भारत-अमेरिका ट्रेड डील 90% पूरी, अब किन मुद्दों पर अटका पेंच? समझें Quad और IMEC का कनेक्शन
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर 90 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है और अब कुछ अंतिम मुद्दों पर बातचीत चल रही है. अधिकारी ने समझौते की संभावित तारीख बताने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों देश डील के काफी करीब हैं और जल्द ही कुछ देखने को मिल सकता है.
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों में लंबे समय से व्यापार और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे प्रमुख बातचीत का हिस्सा रहे हैं. अब व्यापार समझौते के साथ दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के दूसरे क्षेत्रों Quad, निवेश, सप्लाई चेन और IMEC पर भी चर्चा तेज हो रही है.
90 फीसदी काम पूरा होने का क्या मतलब है?
अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि बातचीत का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा हो चुका है. इसका अर्थ यह है कि समझौते के अधिकांश मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है, जबकि कुछ अंतिम बिंदुओं पर बातचीत बाकी है.
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. 90 प्रतिशत काम पूरा होना और समझौते पर हस्ताक्षर होना दो अलग-अलग चरण हैं. अंतिम दौर में बाजार पहुंच, शुल्क, प्रतिस्पर्धात्मक शर्तों या किसी अन्य संवेदनशील विषय पर सहमति बनने में समय लग सकता है.
भारत की ओर से भी हाल में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके क्रियान्वयन से पहले भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में उचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलना जरूरी है.
आखिर किन मुद्दों पर अंतिम सहमति बाकी है?
अमेरिकी अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से उन सभी अंतिम मुद्दों की सूची नहीं बताई है, जिन पर बातचीत जारी है. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि डील में वास्तव में कौन-सा एक मुद्दा सबसे बड़ा अड़ंगा है.
फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क जारी किया था. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के दस्तावेज के मुताबिक, इसमें भारत की ओर से अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने तथा कुछ गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने जैसे प्रावधान शामिल थे. दोनों पक्षों ने इसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी.
यानी मौजूदा बातचीत केवल आयात-निर्यात शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार पहुंच और व्यापार से जुड़ी अन्य बाधाओं को भी कवर करती है.
समझौता हुआ तो भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. यह उनका आकलन है; समझौते के वास्तविक प्रभाव उसके अंतिम प्रावधानों पर निर्भर करेंगे.
व्यापार समझौते का सबसे सीधा असर दोनों देशों के कारोबारियों और निर्यातकों पर पड़ सकता है. यदि शुल्क और बाजार पहुंच की शर्तों में बदलाव होता है तो कुछ भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है. इसी तरह अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच मिल सकती है.
भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के प्रमुख बाजारों में शामिल है. वहीं अमेरिका के लिए भारत का बड़ा उपभोक्ता बाजार, बढ़ती अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन में बढ़ती भूमिका महत्वपूर्ण है.
अक्टूबर में भारत आएंगे मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की अक्टूबर में प्रस्तावित भारत यात्रा को भी दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है.
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि रुबियो की यात्रा भारत-अमेरिका साझेदारी में लगातार हो रही प्रगति का हिस्सा है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर रुबियो की यात्रा के दौरान ही होंगे.
इसलिए अभी यात्रा और व्यापार समझौते को सीधे एक-दूसरे से जोड़ना उचित नहीं होगा. लेकिन दोनों घटनाक्रम एक ही समय में होने के कारण बातचीत को अतिरिक्त कूटनीतिक महत्व जरूर मिल सकता है.
दिसंबर में G20 और संभावित बड़े ऐलान
अमेरिकी अधिकारी ने यह भी कहा कि दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है और उस दौरान कुछ बड़े ऐलान हो सकते हैं.
हालांकि, किसी विशेष घोषणा का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि संभावित घोषणाएं व्यापार, रणनीतिक सहयोग, निवेश या किसी अन्य क्षेत्र से संबंधित होंगी.
इस बीच भारत की ओर से दिसंबर में अमेरिका समेत कई देशों की यात्रा की संभावनाओं पर भी रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाना एक महत्वपूर्ण एजेंडा बताया गया है.
Quad पर अमेरिका का बढ़ता जोर
भारत-अमेरिका संबंधों का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा Quad है. इसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस साल Quad से जुड़े विदेश मंत्रियों की बैठक तीसरी बार होने जा रही है. उनके मुताबिक, एक साल में इतनी बार विदेश मंत्रियों की बैठक पहले नहीं हुई थी.
इससे यह संकेत मिलता है कि चारों देश इस मंच को कूटनीतिक और रणनीतिक समन्वय के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं. Quad में समुद्री सुरक्षा, तकनीक, महत्वपूर्ण और उभरती तकनीक, सप्लाई चेन तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सहयोग होता है. हालांकि, Quad कोई सैन्य गठबंधन नहीं है. इसका सहयोग अलग-अलग क्षेत्रों में चार देशों के समन्वय पर आधारित है.
IMEC पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
भारत-अमेरिका संबंधों में India-Middle East-Europe Economic Corridor यानी IMEC भी एक महत्वपूर्ण परियोजना है. इसका उद्देश्य भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच समुद्री और रेल संपर्कों के जरिए व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाना है. परियोजना में भारत से पश्चिम एशिया और फिर यूरोप तक माल पहुंचाने के लिए विभिन्न समुद्री और भूमि मार्गों की परिकल्पना की गई है.
अमेरिकी अधिकारी ने IMEC को भारत और अमेरिका दोनों की बड़ी प्राथमिकता बताया है. लेकिन उन्होंने यह भी माना कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई है.
पश्चिम एशिया की स्थिरता से क्यों जुड़ा है IMEC?
IMEC का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से होकर गुजरता है. इसलिए इस कॉरिडोर की सफलता केवल भारत और अमेरिका की इच्छा पर निर्भर नहीं है.
इसमें क्षेत्र के कई देशों की भूमिका है. अमेरिकी अधिकारी ने विशेष रूप से सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल का उल्लेख किया और कहा कि इन देशों को परियोजना के अपने हिस्सों पर काम आगे बढ़ाना होगा.
उनके मुताबिक, इजराइल-गाजा संघर्ष और बाद की क्षेत्रीय घटनाओं ने IMEC की गति को प्रभावित किया है. यदि क्षेत्रीय परिस्थितियां स्थिर होती हैं तो परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ सकता है.
तीन मोर्चों पर आगे बढ़ रहे भारत-अमेरिका संबंध
मौजूदा घटनाक्रम को देखें तो भारत-अमेरिका संबंधों में तीन समानांतर ट्रैक दिखाई देते हैं. पहला व्यापार, जहां दोनों देश प्रस्तावित समझौते के अंतिम चरण में होने की बात कह रहे हैं. दूसरा रणनीतिक सहयोग, जिसमें Quad की सक्रियता महत्वपूर्ण है. तीसरा कनेक्टिविटी और आर्थिक साझेदारी, जिसमें IMEC प्रमुख परियोजना है.
हालांकि, इन तीनों क्षेत्रों की अपनी अलग चुनौतियां हैं. व्यापार समझौते में अंतिम शर्तों पर सहमति जरूरी है, Quad में सदस्य देशों के हितों के बीच समन्वय बनाए रखना होगा और IMEC की प्रगति पश्चिम एशिया की परिस्थितियों से जुड़ी हुई है.
फिलहाल सबसे स्पष्ट संकेत व्यापार समझौते को लेकर आया है. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक बातचीत 90 प्रतिशत से ज्यादा पूरी हो चुकी है, जबकि भारत की ओर से भी इसे लगभग अंतिम चरण में बताया गया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि बाकी मुद्दों पर सहमति कब बनती है और अंतिम समझौता किस रूप में सामने आता है.
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Nirmala Sitharaman बोलीं, भारत 10 प्रतिशत से अधिक की Economic Growth हासिल कर सकता है
(तस्वीर के साथ) बेंगलुरु, 26 सितंबर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को भसोसा जताया कि भारत 10 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने सभी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी और नवाचार को बड़े पैमाने पर अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। आईआईटी मद्रास पूर्व छात्र संघ द्वारा यहां आयोजित एक परिचर्चा में उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक वृद्धि दर आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की ओर देश की यात्रा को गति देने में मदद करेगी, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों की ओर से बहुत अधिक प्रयास करने होंगे।
सीतारमण ने कहा, 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल करना संभव है, और मैं यह बात केवल आप सभी का उत्साह बढ़ाने के लिए नहीं कह रही हूं। यह वास्तव में संभव है। उन्होंने 2015 के बाद से स्टार्टअप के तेजी से हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
सीतारमण ने कहा, हमारे यहां नकारात्मक बातें करने वालों की कमी नहीं है। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें भारत के विफल होने पर परोक्ष रूप से खुशी मिलती है। हम कतई ऐसा बर्दाश्त नहीं कर सकते।
हमें ऐसे लोगों को सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीकी हस्तक्षेपों ने उत्पादकों को बाजारों से जोड़ने और उत्पादकता में सुधार लाने में मदद की है। उन्होंने फसल की कटाई में तेजी लाने और अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण दिया।
साथ ही उन्होंने उन भूखंडों के सटीक मानचित्रण के लिए ड्रोन के उपयोग का जिक्र किया, जिनका पहले केवल हाथों से सर्वेक्षण किया जाता था। उन्होंने कहा, प्रौद्योगिकी के इस तेज प्रसार के साथ स्टार्टअप में होने वाले नवाचारों को हर क्षेत्र में पहुंचना होगा। सीतारमण ने उर्वरक वितरण में चोरी रोकने के लिए पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनों के उपयोग का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि प्रायोगिक परीक्षण के दौर से गुजर रही यह पीओएस प्रणाली किसान, भूमि और बोई गई फसल का विवरण दर्ज करती है। यह किसानों को मिट्टी, सिंचाई और फसल की स्थिति के आधार पर उर्वरक की आवश्यक मात्रा की जानकारी भी उपलब्ध कराती है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरक खरीदने का विकल्प किसानों के पास ही रहेगा, जबकि यह तकनीक केवल उन्हें यह बताएगी कि उनकी फसल के लिए कितनी मात्रा पर्याप्त हो सकती है।
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