कठुआ में भल्ले वाला निकला ISI का जासूस, हनीट्रैप में फंसकर साझा की गोपनीय जानकारियां
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के मामले में जांच एजेंसियों ने एक और युवक को हिरासत में लिया है. यह युवक लखनपुर में जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के पास यात्रियों को भल्ले बेचने का काम करता था. जांच में उसके पहले से हिरासत में लिए गए ट्रक चालक और सह चालक से संबंध सामने आने के बाद उसे पूछताछ के लिए पकड़ा गया है.
हनीट्रैप के जरिए जासूसी का शक
जांच एजेंसियों के अनुसार, कठुआ के बरनोटी इलाके के रहने वाले 19 वर्षीय ट्रक चालक और 25 वर्षीय सह चालक को कथित तौर पर हनीट्रैप के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हैंडलरों के संपर्क में लाया गया था. दोनों की एक महिला से सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप कॉल के जरिए बातचीत होती थी. बताया जा रहा है कि महिला ने खुद को जम्मू के अखनूर की रहने वाली बताया था. वह प्रतिबंधित VPN के माध्यम से व्हाट्सऐप कॉल करती थी और बातचीत के दौरान उसने कभी अपना चेहरा दोनों को नहीं दिखाया। इसके बावजूद दोनों उसके संपर्क में बने रहे.
सुरक्षा प्रतिष्ठानों की जानकारी भेजने का आरोप
जांच में यह आरोप सामने आया है कि दोनों संदिग्धों ने जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों में सेना, बीएसएफ, पुलिस तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े कैंपों और प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाई. इसके अलावा जरूरी रूट और सुरक्षा बलों की आवाजाही से जुड़ी सूचनाएं पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलरों तक पहुंचाने का भी आरोप है. इसी जांच के दौरान एजेंसियों को लखनपुर में भल्ले बेचने वाले एक अन्य युवक के बारे में जानकारी मिली. अधिकारियों के अनुसार, यह युवक पहले हिरासत में लिए गए ट्रक चालक और सह चालक के संपर्क में था.
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मोबाइल फोन जांच के लिए FSL भेजा गया
हिरासत में लिए गए युवक के मोबाइल फोन को जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया है. एजेंसियां मोबाइल में मौजूद कॉल रिकॉर्ड, चैट और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच कर रही हैं. जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है.
CCTV के जरिए भी जानकारी भेजने का आरोप
इस मामले में कठुआ के कोर पुन्नु निवासी अमन की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि अमन भी कथित हनीट्रैप के जरिए पाकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में आया था. उस पर अपने घर के बाहर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों और आवाजाही से संबंधित जानकारी पाकिस्तान भेजने का आरोप है. फिलहाल जांच एजेंसियां सभी संदिग्धों के आपसी संपर्क, मोबाइल डाटा और पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलरों से उनके संबंधों की जांच कर रही हैं.
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पश्चिम बंगाल में सर्विस कोटे के दुरुपयोग की जांच शुरू, जूनियर डॉक्टरों की पहचान में जुटा स्वास्थ्य विभाग
कोलकाता, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने उन जूनियर डॉक्टरों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्हें पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में सर्विस कोटा के तहत उच्च शिक्षा का मौका मिला था। आरोप है कि इन डॉक्टरों को आवश्यक मानदंडों को पूरा किए बिना ही यह अवसर दिया गया था।
स्वास्थ्य विभाग के एक सूत्र ने बताया कि साथ ही उन पूर्व प्रभावशाली अधिकारियों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिनके समर्थन के बिना सर्विस कोटे के इस्तेमाल में इस तरह की अनियमितताएं संभव नहीं हो पातीं।
आम नियम यह है कि सर्विस कोटे के तहत किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उच्च शिक्षा का अवसर पाने वाले किसी भी जूनियर डॉक्टर को अनिवार्य रूप से राज्य के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में तीन साल की सेवा देनी होती है।
स्वास्थ्य विभाग के अंदरूनी सूत्र ने कहा, राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्त एक कमेटी की हालिया जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां पिछली सत्ताधारी पार्टी के करीबी जूनियर डॉक्टरों को दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में तीन साल की सेवा दिए बिना ही सर्विस कोटे के तहत उच्च शिक्षा करने का मौका मिल गया।
उन्होंने बताया कि जांच कमेटी ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के कुछ पूर्व प्रभावशाली अधिकारियों की संलिप्तता का भी जिक्र किया था, जिनके प्रत्यक्ष संरक्षण के बिना सर्विस कोटे के उपयोग में ऐसी अनियमितताएं संभव नहीं हो पातीं। अब राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस मामले में उन विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि चार सदस्यीय जांच कमेटी ने इस मामले पर अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है। अब यह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और विभाग के अन्य शीर्ष अधिकारियों पर निर्भर है कि वे बिना मानदंड पूरे किए सर्विस कोटा का लाभ उठाने वाले जूनियर डॉक्टरों और उन्हें संरक्षण देने वाले विभागीय अधिकारियों दोनों के भविष्य पर क्या फैसला लेते हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारदवत मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं देखी है और रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही वह जरूरी अगले कदमों की घोषणा करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, जिन जूनियर डॉक्टरों की पहचान जांच कमेटी ने बिना मानदंड पूरा किए सर्विस कोटे का फायदा लेने वाले के रूप में की है, उनमें से एक नाम अविक डे का भी है, जिनका नाम अगस्त 2024 में आरजी कर रेप और मर्डर केस से जुड़े विवाद के दौरान सामने आया था।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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