फरीदाबाद में ऑटो, कैब चालक द्वारा अधिक किराया मांगने पर क्या करें? एडवोकेट नें बताया कानूनी तरीका
Faridabad News: ऑटो या कैब चालक तय किराए से ज्यादा पैसे मांगे तो क्या करें. इस पर लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि देखिए, सबसे पहले आपको धैर्य बनाए रखना चाहिए. कोशिश करनी चाहिए कि आपके और चालक के बीच किसी तरह का लड़ाई-झगड़ा न हो. जब आप कैब या कोई भी वाहन बुक करते हैं, तो आपके पास उसकी सारी डिटेल होती है. उसमें लिखा होता है कि आपने लोकेशन कहां से कहां तक डाली है और आपको कितना पैसा देना है. ऐसे में आप चालक को बताएं कि हमने जब बुकिंग की थी, उस समय इतना किराया तय हुआ था और उसका रिकॉर्ड हमारे पास मौजूद है.
सीधी में सड़क को लेकर सियासी संग्राम, 5 किमी सड़क के लिए ग्रामीणों का प्रदर्शन, भाजपा-कांग्रेस पर निशाना
जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर खड्डी खुर्द से बगैहा टोला तक 5 किलोमीटर लंबी बदहाल सड़क को बनवाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इस रास्ते की जर्जर हालत से परेशान ग्रामीण पिछले 13 दिनों से बारिश और कीचड़ के बीच धरना स्थल पर डटे हुए हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू भी ग्रामीणों के साथ मिलकर सड़क निर्माण की इस हक की लड़ाई में दिन-रात साथ खड़ी नजर आ रही हैं।
धरना स्थल पहुंचने में फंसी सिंगरौली महापौर की गाड़ी
अब इस जनआंदोलन में आम आदमी पार्टी की भी एंट्री हो गई है। सिंगरौली महापौर और ‘आप’ की राष्ट्रीय सदस्य रानी अग्रवाल पार्टी नेताओं के साथ आंदोलनकारियों से मिलने धरना स्थल पहुंचीं। हैरान करने वाली बात यह रही कि रास्ते में फैली कीचड़ के कारण खुद महापौर की गाड़ी फंस गई, जिसने सड़क की खस्ताहाली की जमीनी हकीकत बयां कर दी। इसके बाद आप नेताओं ने ग्रामीणों को अपना पूरा समर्थन दे दिया।
प्रशासन को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों के बीच पहुंचीं महापौर रानी अग्रवाल और आप नेताओं ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक हफ्ते के भीतर सड़क निर्माण का काम धरातल पर शुरू नहीं कराया गया, तो इस आंदोलन को उग्र किया जाएगा। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जिला कलेक्टोरेट के घेराव की तैयारी करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों पर बरसे
इस सियासी ड्रामे के बीच आप नेताओं ने क्षेत्र के वर्तमान और पूर्व भाजपा-कांग्रेस जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि लंबे समय से ग्रामीण इस नरकीय स्थिति को झेल रहे हैं, लेकिन जन प्रतिनिधियों की उदासीनता की वजह से आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई। फिलहाल लीला साहू के नेतृत्व में ग्रामीणों का सत्याग्रह जारी है और हर कोई प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
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