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‘द वन’ ने पहले दिन ₹8 करोड़ कमाए:सिद्धार्थ की पिछली 10 फिल्मों में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग; ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन ₹3.35 करोड़ कमाए

शुक्रवार को रिलीज हुई सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन’ ने पहले दिन भारत में 8 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, 6,746 शोज में रिलीज हुई फिल्म की ऑक्यूपेंसी 26% रही। फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 9.6 करोड़ रुपए हो गया। वहीं अपने रिलीज के 50वें दिन भी ‘हनुमान अंश’ ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’, ‘वाइब’ जैसी कई फिल्मों से ज्यादा कमाई की। ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का निर्देशन ‘पंचायत’ फेम दीपक कुमार मिश्रा ने किया है। यह उनका फीचर फिल्म डायरेक्शन डेब्यू है। फिल्म भारतीय लोककथाओं पर आधारित है और इसमें सुपरनैचुरल फैंटेसी, पौराणिक कथाओं, एक्शन और थ्रिलर के एलिमेंट्स हैं। इस महीने रिलीज हुई करीना कपूर की ‘दायरा’ और कुणाल खेमू की ‘वाइब’ की तुलना में ‘द वन’ की शुरुआत बेहतर रही। दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ₹8 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ यह फिल्म एक्टर की पिछली 10 थिएट्रिकल रिलीज में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई है। इस लिस्ट में ‘थैंक गॉड’ ₹8.10 करोड़ के साथ पहले स्थान पर है। ‘परम सुंदरी’ ने ₹7.25 करोड़, ‘मरजावां’ ने ₹7 करोड़ और ‘बार बार देखो’ ने ₹6.80 करोड़ की ओपनिंग की थी। फिल्म में तमन्ना भाटिया भी लीड रोल में हैं। यह सात साल बाद उनकी पहली हिंदी थिएट्रिकल फिल्म है, जिसमें वह लीड रोल में हैं। उनकी पिछली हिंदी फीचर फिल्म ‘खामोशी’ थी, जिसमें प्रभु देवा भी थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी। ‘खामोशी’ के बाद तमन्ना हिंदी फिल्मों में ज्यादातर स्पेशल सॉन्ग सीक्वेंस में नजर आईं। इनमें ‘स्त्री’ और ‘रेड 2’ शामिल हैं। ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ से हुआ सामना ‘द वन’ को हिंदी बॉक्स ऑफिस पर सोलो रिलीज मिली। इसके साथ रिलीज हुई एकमात्र बड़ी फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम-एन्कोर’ थी। इसने भारत में सभी भाषाओं में 8.68 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसमें इंग्लिश वर्जन की हिस्सेदारी 5.25 करोड़ रुपए रही। फिल्म को 3,635 शोज में दिखाया गया। ‘अवेंजर्स: एंडगेम - एन्कोर’ 2019 की मार्वल स्टूडियोज की फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ की थिएट्रिकल री-रिलीज थी। इसमें कुछ अतिरिक्त फुटेज जोड़ा गया था, जो कहानी को ‘अवेंजर्स: डूम्सडे’ से जोड़ता है। ‘डूम्सडे’ दिसंबर में रिलीज होने वाली है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का कलेक्शन ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 23वें दिन 503 शोज में चल रही है। फिल्म ने आज लाइव कलेक्शन के तौर पर 0.28 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। इसके साथ फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 266.70 करोड़ रुपए और कुल नेट कलेक्शन 224.08 करोड़ रुपए हो गया है। इससे पहले 25 सितंबर, 4वें शुक्रवार यानी 22वें दिन फिल्म ने 1.00 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन भी दिखाया दम भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार को कई फिल्मों के बीच ‘हनुमान अंश’ की कमाई चर्चा में रही। फिल्म ने रिलीज के 50वें दिन भी 3.35 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। वहीं, ‘वाइब’ ने शुक्रवार को ₹85 लाख, ‘दायरा’ ने ₹13 लाख और ‘लव लॉटरी’ ने करीब ₹9 लाख का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, भारत में ‘हनुमान अंश’ का कुल नेट कलेक्शन 291.53 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 344.35 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, ओवरसीज में 50वें दिन फिल्म ने 50 लाख रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 37 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 381.35 करोड़ रुपए हो चुका है। नानी की फिल्म ‘द पैराडाइज’ ने दूसरे दिन भारत में 14.90 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। फिल्म को दूसरे दिन 7,049 शोज मिले। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 61.15 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 72.50 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने 3 करोड़ रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 25 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 97.50 करोड़ रुपए हो चुका है। वहीं, दूसरे दिन फिल्म के हिंदी वर्जन ने 1.50 करोड़ रुपए कमाए।

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यूपी ट्रेड शो: आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट स्टॉल पर दिखा हाथ का हुनर, ज्वेल कारपेट बनाने में लगते हैं डेढ़ महीने

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में उत्तर प्रदेश की आधुनिक औद्योगिक ताकत के साथ प्रदेश की सदियों पुरानी हस्तकला और कारीगरों का हुनर भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों से पहुंचे उत्पादों के बीच आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट का स्टॉल भी खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां हाथों से तैयार किए गए ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें तैयार करने में कारीगरों को कई सप्ताह तक लगातार मेहनत करनी पड़ती है.

पारंपरिक तकनीकी से तैयार कर रहे उत्पाद

आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट से जुड़े रेहान अहमद ने बताया कि उनके यहां हाथ से काम करने की यह कला पीढ़ियों से चली आ रही है. परिवार के कारीगर पारंपरिक तकनीक के जरिए विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करते हैं. एक खास पीस को तैयार करने में आमतौर पर दो कारीगर लगातार काम करते हैं. उत्पाद की डिजाइन और बारीकी के आधार पर इसे तैयार होने में करीब एक से डेढ़ महीने तक का समय लग सकता है.

हाथ से बनी वस्तुओं का ट्रेड शो में हो रहा प्रदर्शन

रेहान अहमद के मुताबिक, इस पारंपरिक हस्तकला में नक्शी, टपका और कोरा जैसे मटेरियल और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए खास उत्पाद में तांबे का इस्तेमाल किया गया है. तैयार किए गए तांबे के उत्पाद के ऊपर सोने का पानी चढ़ाया जाता है. इसके बाद उत्पाद को एक खास चमक और आकर्षक रूप मिलता है. दूर से देखने पर इसकी फिनिशिंग और डिजाइन लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. स्टॉल पर प्रदर्शित प्रमुख उत्पादों में ज्वेल कारपेट भी शामिल है. नाम के अनुरूप यह सामान्य कारपेट से अलग डिजाइन और बारीक कारीगरी वाला उत्पाद है.

बारीक डिजाइन तैयार लगता है काफी समय

रेहान ने बताया कि ज्वेल कारपेट का इस्तेमाल दो कारपेट को आपस में जोड़ने के लिए किया जाता है. इसकी बारीक डिजाइन तैयार करने में कारीगरों को काफी समय और धैर्य की जरूरत होती है. कारीगरों की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मीटर का ज्वेल कारपेट पीस तैयार करने में भी दो कारीगरों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है. इसमें डिजाइन की बारीकियों के साथ-साथ फिनिशिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. हाथ से किए जाने वाले काम के कारण हर पीस में कारीगर की मेहनत और उसकी अलग पहचान नजर आती है.

रेहान अहमद का कहना है कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसे बड़े मंच पर आगरा की पारंपरिक हस्तकला को प्रदर्शित करने से स्थानीय कारीगरों को नए खरीदारों और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है. इससे न केवल पुराने हुनर को पहचान मिलती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी पारंपरिक कला से जोड़ने में मदद मिल सकती है.

हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और टेक्सटाइल पर  भी फोकस

ट्रेड शो में इस बार हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और टेक्सटाइल को भी प्रमुख फोकस सेक्टर में शामिल किया गया है. ऐसे में आगरा के ताज हैंडीक्राफ्ट का स्टॉल यह दिखा रहा है कि उत्तर प्रदेश की पहचान केवल आधुनिक उद्योग और बड़े निवेश तक सीमित नहीं है. प्रदेश के अलग-अलग शहरों और जिलों में पीढ़ियों से चले आ रहे कारीगरों का हुनर भी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ट्रेड शो में इन उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों के सामने पेश किए जाने से पारंपरिक हस्तकला को नए बाजार मिलने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं.

स्रोत- आईएएनएस

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