फाइबर से भरपूर थाली रखेगी आपको फिट, जानिए रोजाना कितनी मात्रा है जरूरी
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ भरपूर खाना जरूरी नहीं है, बल्कि संतुलित और पौष्टिक डाइट लेना बेहद जरूरी है। हमारी रोज की डाइट में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना हेल्दी ईटिंग प्लान का अहम हिस्सा है। फाइबर और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है।
एक वयस्क को प्रतिदिन लगभग 25 से 35 ग्राम फाइबर की आवश्यकता होती है। ऐसे में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें जैसी फाइबर वाली चीजों को डाइट में शामिल करना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।
नेश्नल हेल्थ मिशन उत्तर प्रदेश ने भी रोजाना डाइट में फाइबर वाली चीजों को शामिल करने की सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, अपनी रोज की डाइट में फाइबर वाली चीजें शामिल करना हेल्दी ईटिंग प्लान का एक जरूरी हिस्सा है। फल, सब्जियां, फलियां और साबुत अनाज इसके अच्छे सोर्स हैं। इन्हें रेगुलर खाने से पाचन और पूरी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
फलों में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर होते हैं, जो कब्ज को रोकते हैं और पेट को साफ रखते हैं। नियमित तौर पर खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन काबू में रहता है।
थाली में सब्जियों का होना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह पाचन क्रिया को सुधारती हैं। ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखती हैं तथा पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती हैं। फाइबर रक्त में ग्लूकोज के स्तर को स्थिर रखने में मदद करता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है।
दाल प्रोटीन का अच्छा सोर्स होता है। दालों में घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह का फाइबर होता है, जो कब्ज से बचाता है और मल त्याग को आसान बनाता है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता है और डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। फाइबर के साथ-साथ ये प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, आयरन, फोलेट और मैग्नीशियम का बेहतरीन स्रोत हैं।
फाइबर से भरपूर थाली में साबुत अनाज का होना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह पोषण की भरपूर मात्रा है। इसमें फाइबर के साथ-साथ विटामिन-बी, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देते हैं।
इसके अलावा सलाद में मौजूद फाइबर आंतों की सफाई करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
--आईएएनएस
एनएस/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
मजबूत और आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम बनाने के लिए 'सेकंड-लाइफ' बैटरियों पर फोकस जरूरी: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कहा है कि भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए बैटरी निर्माण, उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन और जीवनचक्र समाप्त होने के बाद उनके प्रबंधन (एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट) पर समन्वित रूप से काम करना होगा। उनका कहना है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरियों का उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग की व्यापक व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में टेरी यानी द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग के बाद बची हुई क्षमता वाली बैटरियों के सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन की संभावनाओं को भी तलाशना होगा। इससे बैटरियों का उपयोगी जीवन बढ़ाया जा सकेगा और उनकी आर्थिक उपयोगिता अधिकतम की जा सकेगी।
इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की।
भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने कहा कि सरकार घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े ढांचे को भी विकसित कर रही है। उनका कहना था कि ऐसे कदम भारत को प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगे।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों के उपयोग की संभावनाएं केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं हैं। उनका उपयोग घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम्स और यूपीएस सिस्टम्स जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।
सम्मेलन में बैटरी वैल्यू चेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) निर्माण क्षमता का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विकास और बैटरियों के पुन: उपयोग, पुनर्प्रयोजन तथा रीसाइक्लिंग की बढ़ती जरूरतें शामिल थीं।
वहीं, टेरी के वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य सृजन के स्थानीयकरण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैटरियों को शुरुआती चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए। साथ ही सेकंड-लाइफ बैटरियों की शेष क्षमता और प्रदर्शन का आकलन कर उनमें उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाना भी जरूरी है।
इसके अलावा, इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने देश में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग के निर्माण के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने कहा कि भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए राज्यों को क्षमता नियोजन, मजबूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों पर काम करना होगा। इससे ऊर्जा तंत्र को अधिक मजबूत और त्वरित प्रतिक्रिया देने योग्य बनाया जा सकेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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