केरल में Priyanka Gandhi और रमेश चेन्निथला के काफिले को BJYM कार्यकर्ताओं ने दिखाए काले झंडे
केरलम में रविवार को अलग-अलग घटनाओं में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो)के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा और राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के काफिलों को काले झंडे दिखाए। पुलिस ने यह जानकारी दी। इससे एक दिन पहले, कोल्लम जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया था।
पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर जब प्रियंका गांधी का काफिला थिरुवंबाडी के पास थंबलमन्ना से गुजर रहा था, तब भाजयुमो कार्यकर्ताओं के एक समूह ने काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने जल्द ही प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया, जिसके बाद प्रियंका का काफिला बिना रुके आगे बढ़ गया। अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज किए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं, भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने कुट्टियाडी के पास चेन्निथला के काफिले को रोक दिया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारी एक संकरे पुल के पास एकत्र हुए, काले झंडे दिखाए और चेन्निथला के खिलाफ नारेबाजी की। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर वहां से हटाए जाने तक काफिला कुछ मिनट के लिए रुका रहा।
भाजयुमो ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ये प्रदर्शन शनिवार को शाह के काफिले के कोल्लम से कुंडरा की ओर जाते समय युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा काले झंडे दिखाये जाने के बाद किए। शाह कोल्लम जिले में कई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आए थे। इस बीच, ऐसी भी खबरें हैं कि भाजपा ने शाह के दौरे के दौरान सुरक्षा में चूक का आरोप लगाते हुए राज्य पुलिस प्रमुख के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है।
वांगचुक ने सरकार को 2 अक्टूबर की डेडलाइन दी:कहा- लद्दाख के मुद्दे पर जरूरी कदम नहीं उठाए गए, छठी अनुसूची पर भी प्रगति नहीं; प्रदर्शन करेंगे
लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर सोनम वांगचुक ने 2 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी है। उन्होंने को दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले में बहुत कम प्रगति हुई है। वांगचुक ने यह बात लेह में पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद NSA के तहत हिरासत में लिए जाने के एक साल पूरे होने पर कही। इस हिंसा में पुलिस कार्रवाई के दौरान चार लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। जांच और जवाबदेही पर सवाल, 2 बातें… जांच पर सवाल: सोनम वांगचुक ने पूछा कि उन लद्दाख हिंसा की जांच के लिए बनाए गए आयोग की रिपोर्ट का क्या हुआ। अधिकारी, उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री इन कार्रवाइयों के आदेश के बारे में कब जवाब देंगे। सलाह के बिना नीतियां बन रहीं: वांगचुक ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों से सलाह लिए बिना नीतिगत फैसले पहले ही किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जमीन, औद्योगिक नीति, पर्यटन नीति या स्थानीय शासन से जुड़े सभी नीतिगत फैसले पहले ही किए जा रहे हैं। अगर ये सब अभी तय कर दिया गया तो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए क्या बचेगा?” गृह मंत्रालय के साथ बैठक 9 सितंबर को लद्दाख की उप-समिति और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच बैठक हुई थी। इसमें एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता शामिल हुए थे। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के मुताबिक, दोनों पक्षों ने स्थानीय आबादी के हितों की रक्षा के लिए संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष प्रावधान शामिल करने पर चर्चा की। छठी अनुसूची की मांग का उद्देश्य लद्दाख के स्थानीय लोग और नागरिक संगठन, जैसे लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस, संविधान की छठी अनुसूची को लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लद्दाख की 97% से ज्यादा जनजातीय आबादी की पहचान, उनकी अनूठी संस्कृति, भाषा और पर्यावरण को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना है। छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त जिला परिषदें स्थानीय लोगों को ये अधिकार देती हैं- जमीन की सुरक्षा: बाहरी लोगों को जमीन खरीदने या कब्जा करने से रोकने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं। संस्कृति की सुरक्षा: शादी, तलाक, विरासत और स्थानीय परंपराओं पर अपने नियम बनाए जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन: स्थानीय लोग अपने क्षेत्र के विकास और संसाधनों से जुड़े फैसले खुद ले सकते हैं। सितंबर 2025 में आंदोलन के दौरान हिंसा भड़की लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने सितंबर 2025 में आंदोलन किया था। इस दौरान 24 सितंबर को लेह में हिंसा हो गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। हिंसा के दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे। उन्हें 14 मार्च को रिहा किया गया था। वांगचुक का लद्दाख में जन्म, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी। 9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ पोस्ट डिलीट करेंगे CJP नेता, दीपके, सौरव और रांका को समन भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया की मानहानि याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट के सामने CJP प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने भाटिया के खिलाफ किए गए AI से बने विवादित पोस्ट हटाने पर सहमति जताई। दोनों पोस्ट 24 घंटे में हटाए जाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
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