की असलियत सामने आ चुकी है और यह ‘‘नुकसान की भरपाई की बेताब कोशिश है, जो कुछ भी स्पष्ट नहीं करती और सब कुछ छिपाती है।’’ रमेश ने निर्वाचन आयोग के इस प्रेस नोट को ‘‘पूरी तरह निरर्थक’’ बताते हुए उसके खिलाफ ‘‘एक और करारा जवाब’’ जारी किया।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर प्रस्तावित कदम इस बात की स्वीकारोक्ति हैं कि यह कवायद ‘‘विफल’’ रही है। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए अपने बयान में कहा, ‘‘हटाए गए या हटाए जाने के जोखिम वाले मतदाताओं के लिए टुकड़ों में किए गए ये उपाय बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित किए जाने की समस्या को दूर करने में बहुत कम मदद करेंगे। 5.43 करोड़ मतदाता जिनके नाम हटाए जाने का खतरा है, उनके घर अब बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) जाएंगे।

ऐसा घर-घर जाकर गणना के चरण के दौरान ही किया जाना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि असल में ये दौरे बहुत कम और कभी-कभार ही हुए थे। ऐसे दौरों के दूसरे दौर का वादा करने का क्या मतलब है, जिनके होने की संभावना ही नहीं है? जिस प्रक्रिया को एक बार ठीक से नहीं किया गया, उसे दोहराने के तर्क पर जरूर विचार किया जाना चाहिए।’’ कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि एसआईआर प्रक्रिया का क्या औचित्य है, जो ‘‘सार्वजनिक संसाधनों की भारी बर्बादी’’ और हर नागरिक के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘एसआईआर के तीनों चरण में अब तक हटाए गए करीब 14 करोड़ मतदाताओं के लिए निर्वाचन आयोग का जवाब है कि उन्हें अब अपने नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के पास नए सिरे से आवेदन करना होगा। पहले बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करो और फिर मतदाताओं से खुद को दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए कहो।’’ उन्होंने कहा कि हाशिये पर मौजूद मतदाताओं के नाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाने के लिए लक्षित तरीके से हटाए जाने के व्यापक सबूत हैं और निर्वाचन आयोग ने इस आरोप का कोई जवाब नहीं दिया है। रमेश ने कहा, ‘‘मतदाता सूची तैयार करने में ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर की केंद्रीय भूमिका, उसके द्वारा पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और ईआरओ के अधिकारों को अवैध रूप से दरकिनार किए जाने के आरोपों से इनकार नहीं किया गया है।

इन मुद्दों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम प्रस्तावित नहीं किया गया है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने यह प्रमाणित करने के लिए एक समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है कि सॉफ्टवेयर ‘‘अधिनियमों और नियमों के अनुरूप’’ है। उनके मुताबिक, यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि एसआईआर के दौरान पूरे देश में इस्तेमाल किए जाने के बाद इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। रमेश ने कहा, ‘‘हमारे पास स्पष्ट सबूत हैं कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ईसीआईनेट का इस्तेमाल किया गया और ईआरओ के फैसलों को दरकिनार किया गया, जो गैरकानूनी है।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि वह गोवा में इस मुद्दे का समाधान कर रहा है, जहां यह मामला सामने आया। लेकिन पश्चिम बंगाल का क्या, जहां यही काम कहीं बड़े पैमाने पर हुआ?’’ उन्होंने सवाल किया कि उन अन्य सभी राज्यों का क्या होगा, जहां पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के लिए ईआरओ के फैसलों को दरकिनार किया गया हो। कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने अब तक स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि मतदाता सूची पर अंतिम अधिकार ईआरओ का ही होगा, जैसा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में निर्धारित है।

कांग्रेस नेता की ये टिप्पणियां ऐसे वक्त आई हैं, जब एक दिन पहले निर्वाचन आयोग ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे और मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि ईसीआईनेट का संचालन कौन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची तैयार करने में एआई के व्यापक इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता की कमी चिंताजनक है।

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Congress 29 सितंबर को Delhi में करेगी Dalit Adivasi Swabhiman Baithak

कांग्रेस ने रविवार को मोदी सरकार पर ‘‘दलित विरोधी’’ और ‘‘आदिवासी विरोधी’’ होने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी उत्तराखंड में पिछले महीने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद किए गए ‘‘शुद्धीकरण’’ कार्यक्रम को लेकर 29 सितंबर को ‘दलित-आदिवासी स्वाभिमान बैठक’ आयोजित करेगी। यह बैठक कांग्रेस अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) सांसद मंच की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विभागों के सहयोग से कांस्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में आयोजित की जाएगी। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा, ‘‘बैठक में अगस्त में उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे जी की जनसभा के बाद हुए शुद्धीकरण कार्यक्रम पर चर्चा की जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि पूरे देश में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उल्लंघन हुआ है।

रवि ने कहा कि बैठक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगी। उन्होंने बताया कि बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के सभी कांग्रेस सदस्य, पूर्व सांसद, कांग्रेस शासित राज्यों के मंत्री, विधायक और एआईसीसी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। रवि ने कहा कि यह बैठक मुख्य रूप से हल्द्वानी में खरगे की जनसभा के बाद किए गए शुद्धीकरण कार्यक्रम पर चर्चा के लिए बुलाई जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह केवल खरगे जी का अपमान नहीं था, बल्कि पूरे एससी/एसटी समुदाय का अपमान था।’’ रवि ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज नहीं की। उन्होंने कहा कि सांसदों के संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन करने के बाद हल्द्वानी में प्राथमिकी दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा शासित राज्य में यही हो रहा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस घटना का समर्थन कर रही है, क्योंकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कथित तौर पर ‘‘शुद्धीकरण’’ कार्यक्रम करने वाले राम सेना के सदस्यों का खुलकर समर्थन किया।

रवि ने दावा किया कि भाजपा जानबूझकर जाति के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करना चाहती है। कांग्रेस नेताओं मनोज कुमार, तनुज पुनिया, कर्मवीर बौद्ध, भजन लाल जाटव और विक्रांत भूरिया के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रवि ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी), गृहमंत्री (अमित शाह) और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (पुष्कर सिंह धामी) ने अब तक इस घटना की निंदा नहीं की है।’’ कुमार ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘‘दलित विरोधी’’ और ‘‘आदिवासी विरोधी’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार में दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार लगातार बढ़ रहे हैं।

उन्हें पीटा जाता है, अपमानित किया जाता है। इसलिए मेरा देश के सभी दलित-आदिवासी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से आग्रह है कि वे 29 तारीख को होने वाली दलित-आदिवासी सम्मान बैठक में शामिल हों और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करें।’’ बैठक में देशभर में एससी और एसटी समुदायों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की उन घटनाओं पर भी चर्चा होगी, जो नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के उल्लंघन से जुड़ी हैं। मंच ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को आत्मसम्मान, गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का अधिकार देता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के नागरिक भी शामिल हैं।

एससी/एसटी समुदायों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के लगातार उल्लंघन पर चिंता जताते हुए मंच ने कहा कि इन समुदायों से आने वाले जनप्रतिनिधियों को संसद, राज्य विधानसभाओं और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से भेदभाव एवं सामाजिक पूर्वाग्रह के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए। यह पहल एससी, एसटी, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और अल्पसंख्यक विभागों के राष्ट्रीय समन्वयक एवं झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के राजू, कांग्रेस एससी विभाग के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और झाबुआ से विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के सहयोग से आयोजित की जा रही है। हल्द्वानी में आठ अगस्त को खरगे की जनसभा के बाद 11 अगस्त को रामलीला मैदान में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर ‘‘शुद्धीकरण यज्ञ’’ किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नयी दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में इस घटना की आलोचना की थी और ‘‘शुद्धीकरण’’ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

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अब बिहार वॉलीबॉल की जिम्मेदारी भी रूडी के कंधों पर, राजीव प्रताप रूडी चुने गए वॉलीबॉल एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष

Rajiv Pratap Rudy News: सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी को वॉलीबॉल एसोसिएशन ऑफ बिहार का नया अध्यक्ष चुना गया है, जबकि रोहित सिंह को नए सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. पटना क्लब में आयोजित एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा में यह अहम निर्णय लिया गया. Sun, 27 Sep 2026 22:16:50 +0530

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