एशियन गेम्स- भारतीय विमेंस हॉकी टीम की लगातार तीसरी जीत:थाईलैंड को 20-1 से हराया, दीपिका ने 9 गोल किए; जापान से अगला मुकाबला
भारतीय विमेंस हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में जीत की हैट्रिक लगा दी है। पूल-B के मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 20-1 से हराया। गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दीपिका कुमारी ने 9 गोल किए। उनके सभी गोल पेनल्टी कॉर्नर से आए। नवनीत कौर ने 4 गोल दागे। रुतुजा दादासो पिसल ने हैट्रिक लगाई। नेहा, लालरेमसियामी, साक्षी राणा और कप्तान सलीमा टेटे ने भी गोल किए। थाईलैंड की ओर से सुपांसा सामांसो ने एकमात्र गोल किया। दीपिका ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा दीपिका का यह एशियन गेम्स में लगातार दूसरा रिकॉर्ड प्रदर्शन है। टूर्नामेंट के पहले मैच में उन्होंने उज्बेकिस्तान के खिलाफ 8 गोल किए थे। तब वह एक एशियन गेम्स विमेंस हॉकी मैच में सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी बनी थीं। थाईलैंड के खिलाफ 9 गोल करके उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया। टूर्नामेंट में दीपिका के अब 20 गोल हो चुके हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान के खिलाफ 8 और इंडोनेशिया के खिलाफ 3 गोल किए थे। पहले क्वार्टर में 6 गोल, हाफ टाइम तक स्कोर 11-0 भारत ने मैच की शुरुआत से ही थाईलैंड पर दबाव बनाए रखा। दूसरे मिनट में भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला और दीपिका ने इसे गोल में बदल दिया। चौथे मिनट में नवनीत ने बढ़त 2-0 कर दी। दीपिका ने 8वें और 9वें मिनट में दो गोल और किए। रुतुजा ने 10वें और 11वें मिनट में लगातार गोल दागे। भारत ने पहला क्वार्टर 6-0 की बढ़त के साथ खत्म किया। दूसरे क्वार्टर में नेहा ने 19वें मिनट में गोल किया। दीपिका ने 24वें मिनट में चौथा गोल किया। इसके बाद लालरेमसियामी ने गोल दागा। 29वें मिनट में नवनीत ने पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल किया। उसी मिनट साक्षी राणा ने रिबाउंड पर गोल कर दिया। हाफ टाइम तक भारत 11-0 से आगे था। तीसरे क्वार्टर में 5 गोल और आए तीसरे क्वार्टर में भी भारत का दबदबा जारी रहा। दीपिका ने 33वें मिनट में गोल किया। इसके बाद नवनीत और दीपिका ने फिर गोल किए। 39वें मिनट में दीपिका ने अपना सातवां गोल किया। 45वें मिनट में कप्तान सलीमा टेटे ने गोल किया। तीसरे क्वार्टर के अंत में भारत की बढ़त 16-0 हो गई। आखिरी क्वार्टर में 4 गोल, थाईलैंड को एकमात्र गोल रुतुजा ने 47वें मिनट में अपना तीसरा गोल करके हैट्रिक पूरी की। 51वें मिनट में दीपिका ने आठवां गोल किया। इसके तुरंत बाद नवनीत ने अपना चौथा गोल कर भारत को 19-0 से आगे कर दिया। 57वें मिनट में थाईलैंड को पेनल्टी कॉर्नर मिला। सुपांसा सामांसो ने इसे गोल में बदलकर टीम का खाता खोला। इसके कुछ ही सेकंड बाद भारत को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला और दीपिका ने उसे गोल में बदलकर अपना नौवां गोल पूरा किया। भारत ने 20-1 से मैच जीता। तीन मैच में 58 गोल, पूल-B में टॉप भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत उज्बेकिस्तान को 19-0 से हराकर की थी। इसके बाद इंडोनेशिया को 17-1 से मात दी। अब थाईलैंड के खिलाफ 20-1 की जीत दर्ज की है। तीन मैच में भारत ने कुल 58 गोल किए हैं और सिर्फ 2 गोल खाए हैं। टीम 9 पॉइंट के साथ पूल-B में टॉप पर है। पूल में भारत के अलावा जापान और सिंगापुर भी हैं। 12 टीमों के इस टूर्नामेंट में दोनों पूल की टॉप टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी। 44 साल पुराना रिकॉर्ड नहीं टूट सका 20-1 की जीत भारत की एशियन गेम्स विमेंस हॉकी में सबसे बड़ी जीत में से एक है। हालांकि टीम 1982 में बनाए गए रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सकी। 1982 में भारत ने हांगकांग को 22-0 से हराया था। यही एशियन गेम्स विमेंस हॉकी में भारत की सबसे बड़ी जीत है। भारत ने 2018 में कजाकिस्तान को 21-0 से भी हराया था। थाईलैंड के खिलाफ 20 गोल के साथ भारत की यह एशियन गेम्स में दूसरी सबसे बड़ी जीत के बराबर रही। गोल्ड के लिए 44 साल का इंतजार भारतीय विमेंस हॉकी टीम ने 1982 में नई दिल्ली एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद टीम को दो बार सिल्वर और तीन बार ब्रॉन्ज मिला। 1998 बैंकॉक गेम्स में भारत ने सिल्वर जीता। 2018 में भी टीम सिल्वर रही। 2006, 2014 और 2023 में भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। हांगझोउ 2023 में ब्रॉन्ज के बाद अब टीम की नजर गोल्ड पर है। जापान से अगला मुकाबला भारत का अगला मुकाबला मेजबान जापान से 25 सितंबर को होगा। जापान पूल-B में भारत के बाद प्रमुख टीमों में है। इस मुकाबले के बाद सेमीफाइनल की तस्वीर और साफ होगी। एशियन गेम्स का यह हॉकी टूर्नामेंट सिर्फ मेडल के लिए नहीं है। यह LA 2028 ओलिंपिक क्वालिफिकेशन से भी जुड़ा है। महिला हॉकी का गोल्ड जीतने वाली टीम को 2028 ओलिंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन मिलेगा।
20 वर्षीय मितांश बने माइनर लीग के सबसे युवा शतकवीर:छह महीने की उम्र में अमेरिका शिफ्ट हुआ था परिवार; भुवी-प्रसिद्ध के साथ खेल चुके
अमेरिका की माइनर लीग क्रिकेट में मुंबई में जन्मे 20 वर्षीय मितांश नित्यानंदम ने इतिहास रच दिया है। मितांश इस टी20 लीग के इतिहास में शतक जड़ने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने शिकागो किंग्समेन के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ महज 68 गेंदों पर 114 रनों की तूफानी पारी खेली। उनकी इस ऐतिहासिक पारी में सात छक्के और आठ चौके शामिल रहे। यह शतक इसलिए भी खास है क्योंकि ठीक एक दिन पहले वह मैच की पहली ही गेंद पर एक आसान फुल टॉस पर शून्य पर आउट हो गए थे। लेकिन अगले ही दिन अपनी गलती से सीखते हुए उन्होंने यह कीर्तिमान स्थापित कर दिया। मितांश की इस सफलता के पीछे मुंबई में बिताए उनके कड़े संघर्ष का बड़ा हाथ है। उनका जन्म मुंबई में हुआ था, लेकिन महज छह महीने की उम्र में ही उनका परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया था। अमेरिका में साल भर क्रिकेट ट्रेनिंग का ढांचा न होने के कारण मितांश ने हाई स्कूल के बाद कॉलेज जाने के बजाय एक बड़ा जोखिम लिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई एक साल के लिए टाली और क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए अकेले मुंबई के चेंबूर आकर आठ महीने बिताए। मुंबई में अचीवर्स क्रिकेट अकादमी और कोच सुबू की मदद से उन्होंने खुद को निखारा। 15 मैचों तक बेंच पर बैठने के बाद उन्हें डीवाई पाटिल क्लब की तरफ से खेलने का मौका मिला। क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के खिलाफ उन्होंने 30 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 41 रन बनाकर अपनी जगह पक्की की। इसके बाद उन्होंने टाइम्स शील्ड ए डिवीजन और प्रतिष्ठित डीवाई पाटिल टी-20 कप (जिसे आईपीएल का ऑडिशन माना जाता है) में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने भुवनेश्वर कुमार, प्रसिद्ध कृष्णा, यश ढुल और प्रियम गर्ग जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया और उनसे दबाव में खेलना सीखा। मुंबई की लाल मिट्टी वाली पिचों पर खेलते हुए मितांश ने स्पिन के खिलाफ अपनी तकनीक मजबूत की। उन्होंने यहीं स्वीप और रिवर्स-स्वीप जैसे शॉट खेलने सीखे, जो अमेरिका में उनके गेम का हिस्सा नहीं थे। शिकागो के खिलाफ अपने ऐतिहासिक शतक के दौरान उन्होंने करीब 40 रन इन्हीं स्वीप शॉट्स की मदद से बनाए। मितांश के पिता भारतीय टीम के कट्टर समर्थक हैं और बचपन में मितांश उनके साथ सुबह 4 बजे उठकर भारत के मैच देखते थे। मितांश का टैलेंट देखकर लीग ने नजरअंदाज कर दिए उम्र के नियम 2021 में शिकागो में एक अभ्यास मैच के दौरान शिकागो ब्लास्टर्स के तत्कालीन कप्तान अशर मेहदी ने 15 वर्षीय मितांश को पहली दो गेंदों पर छक्के जड़ते देखा था। तब उम्र कम होने के कारण उन्हें खेलने के लिए विशेष अनुमति दिलवाई गई क्योंकि लीग नियमों के अनुसार खिलाड़ी का 16 साल का होना जरूरी था। इससे मितांश लीग के सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। इसके बाद 17 साल की उम्र में वह लीग के सबसे युवा अर्धशतकवीर बने और अब 20 साल की उम्र में सबसे युवा शतकवीर बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गया है।
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