जरूरत की खबर- धड़ल्ले से बिक रहा मिलावटी सॉस:डॉक्टर की सलाह- स्ट्रीट फूड न खाएं, घर पर ऐसे करें सॉस में मिलावट की पहचान
बीते एक महीने में यूपी और हरियाणा के तीन जिलों से मिलावटी सॉस पकड़े जाने की खबरें सामने आई हैं। यूपी के बागपत जिले के बड़ौत में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने नकली मेयोनीज और सॉस की सप्लाई करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा किया। यहां एक गोदाम से मिलावटी सॉस से भरे ड्रम बरामद किए गए। इसके अलावा रामपुर जिले में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जांच के दौरान स्ट्रीट वेंडर्स की खराब और मिलावटी सॉस जब्त की। वहीं हरियाणा के सोनीपत में CM फ्लाइंग टीम ने सॉस बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब 600 किलो मिलावटी सॉस नष्ट कराई। लगातार सामने आ रहे ये मामले बताते हैं कि बाजारों में बड़े पैमाने पर मिलावटी सॉस का इस्तेमाल हो रहा है, जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम मिलावटी सॉस के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली एस.एम. भारद्वाज, रिटायर्ड चीफ फूड एनालिस्ट, स्टेट फूड लैब, नई दिल्ली सवाल- रेड और ग्रीन सॉस में आमतौर पर किन चीजों की मिलावट की जाती है? जवाब- रेड-ग्रीन सॉस में लागत कम करने और लंबे समय तक स्टोर करने के लिए कई तरह की मिलावट की जाती है। जैसेकि– आरारोट, कॉर्न स्टार्च और केमिकल थिकनर की मिलावट सॉस को गाढ़ा करने के लिए होती है। साथ ही इसमें एडेड सॉल्ट और शुगर भी होता है। सवाल- मिलावटी सॉस खाने से किस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं? जवाब- मिलावटी सॉस में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल कलर, केमिकल फ्लेवर और हैवी प्रिजर्वेटिव्स सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इसे रोज खाने से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, उल्टी और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा मिलावटी सॉस खाने से इम्यूनिटी कमजोर होने, एलर्जी, स्किन रैश और हॉर्मोनल असंतुलन का खतरा भी बढ़ता है। लंबे समय तक इसके सेवन से लिवर और किडनी को नुकसान हो सकता है। साथ ही इससे बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और फोकस की कमी हो सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- सॉस में मिलावट की पहचान कैसे करें? जवाब- कुछ आसान संकेतों से सॉस में मिलावट की पहचान की जा सकती है। अगर सॉस का कलर ज्यादा चमकीला हो, खुशबू जरूरत से ज्यादा तेज या केमिकल जैसी हो, स्वाद अननेचुरल हो तो सतर्क हो जाएं। इसके अलावा सॉस में मिलावट के कुछ और भी संकेत हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- बाजार से सॉस खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- अगर आप भी बाजार से रेड या ग्रीन सॉस खरीदते हैं तो कुछ बातों का खास ख्याल रखें। थोड़ी-सी सावधानी आपको मिलावट के खतरे से बचा सकती है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या ब्रांडेड टोमैटो कैचअप खाना सुरक्षित है? जवाब- डॉ. अरविंद अग्रवाल बताते हैं कि अगर टोमैटो कैचअप किसी विश्वसनीय ब्रांड का हो, सही तरीके से पैक्ड हो और एक्सपायरी डेट के भीतर हो तो कभी–कभार सीमित मात्रा में खा सकते हैं। इसमें भी चीनी, नमक और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए इसे रोज खाना या ज्यादा मात्रा में खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है। सवाल- सॉस को कितने दिनों तक स्टोर किया जा सकता है? जवाब- डॉ. अरविंद अग्रवाल बताते हैं कि यह सॉस की क्वालिटी और स्टोरेज कंडीशन पर निर्भर करता है। पैक्ड सॉस खोलने के बाद आमतौर पर फ्रिज में 1 महीने तक सुरक्षित रहता है, बशर्ते उसे साफ चम्मच से निकाला जाए और ढक्कन अच्छी तरह बंद रखा जाए। वहीं घर के बने सॉस को फ्रिज में 3-5 दिन से ज्यादा स्टोर नहीं करना चाहिए। अगर रंग, गंध या स्वाद में बदलाव दिखे तो सॉस का इस्तेमाल न करें। सवाल- घर पर सॉस बनाने का सही और सुरक्षित तरीका क्या है? जवाब- इसके लिए ताजे टमाटर, मिर्च और अन्य सब्जियां लें। सामग्री को अच्छी तरह धोकर उबालें या पकाएं। फिर साफ मिक्सर में पीसें। स्वाद के लिए सीमित मात्रा में नमक, चीनी और विनेगर डालें। किसी भी तरह का फूड कलर या केमिकल प्रिजर्वेटिव न डालें। तैयार सॉस को ठंडा करके साफ, सूखी और एयरटाइट कांच की बोतल में रखें और हमेशा साफ चम्मच से ही निकालें। इसे फ्रिज में रखकर 5–7 दिनों के भीतर इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित है। सवाल- खराब या बासी सॉस के क्या संकेत हैं? जवाब- अगर सॉस का रंग बदल जाए, स्मेल और स्वाद अजीब हो तो इसका मतलब है कि वह खराब हो गया है। बोतल खोलते ही झाग/गैस निकलना, ढक्कन फूला होना या ऊपर फफूंद दिखना भी सॉस खराब होने के संकेत हैं। ऐसा सॉस बिल्कुल न खाएं। सवाल- मिलावटी फूड की शिकायत कहां और कैसे कर सकते हैं? जवाब- इसके लिए FSSAI की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-112-100 पर कॉल करें। साथ ही ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप के जरिए ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा अपने जिले के फूड सेफ्टी ऑफिसर या जिला प्रशासन से भी सीधे शिकायत कर सकते हैं। ध्यान रखें, शिकायत करते समय फूड आइटम का नाम, खरीद की जगह, बिल (अगर हो) और फोटो जैसी जानकारी दें, ताकि समय पर कार्रवाई हो सके। सवाल- फूड में मिलावट पाए जाने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- फूड में मिलावट पाए जाने पर FSSAI के नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसमें भारी जुर्माना लग सकता है। लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। अगर मिलावट से लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा हो तो दोषियों पर आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। गंभीर मामलों में जेल की सजा तक का प्रावधान है। ...................... जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- 900 किलो मिलावटी सौंफ बरामद: आपकी सौंफ में मिलावट तो नहीं, 5 तरीकों से चेक करें, खरीदते हुए 8 बातें ध्यान रखें मिलावटखोर सौंफ की चमक बढ़ाने के लिए आमतौर पर आर्टिफिशियल ग्रीन कलर की मिलावट करते हैं। इससे सौंफ ज्यादा फ्रेश और आकर्षक दिखाई देती है। इसके अलावा पुरानी या खराब सौंफ को नया दिखाने के लिए उसमें भी कलर मिलाते हैं। कुछ मामलों में वजन बढ़ाने के लिए धूल, रेत या अन्य सस्ते बीज भी मिलाते हैं। पूरी खबर पढ़िए...
Saraswati Puja 2026 : सरस्वती पूजा पर किताबें बंद रखने की परंपरा सही या गलत? क्या सच में इस दिन पढ़ने से नाराज होती हैं मां?
Saraswati Puja Ke Din Padhai: सरस्वती पूजा के दिन पढ़ाई करना गलत नहीं है. शास्त्रों में सिर्फ वेद पाठ की बात कही गई है, आम पढ़ाई की नहीं. यह दिन ज्ञान की शुरुआत और सम्मान का है. इसलिए पूजा के साथ-साथ पढ़ाई करना बिल्कुल सही है.
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