Election Commission के स्पष्टीकरण से NDA सहयोगियों की चिंता दूर, चिराग और नायडू ने किया समर्थन
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर उठाई गई आपत्तियों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के तीन घटक दलों के अधिक स्पष्टीकरण मांगे जाने के एक दिन बाद, शनिवार को भाजपा के सहयोगी दलों ने कहा कि आयोग के बयान से उनकी चिंताओं का समाधान हो गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने कहा कि आयोग ने अब सभी प्रमुख मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने शुक्रवार को कहा था कि चुनावों में जनता का विश्वास दांव पर है और निर्वाचन आयोग से इस संबंध में बनी आशंकाओं को दूर करने का आग्रह किया था।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण ने देश की संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को फिर से साबित किया है तथा इससे जुड़ी सभी गलतफहमियों को दूर कर दिया है। जद(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने विपक्षी दलों पर निर्वाचन आयोग को लेकर गलतफहमियां फैलाने का आरोप लगाया। इन नेताओं की टिप्पणियों से राजग के घटक दलों के रुख में बदलाव का संकेत मिला है।
इससे एक दिन पहले लोजपा (रामविलास), नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने इस विवाद को लेकर निर्वाचन आयोग से अधिक स्पष्टीकरण पर जोर दिया था। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे और मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। पासवान ने आयोग के शनिवार के बयान का स्वागत किया।
उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि उनका मकसद ‘‘किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना’’ नहीं है और लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग को इस मामले पर और स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जनता के मन में उठने वाले किसी भी सवाल या चिंता को सामने रखना और यह सुनिश्चित करना मेरी जिम्मेदारी है कि उनका स्पष्ट रूप से समाधान किया जाए। दरअसल, इसी जिम्मेदारी की भावना के साथ हमने एसआईआर को लेकर जनता की चिंताओं को निर्वाचन आयोग के सामने रखा था।’’ पासवान ने कहा, ‘‘आज निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमुख मुद्दों पर बिंदुवार अपना रुख स्पष्ट किया है।
एसआईआर प्रक्रिया, तीनों निर्वाचन आयुक्तों के बीच सर्वसम्मति और कैबिनेट सचिव के साथ हुई बैठक से जुड़े तथ्यों को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है। इस स्पष्टता से लोकतंत्र में जनता का विश्वास और मजबूत होगा। झा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के बयान से यह साबित हो गया है कि ‘‘संवैधानिक संस्थाओं को लेकर फैलाई जा रही गलतफहमियां निराधार हैं।’’ उन्होंने विपक्ष पर यह ‘‘गलत धारणा’’ फैलाने का आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कोई सहमति नहीं थी।
उन्होंने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड ने ऐसे दावों को खारिज कर दिया है। झा ने घर-घर जाकर फॉर्म जमा करने, बुजुर्गों, बेघर और गरीब लोगों के लिए विशेष शिविर लगाने तथा ऑनलाइन सुनवाई के संबंध में निर्वाचन आयोग के फैसलों का भी जिक्र करते हुए कहा कि ये फैसले आयोग की निष्पक्षता और लोगों की सुविधा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे उसके खिलाफ आने पर वह निर्वाचन आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाता है, जबकि चुनाव जीतने पर चुप रहता है।
शिंदे ने कहा, ‘‘अगर कुछ गलत हुआ है, तो इसकी पूरी जांच की जाएगी।” उन्होंने कहा कि जब भी जनादेश विपक्ष के खिलाफ जाता है, तब संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देना ‘‘पूरी तरह गलत’’ है।
Rajasthan में Congress MLA Chetan Patel पर FIR दर्ज, Tika Ram Jully ने BJP सरकार को घेरा
राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कांग्रेस विधायक एवं 27 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए इसे जनप्रतिनिधि की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। कोटा जिले में सुल्तानपुर नगर पालिका के अध्यक्ष के चुनाव के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में कांग्रेस विधायक चेतन पटेल और 27 अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और सड़क जाम करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। जूली ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘राजस्थान में क्या अब सत्ता से सवाल पूछना भी अपराध हो गया है और अगर सवाल विपक्ष का विधायक पूछ ले तो सरकार उसे अपराधी साबित करने पर ही तुल जाती है।’’ उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को डराना- धमकाना, पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव डालना और फिर प्राथमिकी दर्ज उनकी आवाज दबाने का प्रयास करना सत्ता के अहंकार की पराकाष्ठा है।
विपक्ष के नेता ने सवाल किया कि पीपल्दा से विधायक चेतन पटेल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज कराकर आखिर सरकार क्या संदेश देना चाहती है? उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जी, सत्ता के मद में यह मनमानी ठीक नहीं है। इसे अपनी कार्यशैली मत बनाइए।
आज कुर्सी का गुरूर है, कल वक्त का दस्तूर होगा, समय बदल रहा है।’’ कोटा ग्रामीण पुलिस ने मंगलवार रात जिले के सुल्तानपुर थाने में पटेल और लगभग 20 अन्य लोगों के खिलाफ सड़क रोकने और सरकारी अधिकारियों को राजकार्य करने से रोकने का मामला दर्ज किया। विधायक के खिलाफ दर्ज मामले को आगे की जांच के लिए अपराध जांच विभाग (सीआईडी-सीबी) को सौंप दिया गया है। पटेल और उनके समर्थकों पर 21 सितंबर को चुनाव के दौरान राजकार्य में बाधा डालने और यातायात जाम की स्थिति पैदा करने का आरोप है।
यह घटना सोमवार शाम को हुई जब विधायक को कथित तौर पर मतदान स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया गया। हालांकि वह शुरू में वहां से चले गए लेकिन कांग्रेस पार्षद और पार्टी पदाधिकारी वहीं रुके रहे और विरोध किया। जब भारतीय जनता पार्टी के पार्षद की गाड़ी को अंदर जाने की अनुमति दी गई तो उन्होंने उस कार को रोकने की कोशिश की।
पटेल घटनास्थल पर लौटे तथा उसके बाद थाने में तीखी बहस और हंगामा हुआ। पुलिस ने बताया कि विधायक और उनके समर्थकों ने सड़क जाम कर दी, पुलिसकर्मियों के साथ बदसलूकी और तीखी बहस की और पार्षदों को वोट डालने से रोकने की कोशिश की। जूली ने एक अन्य बयान में कहा कि हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर देने के बाद कांग्रेस अपनी यह लड़ाई आगामी पंचायती राज चुनावों में भी जारी रखेगी।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निकाय चुनावों में भाजपा की नींद उड़ा दी और वे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में अपना अभियान और तेज करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “पार्टी ने नगर निकाय चुनावों में भाजपा की नींद उड़ा दी थी और पंचायत राज चुनावों में उसकी हालत खराब कर देंगे।” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने नगर निकाय चुनाव में अपनी पूरी मशीनरी लगा दी। जूली ने दावा किया कि मुख्यमंत्री, कई मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव के प्रचार अभियान में भाग लिया, इसके बावजूद कांग्रेस ने कई प्रमुख नगर निकायों में भाजपा को कड़ी टक्कर दी।
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