Nandigram Bypoll में BJP प्रत्याशी हसीरानी रथ ने तय किया 1.10 लाख वोटों का लक्ष्य
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार हसीरानी रथ ने शनिवार को कहा कि छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में उनका उद्देश्य केवल सीट जीतना नहीं, बल्कि पार्टी की जीत का अंतर बढ़ाना भी है। हसीरानी रथ ने घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी दो और चार अक्टूबर को क्षेत्र में दो रैलियों को संबोधित करेंगे। बारिश के बीच प्रचार करते हुए रथ ने नंदीग्राम के ब्लॉक-दो के गांवों का दौरा किया।
उन्होंने शिवरामपुर, हनुभुइंया और कालीबाड़ी इलाकों में टोटो के जरिये घर-घर जाकर प्रचार किया। उन्होंने अपने चुनाव अभियान के तहत कई मंदिरों में पूजा-अर्चना भी की। रथ ने प्रचार के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘‘नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी की धरती है।
मैं उनका प्रतिनिधित्व करूंगी। वह सबकुछ हैं।’’ उन्होंने कहा कि दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने वाले शुभेंदु दो और चार अक्टूबर को दो जनसभाओं में उनके लिए प्रचार करेंगे। चार अक्टूबर उपचुनाव के प्रचार का आखिरी दिन है।
भाजपा ने इस चुनाव को उस विधानसभा क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक ताकत की परीक्षा के रूप में पेश किया है, जिसका संबंध 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हराने के बाद से शुभेंदु के साथ मजबूत हुआ है। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, ताकि चुनाव को भावनात्मक आयाम दिया जा सके। चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी।
रथ ने अपने शुरुआती प्रचार के दौरान कहा, ‘‘विपक्ष अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने में व्यस्त है। उनके पास कोई आधार नहीं है और प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है। वे अपनी जमानत बचाने के लिए लड़ रहे हैं।
हम यह देखने के लिए लड़ रहे हैं कि जीत का अंतर कितना बढ़ा सकते हैं।’’ भाजपा ने इस सीट के लिए पहले ही बड़ा लक्ष्य तय किया है। रथ ने इससे पहले कहा था कि पार्टी को 1.10 लाख वोट मिलने की उम्मीद है। छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में पिछले सप्ताह उस समय नाटकीय मोड़ आ गया था, जब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुभेंदु से मुलाकात के कुछ घंटे बाद चुनावी दौड़ से हटने का फैसला किया।
इसके बाद बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया, जिन्हें बाद में हत्या के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। प्रधान डे की नौकरी बड़े शिक्षक भर्ती घोटाले के दौरान कुछ समय के लिए चली गई थी। उन्होंने अपने पति सत्यजीत के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना में शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की और नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख से एक दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया।
उनके नाम वापस लेने से ममता गुट नंदीग्राम में उम्मीदवार विहीन हो गया। इस बीच, उपचुनाव के लिए इस गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
अचानक पैदा हुई स्थिति के बाद बनर्जी ने मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को ‘‘सहयोगी दल’’ बताते हुए कहा कि यह कदम विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
Election Commission के बयान से Rahul Gandhi के झूठ की पोल खुली: BJP
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग के ताजा बयान ने एसआईआर मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी के झूठ और दुष्प्रचार की पोल खोल दी है। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, “राहुल गांधी झूठ बोल रहे थे और दुष्प्रचार कर रहे थे। वह एक गंभीर राजनेता नहीं हैं।” निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद जारी किए गए थे, और फॉर्म छह में बदलाव को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।
फॉर्म 6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर जारी विवाद के बीच आयोग ने एक बयान में कहा कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र आयोग के किसी नीतिगत मामले या इसके आईटी विभाग से संबंधित नहीं थे, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थे। पूर्ण पीठ की मंजूरी से जारी एक बयान में आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य-पुनर्वितरण के आदेश दो निर्वाचन आयुक्तों के आदेश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए थे।
साथ ही, उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की ओर से आईटी प्रभाग की निगरानी भी कभी वापस नहीं ली गई थी। इस मामले पर टिप्पणी करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रसाद ने कहा, मीडिया में आई तथ्यात्मक रूप से गलत एक खबर के आधार पर विपक्ष, विशेष रूप से राहुल गांधी, निराधार व बेशर्मी भरे आरोप लगा रहे थे।” उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग के बयान ने कांग्रेस और राहुल गांधी की पोल खोल दी है।” प्रसाद ने दूसरे विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें आयोग पर निराधार आरोप लगाने के बजाय चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। यह घटनाक्रम इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे, जबकि एसआईआर का राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन पूर्ण आयोग की देखरेख में हो रहा था।
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