पूर्व PM Manmohan Singh के जीवन पर Pradhanmantri Sangrahalaya में विशेष प्रदर्शनी शुरू
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अर्थशास्त्री, विद्वान और राजनेता के रूप में शानदार करियर को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी शनिवार को उनकी 94वीं जयंती पर प्रधानमंत्री संग्रहालय में शुरू की गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने कहा कि ‘डॉ. मनमोहन सिंह: विद्वत्ता से जनसेवा तक’ शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी में उनके योगदान, विरासत और सार्वजनिक जीवन की यात्रा को दर्शाया गया है।
पीएमएमएल ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शनी सिंह के अर्थशास्त्री, विद्वान और राजनेता के रूप में उनके विशिष्ट सफर को दर्शाती है। इसमें अकादमिक क्षेत्र, प्रमुख आर्थिक संस्थानों, वित्त मंत्रालय और देश के सर्वोच्च पद पर उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया गया है। बयान में कहा गया कि प्रदर्शनी का मुख्य केंद्र भारत की आर्थिक नीतियों और सुधारों को आकार देने, समावेशी विकास को बढ़ावा देने, संस्थानों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने में सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह प्रदर्शनी यहां तीन मूर्ति हाउस कॉम्पलेक्स में 30 सितंबर तक आयोजित होगी।
S Jaishankar ने UNGA में बहुध्रुवीय दुनिया का किया आह्वान, वैश्विक शांति और सुधार पर दिया जोर
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व नेताओं से कहा कि बहुपक्षवाद में सुधार की जरूरत है क्योंकि शांति बनाए रखने में वैश्विक संस्थानों की असमर्थता प्रगति के लिए खतरा बन रही है और विकास की गति को धीमा कर रही है। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें उच्चस्तरीय सत्र की आम चर्चा में कहा, ‘‘हम अब बहुध्रुवीय दुनिया की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। 1945 के बाद की व्यवस्था अब नयी वास्तविकताओं के अनुरूप बदल रही है।
इस बदलाव के साथ सामंजस्य बिठाना, समायोजन करना और इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। आज हम जो बहुत-सी उथल-पुथल देख रहे हैं, उसका कारण इन्हीं कठिनाइयों में निहित है।’’ उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से विविधतापूर्ण दुनिया का अधिक लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ना रोका नहीं जा सकता। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘बहुलतावादी व्यवस्था में शांति के लिए संवाद की जरूरत होती है; व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श जरूरी होता है; पारदर्शी तरीके से फैसले लिए जाने चाहिए।
मानवता के बड़े हिस्से को इस प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। बहुपक्षवाद में सुधार की जरूरत का पक्ष दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है।’’ जयशंकर ने कहा कि नौवें दशक में प्रवेश कर रहा संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा इसके लिए प्रभावी सामूहिक कार्रवाई करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, जब हम यहां बैठक कर रहे हैं, तब भी संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं।
शांति बनाए रखने में असमर्थता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है और विकास की गति को भी धीमा कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वैश्वीकृत दुनिया में युद्ध के प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किए जाते हैं। संघर्ष से दूर स्थित देशों को भी बिना किसी गलती के इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। जो लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।
इस महासभा को वास्तविक स्थिति का सामना करना चाहिए।
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