Supreme Court का UP सरकार को आदेश, Meerut में सील हों 16000 से अधिक अवैध निर्माण
उच्चतम न्यायालय ने अवैध निर्माण एवं आवासीय संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मेरठ में 16,000 से अधिक संपत्तियां सील करने और अनधिकृत निर्माण ढहाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में उन जमीनों की प्रकृति की विस्तृत जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी गठित किया है, जहां ये अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित हुई हैं। पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा, ‘‘वस्तु स्थिति रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमें यह जानकर हैरानी और चिंता हुई कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां बन गई हैं।’’ पीठ ने कहा कि विभाग ने मेरठ के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया है।
रिपोर्ट के अनुसार शहर को चार क्षेत्रों-जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी-में बांटा गया है। पीठ ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘जोन-ए में निरीक्षण और सर्वेक्षण के लिए तैनात 16 दल ने 16,726 निर्माण पूरी तरह अवैध या अनधिकृत पाए हैं। इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों तरह के और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण हैं।’’ न्यायालय अवैध निर्माण कार्यों के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
उसने अधिकारियों को जोन-ए में चिह्नित सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया में पहला कदम वहां रहने या काम करने वाले लोगों से परिसर खाली कराना और इन सभी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है। हम इसी के अनुसार निर्देश देते हैं।
संभव है कि इनमें से कुछ इमारतें जर्जर हालत में हों और उनके गिरने से लोगों की जान जा सकती है। हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं चाहते। इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
हम सभी चारों जोन के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं।’’ पीठ ने कहा कि यदि दुर्भाग्यवश ऐसी कोई घटना होती है जिसमें निर्दोष लोगों की जान जाती है तो इसके लिए संबंधित सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट में जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी की स्थिति का उल्लेख नहीं है, इसलिए इन तीन क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की संख्या की जानकारी उसके पास नहीं है। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई पर संबंधित प्राधिकारी को जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।
उसने कहा, ‘‘हालांकि, जोन-ए में अवैध निर्माणों को चिह्नित किया जा चुका है, इसलिए अब उन्हें ढहाने के लिए उचित कार्रवाई की जाए।’’ न्यायालय ने निर्माण ढहाने की कार्रवाई जारी रखने और अगली सुनवाई तक इस संबंध में ताजा वस्तु स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। उल्देपुर के संबंध में पीठ ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि शुरुआत में सील की गईं 44 संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। पीठ ने कहा कि इन 44 संपत्तियों में से 20 को ढहाया जा चुका है और उनका अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल भी रोक दिया गया है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि सील की गई 44 संपत्तियों में से शेष 24 को भी जल्द से जल्द ढहाया जाए।’’ पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) धूलिया की अध्यक्षता वाला न्यायिक आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच वर्ष से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा, जिससे इन अवैध आवासीय कॉलोनियों को विकसित होने का मौका मिला। आयोग यह भी पता लगाएगा कि क्या ये अवैध आवासीय कॉलोनियां मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से बनाई गईं और वह इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। न्यायालय ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने और उसके निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई पर विस्तृत वस्तु स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
INDIA ब्लॉक का बड़ा दांव! 30 सितंबर को दिल्ली में महाबैठक, चुनाव आयोग के खिलाफ बन रही बड़ी रणनीति
विरोधी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक की 30 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नए कदम उठाने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर यह बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी के शामिल होने की पूरी उम्मीद है।
यह प्रस्तावित बैठक ऐसे समय में हो रही है जब SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को लेकर चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरें सामने आई हैं और विपक्षी पार्टियों के बीच आयोग को लेकर तालमेल बढ़ा है। सूत्रों ने बताया कि पार्टियां इस मुद्दे पर एक-दूसरे के संपर्क में हैं और मिलकर जवाब देने पर चर्चा कर रही हैं।
विपक्ष ने चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ाया
CPI(M), CPI और CPI(ML)-लिबरेशन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। कांग्रेस ने भी कुमार की आलोचना तेज कर दी है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक 29 सितंबर को होनी है, जो INDIA ब्लॉक की प्रस्तावित बैठक से एक दिन पहले होगी। इसमें इस मुद्दे पर पार्टी के रुख पर चर्चा की जाएगी।
चुनाव आयोग के मुद्दे ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच भी सहमति का एक अनोखा माहौल बनाया है; ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC और CPI(M) अब इस मामले पर मिलकर काम कर रही हैं।
CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने INDIA ब्लॉक और अन्य विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर ताजा घटनाक्रम पर चर्चा के लिए बैठक की मांग की। बाद में उन्होंने बनर्जी से बात की, जिन्होंने सहमति जताई कि स्थिति को देखते हुए मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की नई कोशिश
विपक्षी पार्टियां कुमार को हटाने की मांग करते हुए एक नया नोटिस भी तैयार कर रही हैं। कानूनी विशेषज्ञों की जांच के बाद इस प्रस्तावित नोटिस को संसद के दोनों सदनों के सामने पेश किए जाने की उम्मीद है।
अगर इसे पेश किया जाता है, तो यह CEC के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई शुरू करने की विपक्ष की तीसरी कोशिश होगी।
विपक्ष की यह नई लामबंदी 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत चर्चाओं का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए जाते हैं।
SIR के मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट
यह पहल तब शुरू हुई जब 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से संयुक्त रूप से संपर्क किया।
इस कदम से पहले ही इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच व्यापक तालमेल का पता चल गया था। अब 30 सितंबर को प्रस्तावित बैठक से चुनाव आयोग, मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और अन्य चिंताओं पर चर्चा के लिए एक और मंच मिलने की उम्मीद है।
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