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Jan Suraaj की Delhi में एंट्री की तैयारी, Prashant Kishor को सौंपा जाएगा प्रस्ताव

जन सुराज पार्टी दिल्ली की राजनीति में उतरने की संभावना तलाश रही है और राष्ट्रीय राजधानी में उसके समर्थक बांकीपुर उपचुनाव में जीत के लिए पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को सम्मानित करने के दौरान रविवार को उनके समक्ष दिल्ली इकाई के गठन संबंधी प्रस्ताव रखेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में रहने वाले पार्टी से जुड़े बिहार के लोग कर रहे हैं। जन सुराज की कोर समिति के सदस्य कुमार शांतनु ने कहा कि किशोर की राजनीतिक सोच से जुड़े समर्थक दिल्ली में पार्टी की इकाई गठित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव लड़ने की दिशा में कोई भी कदम यहां पार्टी की संभावनाओं का आकलन करने के बाद ही उठाया जाएगा।

 दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज में वनस्पति विज्ञान पढ़ाने वाले शांतनु ने कहा, ‘‘दिल्ली में जन सुराज से जुड़े लोगों की मांग है कि पार्टी यहां अपनी मौजूदगी दर्ज कराए लेकिन रविवार के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बांकीपुर में जीत के लिए किशोर को सम्मानित करना है।’’ उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया है लेकिन यदि कोई इसमें शामिल होना चाहता है तो उसका स्वागत है। 

शांतनु ने कहा कि बक्सर के पूर्व सांसद के. के. तिवारी के बेटे एवं अधिवक्ता तथागत हर्षवर्धन और हिमाचल प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जे. पी. सिंह के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। दोनों ने 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव जन सुराज के उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। दिल्ली में इकाई गठित होने पर यह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण विस्तार होगा क्योंकि अब तक उसका संगठन और चुनावी गतिविधियां मुख्य रूप से बिहार तक सीमित रही हैं। दिल्ली में पार्टी के समर्थक चुनाव लड़ने की योजना घोषित करने के बजाय यहां औपचारिक संगठन खड़ा करने के लिए किशोर की मंजूरी चाहते हैं। 

विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुके पूर्व चुनाव रणनीतिकार किशोर ने बिहार में शिक्षा, रोजगार और शासन के मुद्दों पर अभियान चलाते हुए जन सुराज की शुरुआत की थी। संगठन के राजनीतिक दल का रूप लेने से पहले उन्होंने कई महीने राज्यभर की यात्रा की थी। जन सुराज के लिए पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव था। पार्टी ने 238 सीट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। इसके बाद ये सवाल उठे थे कि किशोर के अभियान को जनता से मिल रहे समर्थन को क्या वास्तव में मतों में बदला जा सकता है। किशोर उस चुनाव में स्वयं उम्मीदवार नहीं थे।

 इसके बाद इस साल अगस्त में हुए बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी को बिहार विधानसभा में पहली सीट मिली और उम्मीदवार के रूप में किशोर ने भी पहली चुनावी जीत दर्ज की। उन्होंने पटना की इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नीरज कुमार को 19,324 मत से हराया। किशोर को 64,151 और कुमार को 44,827 मत मिले। शांतनु ने कहा कि पार्टी दिल्ली में अपना विस्तार करेगी या नहीं, इसका फैसला किशोर और पार्टी नेतृत्व को करना है।

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MK Stalin का CM Vijay पर हमला, राजनीतिक पाखंड और प्रशासनिक विफलता का लगाया आरोप

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए उनपर ‘राजनीतिक पाखंड और प्रशासनिक विफलता’ का आरोप लगाया। शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में, स्टालिन ने छह अक्टूबर के विधानसभा उपचुनाव से पहले मदुरंतकम में विजय के चुनावी भाषण का जवाब दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को ‘शुद्ध शक्ति’ और द्रमुक को ‘बुरी शक्ति’ बताये जाने का मजाक उड़ाया। अपनी चुनावी रैली में विजय ने फिर से यह आरोप लगाया कि द्रमुक एक ‘बुरी शक्ति’ है। 

वह यह आरोप अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले से ही लगाते आ रहे हैं। उन्होंने द्रमुक, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जेम ग्रेनाइट्स के अध्यक्ष आर. वीरमणि से जुड़े सनसनीखेज पोक्सो मामले को पिछली द्रमुक सरकार ने ‘दबा दिया’ था। स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘ मुख्यमंत्री विजय ने कहा है कि उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना छोड़ दिया है, लेकिन (असल में) वह अब भी लोगों के सामने अभिनय कर रहे हैं। आज मैंने मदुरंतकम शूटिंग के दौरान आपके डायलॉग बोलने का अंदाज देखा।

 मेरे पास आपके लिए कुछ सवाल हैं।’’ स्टालिन ने विजय की उन बातों का ज़िक्र किया जिनमें उन्होंने द्रमुक को ‘बुरी ताकत’ और टीवीके को ‘शुद्ध ताकत’ बताया था। द्रमुक नेता ने कहा कि टीवीके में मारागाथम कुमारवेल समेत पूर्व नेताओं को शामिल किये जाने का संकेत दिया और सवाल उठाया कि ऐसे नेताओं को शामिल करने के बाद टीवीके खुद को ‘शुद्ध शक्ति’ कैसे कह सकती है। 

कुमारवेल को विधानसभा उपचुनाव में टीवीके ने प्रत्याशी बनाया है। स्टालिन ने विजय पर आरोप लगाया कि उन्होंने असली विरोध करने के बजाय भाजपा के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है। सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम के कामकाज पर निशाना साधते हुए स्टालिन ने आरोप लगाया कि उनकी कल्याणकारी योजनाएं असल में द्रमुक की ही योजनाएं थीं जिन्हें बस नए नाम से पेश किया गया था। उन्होंने बिजली कटौती, महंगाई, दूध की कमी और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को संभालने के तरीके को लेकर भी राज्य सरकार की आलोचना की।

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  Sports

'2027 वनडे वर्ल्ड कप मेरा आखिरी होगा, ट्रॉफी जीतने के लिए सब कुछ न्योछावर कर दूंगा', विराट कोहली का बड़ा ऐलान

भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व कप्तान विराट कोहली ने अपने भविष्य के इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। दक्षिण अफ्रीका, ज़िम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में आयोजित होने वाला 2027 वनडे वर्ल्ड कप भारतीय जर्सी में उनका आखिरी विश्व कप होगा। तिरुवनंतपुरम में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज़ से पहले कोहली ने साफ कर दिया कि उनका एकमात्र लक्ष्य भारत को विश्व विजेता बनाना है, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े।

कोहली ने तीन मैचों की सीरीज़ से पहले JioStar से कहा, "मेरे लिए, यह भारत के लिए खेलने वाला आखिरी वर्ल्ड कप होगा। और यही मेरी प्रेरणा है। जैसे, आप जानते हैं, अपना सब कुछ झोंक देना। और ज़ाहिर है, लक्ष्य तो वर्ल्ड कप जीतना ही है। और इसके लिए जो भी करना पड़े, मैं पूरी तरह तैयार हूँ।" अक्टूबर और नवंबर में दक्षिण अफ्रीका, ज़िम्बाब्वे और नामीबिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित होने वाला 2027 वर्ल्ड कप, कोहली का चौथा वनडे वर्ल्ड कप होगा।

37 वर्षीय खिलाड़ी की ये बातें एक ऐसे वनडे साइकल की शुरुआत में आई हैं जिसमें हर मैच का महत्व बढ़ जाता है। भारत ने वेस्टइंडीज़ सीरीज़ के लिए अपनी टीम में कोहली और रोहित शर्मा को शामिल किया है, जबकि शुभमन गिल कप्तान बने रहेंगे क्योंकि टीम 2027 के टूर्नामेंट की तैयारी शुरू कर रही है।

2025 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से, उन्होंने 12 वनडे मैचों में 76 की औसत से 760 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं। 2025 की शुरुआत से, उनके नाम 64.68 की औसत से 1,035 रन हैं, जबकि उनके पिछले 10 वनडे मैचों में तीन शतक और सात बार पचास या उससे ज़्यादा रन बनाए हैं।

उम्मीदों की चिंता नहीं करेंगे
ये आंकड़े उनके खेलने के तरीके में आए एक साफ़ बदलाव के साथ आए हैं। कोहली ने कहा, "सबसे पहले तो बदलाव यह आया है कि मैंने खुद से वादा किया है कि मैं अब और खुलकर खेलूंगा। मैं लोगों की उम्मीदों की चिंता नहीं करूंगा। लंबे समय तक मेरा रोल पारी को संभालने और स्थिरता लाने का रहा है।"

यह आज़ादी पिछले कुछ IPL सीज़न में साफ़ दिखी है, जहाँ कोहली पहले के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा तेज़ी से रन बना रहे हैं। IPL 2026 में, उन्होंने 16 मैचों में 165.85 के स्ट्राइक रेट से 675 रन बनाए। उन्होंने अपनी सबसे तेज़ IPL फ़िफ़्टी भी लगाई और RCB को टाइटल बचाने में मदद की।

ओपनिंग बैटर के तौर पर खेलने से कोहली को रिस्क लेने की हिम्मत मिली; अब वह आउट होने को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाकामी नहीं मानते। उनका कहना है कि उन्होंने यह सीख अपने ODI क्रिकेट में भी अपनाई है। इसका मतलब ज़िम्मेदारी छोड़ना नहीं है। बल्कि, कोहली अपने अनुभव का इस्तेमाल करके क्रीज़ पर जमने के बाद ज़्यादा से ज़्यादा असरदार खेलना चाहते हैं।

"मैं खेल में फ़र्क लाने की कोशिश कर रहा हूँ, ताकि 30-40 रन ज़्यादा बन सकें। मैं ऐसी सोच के साथ खेलना चाहता हूँ कि अगर मैं रिस्क नहीं ले रहा हूँ, तो इसलिए नहीं कि मैं डर रहा हूँ, बल्कि इसलिए कि मैं खुद को ऐसी स्थिति में ला रहा हूँ जहाँ मैं कह सकूँ - ठीक है, अब तेज़ी से रन बनाने का समय आ गया है।"

कोहली का मानना ​​है कि यह सोच ODI गेम में बहुत काम आ सकती है, जहाँ आजकल बहुत ज़्यादा रन बन रहे हैं।

"खेल का मिज़ाज बदल रहा है। खासकर जब हालात तेज़ और अच्छे हों, और दूसरी टीमें आपको 340-350 रन बनाने के लिए मजबूर कर रही हों, तो हमें भी 350-360 रन बनाने में सक्षम होना चाहिए। अब मैं रिस्क लेने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ क्योंकि मुझे पता है कि अगर मैं उस समय रन बना लूँ, तो हम आसानी से 350-360 तक पहुँच जाएँगे। और अगर मैं ऐसा कर पाता हूँ और ज़्यादा देर तक क्रीज़ पर टिकता हूँ, तो आखिर में और भी तेज़ी से रन बना सकता हूँ।"

कोहली के लिए यह बदलाव जितना टेक्निकल था, उतना ही मानसिक भी। "मुझे अपने मन में उस आज़ादी को थोड़ा महसूस करना था। इससे मुझे IPL में भी मदद मिली। मैं उसी आज़ादी के साथ खेल पाया क्योंकि मैं यह नहीं सोच रहा था कि अगर मैं आउट हो गया, तो हमारे लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है।"

उनका कहना है कि यह आज़ादी उन्हें अपने आस-पास के लोगों पर भरोसा करने से मिलती है। "मुझे भरोसा है कि मेरे आस-पास दूसरे खिलाड़ी भी हैं जो बहुत अच्छे हैं और स्थिति को संभाल लेंगे। मुझे खुलकर खेलना है और लगातार ऐसा करने का तरीका खोजना है। मेरे करियर के इस पड़ाव पर यह रोमांचक भी है।"

अब, जब 2027 वर्ल्ड कप में 14 महीने से भी कम समय बचा है, कोहली की नज़रें एक आखिरी अभियान पर हैं - और उन्हें साफ़ पता है कि वह इसे किस तरह से खेलना चाहते हैं।

Sat, 26 Sep 2026 16:05:00 +0530

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