UP Rain: मौसम तंत्र कमजोर पड़ने से भारी बारिश थमी, नदियां उफान पर
उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही अत्यधिक बारिश से रविवार को कुछ राहत मिली। हालांकि राज्य और पड़ोसी उत्तराखंड में लगभग तीन दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ और जलभराव जैसे हालात पैदा हो गए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, जिस प्रभाव के कारण पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही थी, वह उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा और सुबह 5.30 बजे कमजोर होकर एक कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल गया।
मौसम प्रणाली के कमजोर होने की यह खबर तब आई है जब उत्तर प्रदेश में लगभग तीन दिनों तक हुई भारी से बहुत भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया और फसलों को नुकसान पहुंचाया। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने अपने दैनिक जलस्तर बुलेटिन में कहा कि घाघरा और राप्ती नदियां कई निगरानी केंद्रों पर उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर, सुबह आठ बजे घाघरा नदी 106.14 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जो इसके 106.07 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है।
रविवार रात तक इसके जलस्तर के और बढ़कर 106.55 मीटर तक पहुंचने का अनुमान है। अयोध्या में, नदी का जलस्तर 92.39 मीटर था, जबकि चेतावनी का स्तर 91.73 मीटर है, लेकिन इसके 92.85 मीटर तक बढ़ने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
बलरामपुर में नदी का जलस्तर 104 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी का स्तर 103.62 मीटर है। रविवार शाम तक इसके और बढ़ने का अनुमान है। सीडब्ल्यूसी ने बताया कि रविवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटे के दौरान नदी घाटियों में व्यापक बारिश दर्ज की गई।
भारी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर जलभराव हो गया है। खबरों के मुताबिक, उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे पर सोनिक टोल प्लाजा के पास बारिश का पानी जमा हो गया था, जिसे निकालने के लिए पंप का इस्तेमाल किया गया। इस बीच गंगा एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट मैनेजर आर.एस. मिश्रा ने कहा कि बहुत ज्यादा बारिश के बावजूद एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू रहा और यातायात सामान्य रूप से चलता रहा।
मिश्रा ने कहा कि एजेंसी मानसून के बाद लाइन को दूसरी जगह लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एक्सप्रेसवे की टीम सुरक्षित और सुचारु यातायात सुनिश्चित करने के लिए लगातार नज़र रख रही है। सूचना के मुताबिक, लखनऊ में इकाना स्टेडियम के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जबकि कई चौराहों पर पानी भर गया।
बख्शी का तालाब इलाके में खेत पानी में डूब गए और बारिश व तेज हवाओं से फसलें ज़मीन पर गिर गईं। इससे पहले, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली और राज्य के कई अन्य हिस्सों में भारी बारिश हुई। बारिश के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चलीं, जिससे कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए और सड़कें, गलियां और गांव पानी में डूब गए।
कानपुर-इटावा हाईवे के भी लगभग 200 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचने की खबर है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को खत्म हुए 24 घंटे में राज्य में 45.1 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 1.8 मिमी होती है।
साहित्यकार Om Prakash Jha बोले, राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश देती हैं दीनदयाल की पुस्तकें
सुपरिचित साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश झा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लिखित ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ एवं ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ पुस्तकें उत्कृष्ट ऐतिहासिक रचनाएं हैं। दोनों पुस्तकें कलेवर में भले ही छोटी हैं, लेकिन इसका संदेश महत्वपूर्ण है कि राष्ट्र की एकता सर्वोपरि है। इन्हें शैक्षिक पाठ्यक्रमों में शामिल करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों में चरित्र-निर्माण, राष्ट्रबोध और नैतिक मूल्य प्रखर हो सकें।
वे अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से संबद्ध इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती द्वारा शनिवार को नई दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लिखित ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ एवं ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ पुस्तकों पर आयोजित चर्चा में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
झा ने कहा कि दीनदयालजी द्वारा लिखित ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ पुस्तक महान दार्शनिक आदिशंकराचार्य के प्रेरक जीवन पर आधारित है। देश की विविधता में एकता स्थापित करने के लिए शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार प्रसिद्ध मठों की स्थापना की। जब देश राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ था, तब शंकराचार्य ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के माध्यम से पूरे भारत को जोड़ा। वहीं, ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ पुस्तक में चाणक्य के कुशल मार्गदर्शन और चन्द्रगुप्त के अटूट राष्ट्रप्रेम को दर्शाया गया है।
सुपरिचित लेखक चन्दन कुमार ने कहा कि ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ पुस्तक समाज को एक सूत्र में पिरोने का एक शाश्वत और जीवंत दस्तावेज है। वहीं, ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ पुस्तक में चाणक्य चन्द्रगुप्त से स्पष्ट कहते हैं कि राष्ट्रहित के सामने राजा का कोई मूल्य नहीं है। राजा राष्ट्र के लिए होता है, राष्ट्र राजा के लिए नहीं। दीनदयालजी ने दोनों पुस्तकों में राष्ट्र को सशक्त करने पर बल दिया है।
इस पुस्तक-चर्चा का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के मध्य क्षेत्र साहित्य केंद्र के संयोजक वरुण कुमार ने किया। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, विकास आनंद, संदीप द्विवेदी, शिवनारायण एवं इन्दल कुमार ने सहभागिता की।
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