‘होमबाउंड’ के एक साल: जाह्नवी कपूर के दमदार और सहज अभिनय को फिर से याद करने का मौका
Homebound Completed One Year: एक साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘होमबाउंड’ ने अपनी संवेदनशील कहानी और मानवीय भावनाओं के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. फिल्म की कहानी जहां रिश्तों, सपनों, संघर्ष और जिंदगी की जटिलताओं को करीब से दिखाती है, वहीं जाह्नवी कपूर ने अपने किरदार के जरिए कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूती दी. ‘होमबाउंड’ में जाह्नवी कपूर एक ऐसे किरदार में नजर आई थीं, जो उनकी पिछली फिल्मों में दिखाई गई भूमिकाओं से काफी अलग था. उनके किरदार में एक सहजता और सादगी देखने को मिली, जिसने कहानी को और ज्यादा वास्तविक बनाने में मदद की. बिना किसी बनावटीपन के भावनाओं को पर्दे पर पेश करना उनके अभिनय की खासियत रही.
एक किरदार, जिसमें नजर आईं कई परतें
फिल्म में जाह्नवी का किरदार सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं था. उसके जरिए रिश्तों, व्यक्तिगत आकांक्षाओं और बदलती परिस्थितियों के बीच खुद को संभालने की कोशिश को सामने लाया गया. उनके अभिनय में भावनाओं को बहुत ज्यादा जाहिर करने के बजाय उन्हें स्वाभाविक तरीके से महसूस कराने की कोशिश नजर आई. उनके एक्सप्रेशंस, बॉडी लैंग्वेज और किरदार की परिस्थितियों के साथ उनका जुड़ाव फिल्म के कई पलों को प्रभावशाली बनाता है. यही सहजता उनके प्रदर्शन को फिल्म की दुनिया के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ती है.
जाह्नवी के करियर का एक अलग रंग
यूं तो जाह्नवी कपूर ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदारों को आजमाया है, लेकिन ‘होमबाउंड’ उनके लिए बेहद खास रही क्योंकि इस फिल्म में उन्होंने ग्लैमर या बड़े सिनेमाई पलों की बजाय कहानी और किरदार की भावनाओं को प्राथमिकता दी. उनका यह प्रदर्शन उनके अभिनय के एक ऐसे पक्ष को सामने लेकर आया, जो बेहद संवेदनशील और जमीन से जुड़ा हुआ था. यहां किरदार की छोटी-छोटी भावनाएं भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गईं और दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचीं.
एक साल बाद भी क्यों खास है ‘होमबाउंड’?
ऐसे में फिल्म के एक साल पूरे होने पर पीछे मुड़कर देखने पर ‘होमबाउंड’ सिर्फ एक फिल्म की कहानी नहीं लगती, बल्कि यह उन भावनाओं और रिश्तों की याद दिलाती है, जिनसे दर्शक खुद को जोड़ सकते हैं. इसी वजह से फिल्म में जाह्नवी कपूर का प्रदर्शन भी उनके करियर के उन किरदारों में शामिल हो जाता है, जहां उन्होंने अपेक्षाकृत शांत और सहज तरीके से अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. ‘होमबाउंड’ के एक साल पूरे होने पर जाह्नवी कपूर का यह प्रदर्शन यह भी याद दिलाता है कि किसी किरदार का प्रभाव हमेशा बड़े संवादों या भव्य दृश्यों से नहीं बनता. कई बार उसकी ताकत उसकी सादगी, खामोशी और भावनाओं की सच्चाई में होती है, और ‘होमबाउंड’ में जाह्नवी का अभिनय इसी पहलू को खूबसूरती से सामने लाता है.
कान्स से ऑस्कर तक: ‘होमबाउंड’ का यादगार सफर
फिल्म का सफर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2025 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में इसके प्रीमियर के साथ शुरू हुआ, जहां इसकी सादगीपूर्ण कहानी और दमदार अभिनय ने खास ध्यान आकर्षित किया. इसके बाद फिल्म ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) सहित कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और फिर 26 सितंबर 2025 को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई. बाद में ‘होमबाउंड’ भारत के ऑस्कर सफर का भी हिस्सा बनी, जब इसे 98वें अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना गया. हालांकि फिल्म अंतिम नामांकन सूची में जगह नहीं बना सकी, लेकिन इस उपलब्धि ने इसके सफर को और खास बना दिया.
ममता की रैली में जा रहे कुणाल घोष पर तीसरी बार फिर से हमला, गाड़ी घेरकर बरसाए अंडे और तोड़े कांच
TMC MLA Kunal Ghosh Car Attacked: पश्चिम बंगाल की सियासत में नेताओं पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. शनिवार को हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष को निशाना बनाया गया. वह श्रीरामपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा में हिस्सा लेने जा रहे थे. इसी बीच रास्ते में उत्तरपाड़ा के पास अचानक भारी भीड़ ने उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया. प्रदर्शनकारियों ने जोरदार हंगामा करते हुए उनकी कार पर ताबड़तोड़ अंडे फेंकने शुरू कर दिए. इसी दौरान गाड़ी के पिछले हिस्से पर जोरदार वार किया गया, जिससे पीछे की खिड़की का कांच चकनाचूर हो गया. अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरातफरी मच गई और सड़क पर लंबा जाम लग गया.
सोशल मीडिया पर सामने आया घटना का वीडियो
घटना के तुरंत बाद नेता के कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर पूरे वाकये का वीडियो साझा किया गया. सामने आए इस वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुणाल घोष गाड़ी की अगली सीट पर ड्राइवर के पास बैठे हुए हैं. वहीं पिछली सीट पर बैठे उनके सहयोगी इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड कर रहे थे. बाहर खड़ी भीड़ लगातार गाड़ी को रोककर नारेबाजी कर रही थी और आगे बढ़ने का रास्ता पूरी तरह रोक दिया गया था. हंगामे के बीच कुछ लोगों ने गाड़ी के शीशों को निशाना बनाया. शीशा टूटने से कार के भीतर बैठे लोग बाल बाल बच गए. गाड़ी के चारों तरफ अंडों के छिलके और बिखरा हुआ कांच साफ दिखाई दे रहा था.
#WATCH | West Bengal: TMC MLA Kunal Ghosh says that eggs were hurled at his car and a group of people attacked the car while he was going to Serampore, Hooghly, for a rally of former CM Mamata Banerjee.
— ANI (@ANI) September 26, 2026
(Video Source: Kunal Ghosh) pic.twitter.com/yH6jvA5AOw
4 महीने के भीतर तीसरी बार बनाया गया निशाना
कुणाल घोष के लिए इस तरह के हमले कोई नई बात नहीं रह गए हैं. बीते चार महीनों के भीतर उन पर हुआ यह तीसरा हमला है. इससे पहले भी उन्हें दो अलग अलग मौकों पर निशाना बनाया जा चुका है. बार बार हो रही इन घटनाओं ने राज्य में पार्टी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह हमला पूरी तरह सोची समझी साजिश का हिस्सा है, ताकि वरिष्ठ नेताओं को डराया जा सके. पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जांच शुरू कर दी है और इलाके में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.
कालीघाट में ममता के आवास के बाहर फेंका था अंडा
इससे पहले इसी साल पंद्रह जून को भी कुणाल घोष पर बेहद अजीबोगरीब तरीके से हमला हुआ था. वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे. बैठक खत्म होने के बाद जब वह बाहर निकले और मीडिया से बातचीत कर रहे थे, तभी भीड़ में से निकलकर एक युवक उनके बेहद करीब आ गया. उसने तेजी से उनके सिर पर अंडा दे मारा. इस अचानक हुए हमले से सुरक्षाकर्मियों के हाथ पांव फूल गए थे. घटना के बाद नेता ने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चंदन सिंह और रवि कोयल नाम के दो आरोपियों को पकड़ा था, जिन्हें बाद में अदालत से जमानत मिल गई थी.
घर और पार्टी दफ्तर में भी हुई थी भारी तोड़फोड़
अंडे से हुए हमले के दो महीने बाद बारह अगस्त को भी कुणाल घोष को निशाना बनाया गया था. कोलकाता के गरपार इलाके में स्थित उनके निजी आवास, पास के क्लब और पार्टी दफ्तर में कुछ अराजक तत्वों ने जमकर तोड़फोड़ की थी. गनीमत यह रही कि उस समय घोष अपने घर पर मौजूद नहीं थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि राजनीतिक विरोधियों ने बाहर से असामाजिक तत्वों को बुलाकर इस वारदात को अंजाम दिलवाया था. हमलावरों ने पहले उनके घर के अंदर घुसने की कोशिश की और जब वे नाकाम रहे, तो उन्होंने पास ही बने पार्टी दफ्तर पर हमला बोल दिया. दफ्तर के बाहर लगे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कुणाल घोष के होर्डिंग और बैनर फाड़ दिए गए थे.
राज्य में गरमाई राजनीतिक बयानबाजी
शनिवार को उत्तरपाड़ा में हुए ताजा हमले के बाद राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने विपक्षी दलों पर गुंडागर्दी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि जनसभाओं में जाने वाले नेताओं को इस तरह घेरना पूरी तरह लोकतंत्र के खिलाफ है. वहीं विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा करार दिया है. पुलिस का कहना है कि उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. घटना के बाद श्रीरामपुर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है.
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