Delhi cyber crime: बच्चा गोद दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
नयी दिल्ली, तीन अगस्त दिल्ली पुलिस ने बच्चा गोद दिलाने के बहाने लोगों से ठगी करने वाले एक साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है और उत्तर प्रदेश के बरेली से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि ये गिरफ्तारियां दिल्ली में बुराड़ी की रहने वाली 30 वर्षीय महिला की शिकायत के बाद की गईं, जिससे बच्चा गोद दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 1.37 लाख रुपये की ठगी की गई थी।
पुलिस के अनुसार, महिला ने बच्चा गोद लेने की सेवाओं के लिए इंटरनेट पर जानकारी हासिल की थी और एक मोबाइल नंबर पर संपर्क किया था और फोन उठाने वाले ने अपनी पहचान सचिन के रूप में बताई और कानूनी रूप से बच्चा गोद दिलाने वाले एक संगठन का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पीटीआई-को बताया, ‘‘आरोपी ने महिला को आश्वासन दिया कि गोद लेने के लिए एक नवजात लड़का उपलब्ध कराया जाएगा और उसने पंजीकरण, बुकिंग तथा परिवहन शुल्क सहित विभिन्न चरणों में पैसे एकत्र किए। प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए उसने एनजीओ की जाली रसीदें, फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य नकली दस्तावेज भी भेजे।’’ पुलिस ने बताया कि आरोपी ने बच्चे की जैविक मां से मिलाने के महिला के अनुरोध को बार-बार टाला और पैसे लेने के बाद पीड़िता का फोन उठाना बंद कर दिया।
इससे महिला को संदेह हुआ। अधिकारी ने कहा, इसके बाद महिला ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उत्तरी जिले के साइबर थाने में एक ई-प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों के विवरण, आईपी लॉग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईएमईआई डेटा और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण किया।
पुलिस ने विभिन्न ऑनलाइन मंचों से डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की और लगभग 100 मोबाइल नंबरों की निगरानी की और बरेली में संदिग्धों का पता लगाया। पुलिस अधिकारी ने बताया, तकनीकी निगरानी के बाद 31 जुलाई को समन्वित छापे मारे गए, जिस दौरान सचिन (46) और उसके कथित सहयोगी राकेश (52) को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान सचिन ने खुलासा किया कि पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट कुमार जाली एनजीओ रसीदें, फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और अन्य फर्जी चिकित्सा दस्तावेज मुहैया कराता था, जिनका इस्तेमाल पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने के लिए किया जाता था कि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया असली है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, डेबिट कार्ड, पैन कार्ड और अस्पतालों व डॉक्टरों की 14 मोहरें बरामद की गईं। अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों और इस गिरोह से जुड़े अन्य साइबर धोखाधड़ी के मामलों की पहचान करने के लिए जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ऑनलाइन विज्ञापन देकर दावा करते थे कि वे बच्चों को कानूनी रूप से गोद दिलाने की व्यवस्था कर सकते हैं।
इसके बाद वे विभिन्न फर्जी मदों के नाम पर लोगों से पैसे वसूलते थे। भुगतान मिलते ही वे कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन बंद कर गायब हो जाते थे।
Malda में कफ सिरप तस्करी मामले की जांच, 2.5 करोड़ रुपये नकद बरामद
कोलकाता, तीन अगस्त पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में रातभर चली छापेमारी के दौरान एक फ्लैट से करीब 2.5 करोड़ रुपये नकद, थोड़ी मात्रा में सोना और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह बरामदगी मालदा और दक्षिण दिनाजपुर जिला पुलिस द्वारा राज्य पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओटी) की सहायता से मालदा थाना क्षेत्र के मंगलबाड़ी स्थित एक फ्लैट में संयुक्त अभियान के दौरान की गई।
यह छापेमारी पड़ोसी दक्षिण दिनाजपुर जिले में पहले प्रतिबंधित कफ सिरप की एक बड़ी खेप जब्त किए जाने के मामले की जांच के आधार पर की गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘फ्लैट से करीब 2.5 करोड़ रुपये की नकदी के बंडल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा थोड़ी मात्रा में सोना और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
बरामद सामान का सटीक मूल्यांकन किया जा रहा है।’’ अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह नकदी प्रतिबंधित कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़ी हो सकती है। वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इस मामले में अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह शामिल है। पुलिस धन के स्रोत, फ्लैट के स्वामित्व तथा इस परिसर का उपयोग करने वाले लोगों की पहचान का भी पता लगा रही है।
मामले की आगे की जांच जारी है।
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