ट्रम्प बोले- ईरान मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते:हमने लोहे की दीवार जैसी नाकाबंदी की, 2 दिन पहले ईरान ने जंग खत्म करने का प्लान बताया था
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि वे (ईरान) तुरंत होर्मुज इसलिए खोलना चाहते हैं। क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसा नहीं आ रहा है, क्योंकि उनकी कमाई होर्मुज स्ट्रेट से ही होती है। हमने वहां सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी कर दी। यह लोहे की दीवार जैसी है। दरअसल दो दिन पहले ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा था। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए। इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं। जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है। ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने भेजा था प्रस्ताव ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को 'पूरी तरह तबाह' कर सकता है। अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था। 28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। ----------------------------- यह खबर भी पढ़ें… ईरान बोला-फिर हमला हुआ तो युद्ध हिंद महासागर तक फैलेगा: इससे भारत-चीन पर असर ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया तो पश्चिम एशिया की जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
ब्रिटेन में भारतीय छात्रों में 20% कमी की आशंका:वजह- वीजा में सख्ती; ऐसा हुआ तो ब्रिटेन को सालाना ₹10 हजार करोड़ का घाटा
अब ब्रिटेन में भी भारतीयों छात्रों की संख्या में भारी कमी आने की आशंका है। अमेरिका में ट्रम्प राज में भारतीय छात्र मुश्किलें झेल रहे थे, लेकिन अब वैसे ही हालात ब्रिटेन में भी हो रहे हैं। सेंटर फॉर ग्लोबल हायर एजुकेशन (सीजीएचई) यूके की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2027 के मई-जून के दाखिलों (समर इनटेक) में भारतीय छात्रों की संख्या में 20% तक की कमी आ सकती है। इस साल सितंबर तक भारतीय छात्रों को लगभग 83 हजार स्टूडेंट वीजा मिले थे। अगले साल ये घटकर 63 हजार रहने की आशंका है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रिटेन की एंडी बर्नहैम सरकार की सख्त वीजा नीतियां हैं। ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा डेढ़ साल किया गया दरअसल, ब्रिटेन में राष्ट्रवादी पार्टियों जैसे रिफॉर्म यूके के तेजी से उभरने के कारण वीजा में सख्ती हो रही है। रिफॉर्म यूके के एजेंडे में स्थानीयों को रोजगार देना प्रमुख है। इसलिए बर्नहैम सरकार अमेरिका की तर्ज पर वीजा जारी करने में बैकग्राउंड चेक में सख्ती बरत रही है। ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा को दो साल से घटाकर अब डेढ़ साल कर दिया गया है। इससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के बाद ब्रिटेन में नौकरी और रिसर्च करने के लिए कम समय मिल पाएगा। भारत में ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटी के कैंपस खुले वीजा में सख्ती के बीच एक राहत भी है। ब्रिटेन की साउथैम्पटन, लिवरपूल, यॉर्क जैसी 9 यूनिवर्सिटी ने भारत में अपने कैंपस खोलने का ऐलान किया है। इनमें से कुछ में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि भारतीय छात्र यहां पर दाखिले लेकर ब्रिटेन के स्तर की पढ़ाई कर सकते हैं। आने वाले समय में ब्रिटेन की और यूनिवर्सिटी भी आएंगी। 4 सवाल-जवाब में समझें इसका असर क्या; जर्मनी-फ्रांस-आयरलैंड होंगे नए स्टडी हब भारतीय छात्रों की कमी से क्या असर? भारतीय छात्रों की संख्या में कमी से ब्रिटेन की इकोनॉमी को सालाना लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का घाटा झेलना पड़ेगा। लेकिन ब्रिटेन की सरकार सियासी हितों के साधने के फेर में वीजा नियम सख्त कर रही। छात्र अब किन देशों का रुख करेंगे? जर्मनी, आयरलैंड और फ्रांस में भारतीय छात्र रुख करेंगे। इन देशों में स्टूडेंट वीजा की अप्रूवल रेट 90% तक है। जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटी में फीस माफी है। वीजा मुद्दे का क्या हल हो सकता है? भारत-ब्रिटेन एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) में भारत की ओर से स्टूडेंट और प्रोफेशनल वीजा में रियायत का पॉइंट रखा गया था। ब्रिटेन की तत्कालीन ऋषि सुनक और फिर स्टारमर सरकारों ने अड़ियल रुख अपना कर वीजा प्रावधानों को हटा दिया था। डिपेंडेंट वीजा में भी दिक्कतें क्यों? ब्रिटेन में छात्रों और प्रोफेशनल्स को मिलने वाले डिपेंडेंट (आश्रितों) वीजा में भी सख्ती की गई है। यानी अब ब्रिटेन में आने वाले छात्र और प्रोफेशनल्स पत्नी, बच्चों और पैरेंट्स को साथ नहीं ला पाएंगे। इसके लिए 58 लाख रुपए सालाना की न्यूनतम वेतन सीमा रखी गई है। -------------------------------
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