Prestige Group ने वापस लिया 2,700 करोड़ रुपये का IPO, बाजार की स्थिति को बताया वजह
रियल एस्टेट कंपनी प्रेस्टीज एस्टेट्स ने बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों और अन्य वजहों का हवाला देते हुए अपने होटल कारोबार के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की सहायक इकाई प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स लिमिटेड (पीएचवीएल) ने आईपीओ लाने के लिए पिछले साल अप्रैल में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा किया था। कंपनी की सार्वजनिक निर्गम के जरिए 2,700 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना थी।
कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को बताया कि निदेशक मंडल ने रणनीतिक विचारों और बाजार की अनिश्चित स्थितियों को देखते हुए डीआरएचपी वापस लेने का निर्णय लिया है। पीएचवीएल बाजार की अनुकूल परिस्थितियों, आवश्यक मंजूरियों और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य में अपने इक्विटी शेयरों के आईपीओ के लिए सेबी के समक्ष नए सिरे से मसौदा दस्तावेज दाखिल करने पर विचार कर सकती है। इस साल अगस्त में प्रेस्टीज एस्टेट्स ने बताया था कि कनाडा की निवेश फर्म सीपीपीआईबी उसकी आतिथ्य शाखा में 3,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी।
बेंगलुरु स्थित प्रेस्टीज एस्टेट्स देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपरों में से एक है। यह प्रमुख शहरों में आवास, कार्यालय, मॉल और होटल विकसित करती है। कंपनी के पास कई होटल हैं।
बिहार सहित चार राज्यों के लोगों को नौकरी नहीं: Bengaluru CEO के फैसले पर क्यों छिड़ी बहस?
Bengaluru Startup Hiring Row: बेंगलुरु के एक startup CEO ने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुषों को नौकरी नहीं देने की बात कही तो सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि CEO ने ऐसा फैसला क्यों लिया. बड़ा सवाल यह है कि अगर गलती एक कर्मचारी ने की, तो उसका असर पूरे राज्य के लोगों पर क्यों पड़े?
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