Responsive Scrollable Menu

Sonam Wangchuk ने Ladakh की तुलना China के कब्जे वाले Tibet से करके खड़ा किया विवाद, Central Tibetan Administration ने जताई कड़ी आपत्ति

लद्दाख में अधिकारों, राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर लंबे समय से मुखर रहे जलवायु कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य सोनम वांगचुक अब अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। लद्दाख की मौजूदा परिस्थितियों की तुलना चीन के कब्जे वाले तिब्बत से करने पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने कड़ी आपत्ति जताई है। धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने वांगचुक की टिप्पणी को न केवल अनुचित, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाली बताया है।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेक्शे ने शुक्रवार शाम कहा कि प्रशासन वांगचुक के हालिया सार्वजनिक बयान को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा कि लद्दाख की स्थिति की तुलना तिब्बत के भीतर की परिस्थितियों से करना गलत और वास्तविकता से परे है। उनके मुताबिक तिब्बत आज भी चीन के सत्तावादी शासन के अधीन है, जहां तिब्बतियों के मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर व्यवस्थित दमन जारी है तथा उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मिटाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: Ladakh हिंसा मामले में बड़ा फैसला, उपराज्यपाल ने 20 लोगों पर दर्ज केस वापस लिए

हम आपको बता दें कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा की पहली बरसी पर लोगों को संबोधित करते हुए वांगचुक ने लद्दाख में पिछले वर्ष हुए घटनाक्रम को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा देने के कथित आश्वासनों को पूरा नहीं किया जाना ही पिछले वर्ष के आंदोलन की मूल वजह था।

वांगचुक ने दावा किया कि पिछले साल प्रदर्शन के दौरान पुलिस गोलीबारी में चार लोगों की मौत हुई और करीब 90 लोग घायल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे निहत्थे युवाओं पर स्वचालित हथियारों से गोलियां चलाई गईं। उनका कहना था कि मृतकों के सीने, पीठ और सिर में गोलियां लगी थीं और यह महज भीड़ को नियंत्रित करने के लिए छोड़े गए छर्रे नहीं थे।

इसी संदर्भ में वांगचुक ने लद्दाख की तुलना तिब्बत से करते हुए कहा कि लद्दाख में कथित तौर पर ऐसी ज्यादतियां हो रही हैं, जो उनके अनुसार चीन भी तिब्बत में नहीं कर रहा। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख के लोगों ने भारत को इसलिए चुना था क्योंकि यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है। हालांकि, इसी तुलना ने अब तिब्बती प्रशासन को खुलकर सामने आने के लिए मजबूर कर दिया है।

वांगचुक ने पिछले वर्ष हुई मौतों की जांच के लिए जनता की अदालत गठित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि 24 सितंबर 2025 को मारे गए चार प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे और उन पर कथित रूप से अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया।

वांगचुक ने आंदोलन के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराए जाने के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि 2020 में लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के चुनाव से पहले लद्दाख के कुछ प्रतिनिधियों को विशेष विमान से नई दिल्ली ले जाया गया था और उन्हें राज्य का दर्जा तथा छठी अनुसूची का दर्जा देने का आश्वासन दिया गया था। उनके मुताबिक इन कथित आश्वासनों को पूरा नहीं किए जाने से लोगों में असंतोष बढ़ा और अंततः पिछले साल प्रदर्शन भड़क उठे।

हम आपको याद दिला दें कि हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगाई गई थीं। आगजनी और दंगे के आरोपों के बाद प्राथमिकी दर्ज हुईं और 81 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें वांगचुक भी शामिल थे। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें जोधपुर जेल भेजा गया। करीब 170 दिन हिरासत में रहने के बाद केंद्र सरकार ने इस वर्ष 14 मार्च को उनकी हिरासत वापस ले ली, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया।

अब वांगचुक ने आशंका जताई है कि लद्दाख में कथित अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें किसी मुठभेड़ में निशाना बनाया जा सकता है। दूसरी ओर, तिब्बती प्रशासन की आपत्ति ने इस पूरे विवाद को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। देखा जाये तो एक तरफ वांगचुक लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों और कथित सरकारी वादाखिलाफी का मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन यह स्पष्ट कर रहा है कि चीन के अधीन तिब्बत की राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को लद्दाख से जोड़ना उचित नहीं है।

बहरहाल, इस विवाद ने लद्दाख के अधिकारों की लड़ाई को अब केवल राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग तक सीमित नहीं रहने दिया है। सवाल यह भी उठ खड़ा हुआ है कि लोकतांत्रिक भारत में शासन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर उठाए जा रहे सवालों की तुलना चीन के तिब्बत शासन से किस सीमा तक की जा सकती है और इस तुलना की राजनीतिक तथा ऐतिहासिक कीमत क्या होगी।

Continue reading on the app

Devendra Fadnavis का बड़ा कदम: Maharashtra के 265 तालुकाओं में सूखा घोषित, किसानों की होगी मदद

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए राज्य के 265 तालुकाओं में सूखा घोषित किया। उन्होंने राज्य के कुल 358 तालुकाओं में से 265 में सूखा घोषित किया, जो महाराष्ट्र के कुल इलाक़े का लगभग 75 प्रतिशत है।


फडणवीस ने लातूर में सूखे जैसे हालात को बेहद गंभीर बताया


इससे पहले इस हफ़्ते, फडणवीस ने मराठवाड़ा क्षेत्र के लातूर और धाराशिव में सूखे जैसे हालात को "बेहद गंभीर" बताया। उन्होंने कहा कि इन दोनों ज़िलों में इस साल सामान्य से आधी बारिश हुई है और प्रभावित किसानों को हर संभव मदद का वादा किया। उन्होंने लातूर की निलंगा तहसील का दौरा किया, जो पानी की कमी और फ़सल के नुकसान से जूझ रही है, और वहाँ किसानों से बातचीत की। बाद में उन्होंने धाराशिव ज़िले के कुछ हिस्सों का दौरा किया और पश्चिमी महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले के बारशी इलाक़े में सोयाबीन की फ़सलों का भी जायज़ा लिया। 
फडणवीस ने कहा कि फ़सल के नुकसान का सर्वे सिर्फ़ एक औपचारिकता थी और इसे प्रक्रिया के तौर पर किया जा रहा था, जबकि तबाही पहले ही साफ़ दिख रही थी। उन्होंने कहा, "हमने सभी रिपोर्ट इकट्ठा कर ली हैं और उसी के अनुसार कार्रवाई कर रहे हैं। सरकार ने सूखे की स्थिति को बहुत गंभीरता से लिया है और काम शुरू कर दिया है। हम किसानों की मदद करेंगे, और हमारी कर्ज माफ़ी योजना भी चल रही है और इसे रोका नहीं जाएगा। हम पानी और चारे का भी इंतज़ाम कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: Maharashtra Drought: फसल नुकसान पर Devendra Fadnavis का बड़ा एलान, कल जारी होगा राहत आदेश
मुख्यमंत्री ने राज्य में सूखे से निपटने के लिए कई उपायों की भी घोषणा की, जिनमें शामिल हैं:


ज़मीन के लगान (लैंड रेवेन्यू) में छूट
फ़सल ऋण (crop loans) का पुनर्गठन
खेती से जुड़े कर्ज़ की वसूली पर रोक
खेतों में लगे पंपों के मौजूदा बिजली बिलों में छूट
(7.5 हॉर्सपावर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ़ किया जा चुका है, अब ज़्यादा क्षमता वाले इलेक्ट्रिक पंपों को भी छूट दी गई है)
स्कूल/कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फ़ीस में छूट
रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देकर और ज़्यादा नौकरियां शुरू की जाएंगी
ज़रूरत पड़ने पर पीने के पानी के टैंकर

Continue reading on the app

  Sports

टेस्ट में एक दिन में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले 5 बल्लेबाज, 96 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

5 batsman Most runs in a day in Test: टेस्ट क्रिकेट में एक दिन का खेल आमतौर पर धैर्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इतिहास में कई ऐसी ऐतिहासिक पारियां भी खेली गईं जिन्होंने पूरे मैच का पासा पलट दिया. सर डॉन ब्रैडमैन के बनाए गए 300 से ज्यादा रन से लेकर वैली हैमंड और वीरेंद्र सहवाग की तूफानी पारी और डेनिस कॉम्पटन के ताबड़तोड़ दोहरे शतक तक. इन पारियों ने साबित किया कि एक ही दिन का खेल क्रिकेट के बड़े रिकॉर्ड रचने के लिए काफी होता है.आइए जानते हैं टेस्ट में एक दिन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 5 बल्लेबाज कौन कौन हैं. Sat, 26 Sep 2026 22:12:23 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala | समंदर की गहराई से कच्चा तेल निकालने की तैयारी! | ONGC Discovers Gas | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-26T17:43:16+00:00

Aaj Ka Sutra: शिक्षा ही समाज के अंधकार को खत्म कर सकती है! #shorts #motivational #viralshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-26T17:46:43+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers